बाल यौन शोषण के दोषी को बनाया जाएगा नपुंसक

इस नियामक में बच्चों का यौन शोषण करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए गए हैं, जिसमें यौन गतिविधियों के लिए गतिशील हॉर्मोन को घटाने के लिए इंजेक्शन लगाना शामिल है. इंडोनेशिया में हाल के दिनों में बाल यौन अपराधों के मामले बढ़े हैं.

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रासायनिक रूप से नपुंसक बनाने का फैसला रासायनिक रूप से नपुंसक बनाने का फैसला

मुकेश कुमार / IANS

  • जकार्ता,
  • 04 फरवरी 2016,
  • अपडेटेड 7:11 PM IST

इंडोनेशिया में बाल यौन शोषण के दोषियों को नपुंसक बनाने का फैसला किया गया है. देश के बाल सुरक्षा आयोग ने गुरुवार को यह जानकारी दी. इस संबंध में राष्ट्रपति जोको विडोडो ने एक नियामक जारी किया है.

इस नियामक में बच्चों का यौन शोषण करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए गए हैं, जिसमें यौन गतिविधियों के लिए गतिशील हॉर्मोन को घटाने के लिए इंजेक्शन लगाना शामिल है. इंडोनेशिया में हाल के दिनों में बाल यौन अपराधों के मामले बढ़े हैं.

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आयोग प्रमुख एरिस मर्डेका ने कहा कि राष्ट्रपति बाल यौन शोषण के अपराधियों को रासायनिक रूप से नपुंसक बनाने के नए कानून पर सहमत हो गए हैं. इस नए कानून के तहत बच्चों के यौन शोषण को असामान्य अपराध की श्रेणी में रखा गया है.

एशियाई देशों ने उठाया सार्थक कदम
मलेशिया और भारत ने भी हाल में बाल यौन अपराधों में शामिल अपराधियों और दुष्कर्मियों के लिए इसी तरह के कदम उठाने की घोषणा की थी. दक्षिण कोरिया पहला एशियाई देश था, जिसने 2011 में इस तरह की सजा के लिए कड़े कदम उठाए.

भारत में लागू है पॉस्को कानून
भारत में बाल यौन शोषण के अपराधियों पर पॉस्को कानून के तहत केस चलाया जाता है. इस कानून को दिल्ली में हुए निर्भया रेपकांड के बाद पारित किया गया था. इसके तहत बच्चों को यौन शोषण, अश्लीलता और छेड़छाड़ से सुरक्षित किया जाता है.

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