पुणे: ठीक होने के बाद डिप्रेशन से मार रहा कोरोना! महिला ने फांसी लगाकर दी जान

महिला का इलाज करने वाले डॉक्टरों ने बताया कि उनका इलाज किया गया था और बाद में वह कोरोना मुक्त हो गईं. पहले उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था और ठीक होने के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई थी. उनकी मौत का कारण कुछ और हो सकता है जिसकी जांच होनी चाहिए.

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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

पंकज खेळकर

  • पुणे,
  • 17 अप्रैल 2021,
  • अपडेटेड 8:54 PM IST
  • कोरोना से ठीक होने के बाद अस्पताल ने डिस्चार्ज किया
  • बुधवार सुबह महिला ने दुपट्टे से बेडरूम में फांसी लगाई

कोरोना का कहर एक ओर तेजी से बढ़ता जा रहा है तो दूसरी ओर इससे डिप्रेशन भी बढ़ रहा है. पुणे में एक महिला ने कोविड-19 डिप्रेशन की वजह से खुदकुशी कर ली है. हालांकि उसकी मौत के कारण को लेकर जांच भी की जा रही है.

माना जा रहा है कि पुणे में 42 साल की एक गृहिणी ने कोविड-19 डिप्रेशन की वजह से खुदकुशी कर ली. महिला का इलाज करने वाले डॉक्टरों ने बताया कि उनका इलाज किया गया था और बाद में वह कोरोना मुक्त हो गईं. पहले उन्हें हमारे अस्पताल में भर्ती कराया गया था और ठीक होने के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई थी. उनकी मौत का कारण कुछ और हो सकता है जिसकी जांच होनी चाहिए.

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कथित तौर पर कोरोना मरीज की फंदा लगाकर जान देने की घटना सामने आने के बाद हर कोई हैरान रह गया. उनके पति जो अब कर्नाटक में अपने गृहनगर में हैं. आजतक/इंडिया टुडे से बात करते हुए उन्होंने पूरी घटना के बारे में जानकारी दी.

2 अप्रैल को हुआ था बुखार

उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी को पहली बार 2 अप्रैल को हल्के बुखार के लक्षण मिले और जब लक्षण कुछ गंभीर हो गए तो उन्हें 8 अप्रैल को वारजे मालवाड़ी इलाके के एक प्रसिद्ध कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया. 4 दिनों के उपचार के बाद अस्पताल ने 11 अप्रैल की शाम को उनको छुट्टी दे दी.

47 वर्षीय पीड़ित पति ने कहा कि वह उन्हें घर वापस ले जाने के लिए तैयार नहीं है और चाहते थे कि उनका कुछ और दिनों तक इलाज जारी रहे, लेकिन अस्पताल इस पर सहमत नहीं हुआ और उन्हें छुट्टी देने पर जोर दिया. आईटी प्रोफेशनल पति ने बताया कि उनका परिवार 2006 से पुणे के वारजे मालवाड़ी इलाके में रह रहा है.

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उन्होंने बताया कि प्रसिद्ध अस्पताल को इलाज के लिए 34,500 रुपये का भुगतान करने के बाद उनकी पत्नी को डिस्चार्ज कर दिया गया. मृत महिला के पति ने बताया कि डिस्चार्ज के समय उनकी पत्नी की तबीयत ठीक थी, लेकिन उसी रात उन्होंने जबरदस्त कमजोरी की शिकायत की.

इसलिए सोमवार की शाम को दोनों पति-पत्नी उसी कोविड अस्पताल में जांच करवाने के लिए पहुंचे. उन्होंने आगे बताया कि जिस डॉक्टर ने उन्हें कोविड-19 का इलाज किया था, उन्होंने सीटी स्कैन कराने के लिए कहा था.

फिर से भर्ती नहीं करने का आरोप

मृतक महिला के पति ने बताया किया कि उन्होंने अपनी पत्नी का सीटी स्कैन करवाने के लिए 12,000 रुपये का भुगतान किया. सीटी स्कैन कराने के बाद वह वारजे मालवाड़ी इलाके में पहले के अस्पताल में लौट आई, लेकिन अस्पताल के डॉक्टरों ने कोविड के बेड उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें भर्ती करने से मना कर दिया गया. 

अब बुधवार की सुबह उनकी पत्नी ने अपने दुपट्टे से बेडरूम में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली. घटनास्थल से सुसाइड नोट भी मिला.

इस बीच वारजे मालवाड़ी पुलिस स्टेशन के पुलिस इंस्पेक्टर शंकर खटके ने कहा कि पीड़ित पति के बयान में कहीं भी यह जिक्र नहीं किया गया कि उनकी पत्नी को अस्पताल में बेड नहीं मिला या उन्होंने अलग-अलग अस्पतालों में बेड की तलाश की.

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आजतक/इंडिया टुडे ने वारजे अस्पताल में वरिष्ठ डॉक्टरों के साथ संपर्क किया और पीड़ित पति की ओर से कोविड मरीज के लिए बेड उपलब्ध नहीं कराने के आरोपों के बारे में पूछा तो डॉक्टरों ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि यह महिला 4 दिनों से अस्पताल में भर्ती थी.

मामले की जांच में जुटी पुलिस

इस महिला का इलाज करने वाले डॉक्टर ने कहा, "इस मरीज को इसलिए भर्ती किया गया क्योंकि वह कोविड पॉजिटिव थी, लेकिन पूरे इलाज के दौरान उन्हें कभी भी ऑक्सीजन लगाने की जरूरत नहीं पड़ी. डॉक्टर ने साझा किया कि मरीज को कभी भी सीटी स्कैन के लिए जाने को भी नहीं कहा गया था क्योंकि उनका ऑक्सीजन स्तर हमेशा 97 से ऊपर था और उसे रेमडिसिविर इंजेक्शन देने की भी आवश्यकता नहीं थी क्योंकि उनके लक्षण नियंत्रण में थे और इस वजह से 4 दिनों में ठीक होने में मदद मिली.

आजतक/इंडिया टुडे ने फिर से पीड़ित पति से इस संबंध में बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कहा कि वह कुछ दिनों के लिए इस विषय पर बात नहीं करना चाहते हैं. 

पुलिस ने बताया कि फिलहाल आकस्मिक मौत का मामला दर्ज कर लिया गया है और मामले की जांच की जा रही है.

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