दबंगों की दुनिया: कत्ल करके क्राइम वर्ल्ड में मारी थी एंट्री, योगी सरकार ने इस माफिया के घर पर चलवाया था बुलडोजर

पुलिस के रिकॉर्ड में पूर्वांचल का एक गैंग है, जिसकी पहचान है गैंग आईडी-23. वाराणसी के पांडेपुरा का रहने वाला अभिषेक सिंह हनी उर्फ जहर इस गैंग का सरगना है. वो पिछले करीब 17 वर्षों से अपराध की दुनिया में सक्रिय है.

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अभिषेक सिंह हनी का नाम जुर्म की दुनिया में ज़हर के नाम से भी जाना जाता है अभिषेक सिंह हनी का नाम जुर्म की दुनिया में ज़हर के नाम से भी जाना जाता है

परवेज़ सागर

  • नई दिल्ली,
  • 18 अगस्त 2023,
  • अपडेटेड 9:27 PM IST

Mafia Abhishek Singh Honey aka Zahar: उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस साल माफियाओं की जो लिस्ट जारी की थी, उसमें एक से बढ़कर एक शातिर अपराधियों और माफियाओं के नाम शामिल हैं. माफियाओं की उसी लिस्ट में पूर्वांचल के एक ऐसे अपराधी का नाम भी है, जिसे लोग 'ज़हर' के नाम से भी जानते हैं. इस शातिर माफिया के खिलाफ यूपी में करीब 3 दर्जन संगीन मामले दर्ज हैं. इस शातिर अपराधी का नाम है अभिषेक सिंह हनी उर्फ ज़हर. 

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कौन है अभिषेक सिंह हनी उर्फ ज़हर? 
पुलिस के रिकॉर्ड में पूर्वांचल का एक गैंग है, जिसकी पहचान है गैंग आईडी-23. वाराणसी के पांडेपुर का रहने वाला अभिषेक सिंह हनी उर्फ जहर इस गैंग का सरगना है. वो पिछले करीब 17 वर्षों से अपराध की दुनिया में सक्रिय है. पहले वो अनू त्रिपाठी गैंग का शार्प शूटर हुआ करता था, लेकिन उसकी मौत के बाद से वो खुद गैंग का सरगना बन बैठा. उसके पिता कभी कांग्रेस पार्टी से जुड़े थे. लेकिन जबसे योगी आदित्यनाथ सरकार के फरमान पर यूपी पुलिस ने इस अपराधी का नाम मोस्ट वॉन्टेड माफियाओं की काली-सूची में डाला है, तब से इस माफिया और उसके गुर्गों की हालत खराब है. वे बचने के लिए इधर-उधर भाग रहे हैं.

28 अगस्त 2020
उस दिन वाराणसी के जैतपुरा थाना इलाके में चौकाघाट पर डबल मर्डर की वारदात ने पूरे शहर को दहला दिया था. उस  दोहरे हत्याकांड की साजिश में अभिषेक सिंह हनी उर्फ ज़हर का नाम भी सामने आया था. तभी वो सुर्खियों में आ गया था. हालांकि उसके नाम पहले भी कई संगीन मामले दर्ज थे.

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ज़हर के खिलाफ दर्ज हैं 3 दर्जन मामले
पुलिस रिकॉर्ड की बात करें तो अकेले वाराणसी जिले में ही अभिषेक सिंह हनी उर्फ ज़हर के खिलाफ हत्या की कोशिश, हत्या, जबरन वसूली और शस्त्र अधिनियम समेत कई संगीन धाराओं में मामले दर्ज हैं. उसके खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या करीब 35 बताई जाती है. 

घर पर चला था बुलडोजर 
अभिषेक सिंह हनी उर्फ ज़हर का घर वाराणसी के खजूरी मोहल्ला की अहिराना गली में मौजूद था. दो मंजिला ये मकान जिला प्रशासन ने मार्च 2021 में बुलडोजर की मदद से ढहा दिया था. इस कार्रवाई से ज़हर के गैंग में भी हड़कंप मच गया था. जानकारी के मुताबिक, ज़हर के खिलाफ दर्ज करीब 35 मामलों में से 19 केस तो अकेले वाराणसी के कैंट थाने में ही दर्ज हैं.

हत्या के पांच मामले
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, अभिषेक सिंह हनी उर्फ ज़हर कोई छोटा-मोटा अपराधी नहीं है, बल्कि उसके खिलाफ अकेले हत्या के ही पांच मुकदमे दर्ज हैं. इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जुर्म की दुनिया में ज़हर की पैठ कितनी गहरी है. यहां तक कि उसके खिलाफ पहला मामला भी हत्या का ही दर्ज किया गया था. बताया जाता है कि साल 2007 में गाजीपुर जिले में उसके खिलाफ हत्या का पहला मामला दर्ज हुआ था. इसके बाद उसने पलटकर पीछे नहीं देखा. उसकी छवि एक शातिर और खतरनाक अपराधी की बनती गई. नतीजा ये हुआ कि ज़हर के खिलाफ वाराणसी के थाना कैंट, चोलापुर, कोतवाली और सिगरा में कई संगीन मामले दर्ज होते रहे.

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ज़हर को मिला था गैंगस्टर सुभाष ठाकुर का साथ
अभिषेक सिंह हनी उर्फ ज़हर यूं ही जुर्म की दुनिया में आगे नहीं बढ़ा, बल्कि उसके सिर पर हाथ था यूपी के कुख्यात गैंगस्टर सुभाष ठाकुर का. उसी की छत्रछाया में ज़हर ने जुर्म का सबक सीखा और एक आम युवक से कुख्यात अपराधी बन बैठा. ऐसा अपराधी जिसे लोग ज़हर के नाम से ही पुकारने लगे थे. माफिया गैंगस्टर सुभाष ठाकुर भले ही जेल में बंद था, लेकिन वो जेल के अंदर से ही अभिषेक सिंह हनी को फरमान सुनाया करता था. उसे काम दिया करता था. यहां तक कि किसी भी वारदात को अंजाम देने के लिए वो ज़हर को जेल से ही हथियार भी मुहैया करवाता था.

सरकारी कारतूसों की खरीद फरोख्त
गैंगस्टर सुभाष ठाकुर से अभिषेक सिंह हनी की मुलाकात फतेहगढ़ सेंट्रल जेल में हुई थी. वे दोनों ही वहां कैद रह चुके थे. यही वजह थी कि सुभाष ठाकुर ने खुद जेल में बंद रहते हुए भी उसे जेल के बाहर हथियार मुहैया कराए थे. फतेहगढ़ जेल में ही ज़हर की मुलाकात दूसरे माफिया उदयभान सिंह उर्फ डॉक्टर से हुई थी. उसी दौरान ये खुलासा भी हुआ था कि अभिषेक सिंह हनी सरकारी कारतूसों की खरीद-फरोख्त में भी शामिल था. 

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ऐसे पुलिस के हत्थे चढ़ा था अभिषेक सिंह हनी
अभिषेक अपराध के रास्ते पर इतनी तेज दौड़ रहा था कि पुलिस उसके पीछे थी और वो आगे-आगे. लेकिन वो पुलिस के हाथ नहीं आ रहा था. इसीलिए पुलिस  ने उसे पकड़ने के लिए मुखबिरों का जाल फैलाया और पुलिस की ये तरकीब काम कर गई. पुलिस को एक मुखबिर से खबर मिली थी कि अभिषेक अपने कुछ साथियों के साथ इलाके में आने वाला है. यह सूचना पाकर यूपी एसटीएफ की टीम ने उसे उस वक्त घेर लिया, जब वो अपने 4 गुर्गों के साथ सारनाथ इलाके में किसी वारदात को अंजाम देने जा रहा था. उस वक्त वो एक सफेद रंग की कार में सवार था. पुलिस ने उसे रोकने की कोशिश की तो उसने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी. इसी मुठभेड़ के दौरान अभिषेक अपने साथी रमेश पटेल, सूर्य प्रताप सिंह और रवि सिंह के साथ पुलिस के हत्थे चढ़ गया था. तब पुलिस ने पकड़े गए चारों बदमाशों के कब्जे से दो 9 एमएम पिस्टल, 6 कारतूस, एक 32 बोर की पिस्तौल और एक सफेद इंडिगो कार बरामद की थी. 

यूपी के 3 जिलों में दर्ज हैं अभिषेक के खिलाफ FIR
बदमाश अभिषेक पर कभी 50 हजार का इनाम था. उसके खिलाफ यूपी के वाराणसी, जौनपुर और गाजीपुर जिले में मामले दर्ज हैं. अभिषेक सिंह को अब एनकाउंटर का डर सता रहा है. फिलहाल, पुलिस उसे शिद्दत से तलाश कर रही है. लेकिन अभी तक उसका कुछ अता-पता नहीं है. बता दें कि सूबे में योगी सरकार आने के बाद से ही अपराधी माफिया लगातार यूपी पुलिस के निशाने पर हैं. पुलिस ऐसे कई वॉन्टेड अपराधियों को एनकाउंटर में ढेर भी कर चुकी है.
 

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