बाटला हाउस एनकाउंटर साइट से फरार इंडियन मुजाहिदीन आतंकी आरिज दोषी करार

दिल्ली की साकेत कोर्ट ने सोमवार को बहुचर्चित बाटला हाउस एनकाउंटर मामले में अपना फैसला सुनाया. अदालत ने इंडियन मुजाहिद्दीन के आतंकी आरिज खान को दोषी करार दिया है.

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साल 2008 में हुआ था बाटला हाउस एनकाउंटर मामला (फाइल फोटो) साल 2008 में हुआ था बाटला हाउस एनकाउंटर मामला (फाइल फोटो)

अरविंद ओझा / पूनम शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 08 मार्च 2021,
  • अपडेटेड 2:57 PM IST
  • बाटला हाउस एनकाउंटर मामले में साकेत कोर्ट का फैसला
  • इंडियन मुजाहिदीन का आतंकी आरिज दोषी करार

दिल्ली की साकेत कोर्ट ने सोमवार को बहुचर्चित बाटला हाउस एनकाउंटर से जुड़े एक मामले में अपना फैसला सुनाया. अदालत ने इंडियन मुजाहिद्दीन के आतंकी आरिज खान को दोषी करार दिया है. 15 मार्च को आरिज की सजा का ऐलान कर दिया जाएगा.

अदालत ने आरिज खान को धारा 302, 307 और आर्म्स एक्ट में दोषी करार दिया है. बता दें कि दिल्ली में साल 2008 में हुए बाटला हाउस एनकाउंटर केस के बाद आरिज भाग गया था, साल 2018 में उसे नेपाल से गिरफ्तार किया गया था.

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अदालत ने फैसले के दौरान जांच अधिकारी को कहा कि वो आरिफ खान और उसके परिवार की आर्थिक स्थिति की जानकारी लेकर अगली तारीख को कोर्ट को बताएं. उसी के बाद कोर्ट के द्वारा तय किया जा सकेगा कि परिवार से कितनी राशि वसूल की जाएगी.

आपको बता दें कि बाटला हाउस एनकाउंटर मामले में इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा की जान चली गई थी, जबकि पुलिसकर्मी बलवंत सिंह-राजवीर को भी जान से मारने की कोशिश की गई थी. बाटला हाउस एनकाउंटर मामले में इससे पहले आरोपी शहजाद अहमद को 2013 में सजा हुई थी. जबकि इनके 2 साथी आतिफ आमीन और मोहम्मद साजिद मारे गए थे.

कौन है आतंकी आरिज खान?
अगर इंडियन मुजाहिद्दीन के आतंकी आरिज खान की बात करें, तो साल 2008 में दिल्ली-जयपुर-अहमदाबाद और यूपी की अदालतों में जो धमाके हुए थे, उनके मुख्य साजिशकर्ताओं में आरिज का नाम था. इन सभी धमाकों में कुल 165 लोगों की जान गई थी, जबकि 535 लोग घायल हुए थे. 

धमाकों के बाद तब आरिज पर 15 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था और इसके खिलाफ इंटरपोल के जरिए रेड कॉर्नर नोटिस निकला हुआ था. बता दें कि आजमगढ़ के रहने आरिज खान उर्फ जुनैद को स्पेशल सेल की टीम ने फरवरी 2018 में गिरफ्तार किया.

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कैसे हुआ था बाटला हाउस एनकाउंटर
गौरतलब है कि बाटला हाउस एनकाउंटर 19 सितंबर 2008 की सुबह हुआ था. तब स्पेशल सेल को एक सूचना मिली थी कि इंडियन मुजाहिद्दीन के कुछ आतंकी बाटला हाउस इलाके के एक मकान में छिपे हुए हैं. इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा समेत कई पुलिस अधिकारी उस वक्त मौके पर पहुंचे और आतंकियों को घेरने का प्लान बनाया. 

तब आतंकियों के साथ बाटला हाउस के मकान नंबर L-18 में मुठभेड़ हुई, दो आतंकी मारे गए. जबकि इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा शहीद हो गए थे. तब से अबतक ये मामला अदालत में चल रहा था. 

 

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