गोद ली बच्ची को प्रताड़ित करता था ये विदेशी दंपति, 16 साल बाद भारत वापसी

माटिल्डा ने बताया कि गोद लेने की प्रक्रिया के दौरान तो स्वीडेन के उसके माता-पिता उसे अक्सर गिफ्ट भेजते रहते थे. लेकिन उनके साथ स्वीडेन जाने के कुछ ही वर्षों के अंदर सारी खुशियां गम में बदल गईं.

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भारत से गोद ली बच्ची को प्रातड़ित करता था स्वीडिश दंपति भारत से गोद ली बच्ची को प्रातड़ित करता था स्वीडिश दंपति

आशुतोष कुमार मौर्य

  • नई दिल्ली,
  • 31 मार्च 2018,
  • अपडेटेड 4:23 PM IST

दिल्ली के एक अनाथ आश्रम से सात साल की अवस्था में गोद ली गईं माटिल्डा गुस्ताफसॉन स्वीडेन में अपने माता-पिता को छोड़कर 16 साल बाद फिर से भारत लौट आई हैं. लेकिन उनकी स्वदेश वापसी की यह कहानी बेहद दुख भरी है. दरअसल स्वीडेन के जिस दंपति ने उन्हें गोद लिया, उस दंपति ने माता-पिता के प्यार की जगह माटिल्डा को इतना प्रताड़ित किया कि स्वीडेन में वह फोस्टर होम में रहने चली गईं.

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माटिल्डा के मुताबिक, दिल्ली में अनाथ आश्रम में बिताए कुछ वर्षों की उनके दिमाग में बहुत ही धुंधली स्मृतियां बची हैं. उन्हें याद है जब अनाथ आश्रम की वार्डन ने उन्हें बताया था कि उन्हें गोद लिया जा रहा है और अब उनका अपना परिवार होगा, तो उन्हें कितनी खुशी हुई थी.

लेकिन उनकी यह खुशी ज्यादा दिन नहीं टिकी. माटिल्डा ने बताया कि गोद लेने की प्रक्रिया के दौरान तो स्वीडेन के उसके माता-पिता उसे अक्सर गिफ्ट भेजते रहते थे. लेकिन उनके साथ स्वीडेन जाने के कुछ ही वर्षों के अंदर सारी खुशियां गम में बदल गईं.

माटिल्डा का मां की बीमारी है और स्वीडेन में उसने दो बार माटिल्डा की जान लेने की कोशिश भी की. जहां मां की तबीयत खराब रहती, वहीं पिता धीरे-धीरे परिवार से दूर रहने लगे. वह बात-बात पर गुस्सा करते थे.

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इन सबका असर माटिल्डा की पढ़ाई पर पड़ने लगा और स्कूल में उनकी परफॉर्मेंस गिरने लगी. इसी दौरान पता लगा कि माटिल्डा को डिस्लेक्सिया की शिकायत है, लेकिन उन्हें कभी सही उपचार नहीं मिल सका.

घर पर पिता बात-बात पर मां से झगड़ा करते, गालियां देते तो स्कूल में माटिल्डा को उनकी त्वचा के रंग को लेकर मजाक उड़ाया जाता. माटिल्डा को घर पर ठीक से खाना भी नहीं मिलता था और अक्सर उन्हें नूडल्स से पेट भरना पड़ता था.

माटिल्डा को ऐसा लगने लगा था कि स्वीडेन में जिन माता-पिता ने उन्हें गोद लिया था, अब वे उसे पसंद नहीं करते. स्कूल मैनेजमेंट को जब लगने लगा कि माटिल्डा परेशानी में हैं तो उन्होंने एक सोशल वर्कर से मदद ली. सोशल वर्कर ने स्कूल मैनेजमेंट को सुझाव दिया कि माटिल्डा को फोस्टर होम में रखा जाए.

माटिल्डा ने जब घर पर फोस्टर होम में रहने की बात बताई तब भी उसके स्विडिश माता-पिता की प्रतिक्रिया बेहद ठंडी रही. हालांकि माटिल्डा इस बात की शुक्रगुजार हैं कि उन्हें एक अच्छा फोस्टर होम मिला.

माटिल्डा 16 साल बाद अपने देश भारत लौट तो आई हैं, लेकिन अपने असली माता-पिता की तलाश की उनकी राह कहीं से आसान नहीं लग रही. माटिल्डा के एडॉप्शन डॉक्यूमेंट्स में भी इस बात का कोई जिक्र नहीं है कि उनके असली माता-पिता कौन हैं या किन परिस्थितियों में उन्हें अनाथ आश्रम लाया गया.

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