बॉयज लॉकर रूम की साजिश में बालिग लड़के भी शामिल, नोएडा से जुड़ा कनेक्शन

साइबर सेल के अधिकारियों की मुताबिक इस बॉयज लॉकर रूम में 4 ऐसे लड़के भी हैं जो स्कूल के स्टूडेंट हैं लेकिन उनकी उम्र 18 साल है यानी वो बालिग हैं. साइबर सेल के अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने इन लड़कों से पूछताछ की है. इनमें एक लड़का नोएडा के स्कूल का भी है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

अरविंद ओझा

  • नई दिल्ली,
  • 06 मई 2020,
  • अपडेटेड 7:51 AM IST

  • दिल्ली-एनसीआर के छात्र थे शामिल
  • ग्रुप में शामिल 4 लड़कों उम्र 18 साल
  • स्कूल के जरिए हो रही है पूछताछ

इंस्टाग्राम पर चैट ग्रुप बनाकर अश्लील बातें करने वाले बॉयज लॉकर रूम की जांच में नई बातें सामने आई है. साइबर सेल की जांच में पता चला है कि ग्रुप में अलग-अलग स्कूल के लड़के थे. इस चैट ग्रुप में सिर्फ दिल्ली ही नहीं बल्कि एनसीआर के भी स्टूडेंट शामिल भी थे.

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नोएडा के बच्चे भी बॉयज लॉकर रूम से जुड़े

साइबर सेल ने अब तक दिल्ली और नोएडा के स्कूल के लड़कों की पहचान की है. पुलिस की जांच में सामने आया है कि ग्रुप में सभी एक दूसरे को नहीं जानते थे. बस ये लड़के एक दूसरे से कनेक्ट होते गए और ग्रुप बनता गया.

18 साल के छात्र भी शामिल

साइबर सेल के अधिकारियों के मुताबिक इस ग्रुप में 4 ऐसे लड़के भी हैं जो स्कूल के स्टूडेंट हैं लेकिन उनकी उम्र 18 साल है यानी वो बालिग हैं. साइबर सेल के अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने इन लड़कों से पूछताछ की है. इनमें एक लड़का नोएडा के स्कूल का भी है.

बता दें कि बॉयज लॉकर रूम सोमवार को ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा था. दरअसल, ये इंस्टाग्राम पर बनाए गए एक अकाउंट का नाम है, जिस पर कथित रूप से कुछ स्कूली बच्चे अश्लील चैट कर रहे थे. आरोप है कि इस ग्रुप में लड़कियों की फोटो डालकर गैंगरेप करने की बात कही जा रही थी. इस ग्रुप के ज्यादातर बच्चे साउथ दिल्ली से हैं. वहीं मामले को दक्षिणी दिल्ली पुलिस ने साइबर सेल से जांच करने के लिए कहा था.

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पढ़ें- 'बॉयज लॉकर रूम' के बाद 'गर्ल्स लॉकर रूम' चैट वायरल, कार्रवाई की मांग

इंस्टाग्राम ने नहीं दिया अबतक जवाब

साइबर सेल के अधिकारियों के मुताबिक उन्होंने इंस्टाग्राम से भी नोटिस भेजकर जवाब मांगा था लेकिन अभी तक जवाब नहीं मिला है.

पढ़ें- गैंगरेप प्लानिंग की चैट वायरल होने पर केस दर्ज, इंस्टाग्राम से मांगी गई डिटेल

साइबर सेल का कहना है कि बच्चों की प्राइवेसी का पूरा ख्याल रखा जा रहा है. जांच के दौरान किसी भी लड़के को डायरेक्ट कॉल करके नहीं बुलाया जा रहा है, बल्कि पहले उनके परिवार या स्कूल से संपर्क किया जा रहा है, फिर बच्चों से बात की जा रही है.

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