कार में तीन लाश, हेलमेट और मर्डर की थ्योरी... क्या है दिल्ली के पीरागढ़ी कांड का पूरा सच!

दिल्ली के पीरागढ़ी फ्लाइओवर के पास एक कार से तीन शव मिलने के बाद सनसनी फैल गई थी. मरने वालों की शिनाख्त रणधीर, शिव नरेश और लक्ष्मी देवी के तौर पर हुई. लेकिन यह मामला जितना सीधा दिख रहा था, उतना है नहीं. हालात बिल्कुल मर्डर जैसे थे. पढ़ें इस वारदात का पूरा सच.

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इस मामले की पहेली सुलझने के बजाय उलझती जा रही है (फोटो-ITG) इस मामले की पहेली सुलझने के बजाय उलझती जा रही है (फोटो-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:28 PM IST

Delhi Car Death Mystery: दिल्ली के पीरागढ़ी फ्लाइओवर के पास रविवार की दोपहर एक सफेद टाटा टिगोर कार खड़ी थी. बाहर से सब सामान्य लग रहा था, लेकिन कार के अंदर का मंजर रोंगटे खड़े कर देने वाला था. दोपहर करीब 3:50 बजे पुलिस को PCR कॉल मिली थी कि कार में बैठे लोग कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहे हैं. राहगीरों को शक होने पर पुलिस को यह कॉल की गई थी. पुलिस मौके पर पहुंची. कार के भीतर देखा तो तीन लोग बेसुध थे. जब कार का दरवाजा खोला गया तो पता कार में मौजूद तीनों लोग मर चुके थे. जिनमें एक महिला थी. अब वारदात के कई घंटे बीत जाने के बाद भी एक सवाल जस का तस है कि आखिर कार के अंदर हुआ क्या था?

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कार के अंदर तीन मुर्दा जिस्म
दरअसल, जब पुलिस ने मौके पर जाकर उस सफेद कार का दरवाजा खोला, तो उसमें सीटों पर दो पुरुष और एक महिला की लाश थी. ये मंजर देखकर पुलिस भी हैरान थी. पुलिस ने जांच पड़ताल शुरू की. सबसे पहला काम था, मरने वाली की शिनाख्त. जिसे शुरुआती जांच के दौरान पूरा किया गया. मृतकों की पहचान रणधीर (76), शिव नरेश (40) और लक्ष्मी देवी (40) के रूप में हुई. सफेद टाटा टिगोर कार रणधीर की ही थी. हालांकि मरने वाले तीनों लोग अलग-अलग इलाकों के रहने वाले थे. रणधीर और शिव नरेश रणहोला के निवासी थे, जबकि लक्ष्मी देवी जहांगीरपुरी की रहने वाली बताई गई. अब सवाल ये था कि तीनों एक साथ उस जगह पर कैसे और क्यों पहुंचे थे?

रिश्तों की उलझी कड़ी!
कार में मुर्दा पाए गए तीनों लोगों के आपसी संबंध ने इस मामले को और पेचीदा बना दिया. शिव नरेश, रणधीर के यहां प्रॉपर्टी का काम देखता था. यानी उन दोनों के बीच मालिक और कर्मचारी का रिश्ता साफ था. रणधीर मालिक था और शिव नरेश उसका कर्मचारी. लेकिन कार में लक्ष्मी देवी की मौजूदगी ने कई नए सवाल खड़े कर दिए. क्या वे तीनों किसी प्रॉपर्टी डील के सिलसिले में मिले थे? या पहले से उनकी कोई योजना थी? पुलिस अब तीनों की कॉल डिटेल और पिछले 24 घंटों की गतिविधियों को खंगाल रही है.

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किसी के शरीर पर नहीं मिले जख्म
जांच के दौरान पुलिस को तीनों की लाश पर किसी तरह के चोट या संघर्ष के निशान नहीं मिले हैं. कार के अंदर भी लूटपाट या जबरदस्ती के संकेत भी नहीं थे. ऐसे में शुरुआती तौर पर जहर खाने से मौत की आशंका जताई जा रही है. पुलिस इस एंगल से इस मामले को सुसाइड मानकर जांच कर रही है. हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने तक अंतिम नतीजा नहीं निकाला जा सकता.

सुसाइड या साजिश?
जहां पुलिस आत्महत्या की आशंका जता रही है, वहीं परिजन हत्या की थ्योरी पर अड़े हैं. शिव नरेश के भाई राम नरेश ने साफ कहा कि यह सुसाइड नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या का मामला है. उनका दावा है कि शिव नरेश को फोन कर बुलाया गया था. उसका हेलमेट भी कार में मिला, जो इस बात का संकेत देता है कि वह सामान्य तरीके से वहां पहुंचे थे.

हेलमेट बना बड़ा सुराग
कार में मिला हेलमेट इस केस की अहम कड़ी बन गया है. अगर तीनों ने आत्महत्या की, तो क्या वे पहले से योजना बनाकर आए थे? या किसी ने उन्हें बहाने से बुलाया? परिजनों का कहना है कि प्रॉपर्टी के लेन-देन को लेकर विवाद हो सकता है. ऐसे में पुलिस के सामने यह चुनौती है कि क्या यह सामूहिक आत्महत्या है या कोई खूनी साजिश?

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करोड़ों की संपत्ति और सवाल
अब रणधीर की बात की जाए तो वह करोड़ों की संपत्ति के मालिक थे. बापरौला गांव के मूल निवासी रणधीर ने गांव के आसपास जमीन पर गोदाम और दुकानें बनाकर किराए पर दे रखी थीं. उनका एक सीएनजी पंप भी था. वे प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री और ब्याज पर पैसे देने का काम भी करते थे. ऐसे में उनकी अचानक मौत कई आर्थिक और कारोबारी सवाल भी खड़े करती नजर आ रही है.

परिवार की पृष्ठभूमि
रणधीर के भतीजे मोहित के मुताबिक, करीब 20 साल पहले उनके इकलौते बेटे की कैंसर से मौत हो गई थी. परिवार में पत्नी, बहू, एक पोता और एक पोती हैं. वहीं शिव नरेश मूल रूप से यूपी के एटा जिले के नंगली लक्ष्की गांव के रहने वाले थे. 20 साल से दिल्ली में रहकर काम कर रहे थे. उनके परिवार में पत्नी और दो बेटे हैं.

संजय गांधी अस्पताल में इंतजार
सोमवार को रणधीर और शिव नरेश के परिजन मंगोलपुरी स्थित संजय गांधी अस्पताल पहुंचे. अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पीएम रिपोर्ट ही बताएगी कि मौत जहर से हुई या किसी और वजह से. फिलहाल सभी पहलुओं पर जांच जारी है.

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महिला की पहचान
लक्ष्मी देवी की पहचान तो हो गई है, लेकिन उनके परिवार के बारे में अभी ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है. वह जहांगीरपुरी की रहने वाली थी. उनका इस पूरी कहानी में क्या किरदार था? क्या वे किसी डील का हिस्सा थीं या किसी और वजह से वहां मौजूद थीं? यह भी जांच का अहम बिंदु है.

कई घंटे बाद भी रहस्य बरकरार
घटना के करीब 24 घंटे से ज्यादा गुजर जाने के बाद भी इस डेथ मिस्ट्री की पूरी तस्वीर साफ नहीं हो पाई है. पुलिस फॉरेंसिक टीम की रिपोर्ट और कॉल रिकॉर्ड का इंतजार कर रही है. आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है. हर एंगल से जांच जारी है, लेकिन फिलहाल जवाब से ज्यादा सवाल सामने नजर आ रहे हैं.

क्या सुसाइड नोट मिला?
अब तक किसी सुसाइड नोट की पुष्टि नहीं हुई है. अगर यह आत्महत्या है, तो कारण क्या था? क्या कोई आर्थिक दबाव या निजी विवाद था? और अगर हत्या है, तो हत्यारा कौन? पुलिस इन सभी सवालों के जवाब तलाशने में जुटी है.

परिजनों की मांग
परिजन लगातार निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि बिना पूरी जांच के इसे सुसाइड कहना जल्दबाजी होगी. राम नरेश ने साफ कहा है कि उनके भाई के साथ गलत हुआ है. ऐसे में केस अब संवेदनशील हो चुका है.

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सच का इंतजार
पीरागढ़ी फ्लाइओवर के नीचे खड़ी वह सफेद कार अब सिर्फ एक वाहन नहीं, बल्कि कई अनसुलझे सवालों का प्रतीक बन चुकी है. तीन जिंदगियां एक साथ खत्म हो गईं, लेकिन पीछे छोड़ गईं रहस्य की परतें. क्या यह सामूहिक आत्महत्या थी या प्रॉपर्टी से जुड़ी साजिश? जवाब पोस्टमार्टम और जांच के बाद ही सामने आएगा. तब तक, यह केस दिल्ली की एक और रहस्यमयी कहानी बन चुका है.

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