पंजाबः PPS से IPS प्रमोट हुए 24 अफसरों में एक भी दलित नहीं, आयोग ने सरकार से पूछा- ऐसा क्यों?

पंजाब पुलिस के 24 पीपीएस अफसरों की आईपीएस के रूप में प्रोमोट किया गया, जिसमें आरक्षण नीति बिल्कुल नजरअंदाज की गई. इस प्रमोशन में एक भी दलित का नाम नहीं था.

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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (फाइल फोटो) पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 जून 2021,
  • अपडेटेड 1:43 PM IST
  • राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने भेजा नोटिस
  • 15 दिन के अंदर सरकार से मांगा गया जवाब

पंजाब में पीपीएस से आईपीएस प्रमोट हुए अफसरों पर बवाल शुरू हो गया है. प्रमोट हुए 24 अफसरों में एक भी दलित नहीं है. इस मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने अपने चेयरमैन विजय सांपला के आदेशों पर पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. आयोग का कहना है कि प्रमोशन में आरक्षण नीति का पालन नहीं किया गया है.
 
इसी साल अप्रैल में पंजाब पुलिस के 24 पीपीएस अफसरों की आईपीएस के रूप में प्रमोट किया गया, जिसमें आरक्षण नीति बिल्कुल नजरअंदाज की गई. इस प्रमोशन में एक भी दलित का नाम नहीं था. प्रमोशन में भेदभाव का आरोप लगाते हुए सुशील कुमार, पीपीएस, कमांडेंट 1 आआईआरबी ने आयोग को शिकायत दी है.

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इस शिकायत पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने पंजाब सरकार के मुख्य सचिव, गृह सचिव और पंजाब पुलिस के डीजीपी को नोटिस जारी किया है. आयोग ने सभी संबंधित अधिकारियों को आरोपों/मामले में जांच कर तुरंत एक्शन टेकन रिपोर्ट आयोग के समक्ष पंद्रह दिनों में पेश करने का निर्देश दिया है.

विजय सांपला ने चेतावनी देते हुए कहा कि सरकारी नौकरी में प्रमोशन हेतु भारत के संविधान तहत बने कानूनों को नज़रअंदाज करना कानूनी जुर्म है, जिन अफसरों ने केंद्र सरकार के प्रमोशन के रूल एवं पंजाब सरकार के ‘पंजाब शड्यूल कास्ट एण्ड बैकवर्ड क्लास (रेज़र्वैशन इन सर्विसेज़) अमेंडमेंट ऐक्ट 2018 ( पंजाब ऐक्ट नंबर 17 ऑफ 2018 )’ को नजरअंदाज किया है उन पर आयोग कानून अनुसार सख्त से सख्त कारवाई करेगा.

 

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