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चक्रधरपुर में 34 युवतियों का रेस्क्यू, काम दिलाने के नाम पर ले जा रहे थे चेन्नई

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मानव तस्करी के शक में झारखंड के चक्रधरपुर रेलवे स्टेशन से 34 युवतियों का रेस्क्यू किया गया है. रेस्क्यू की गई युवतियों को चेन्नई में काम कराने के लिए ट्रेन से ले जाया जा रहा था लेकिन जांच में पता चला की किसी भी युवती का रजिस्ट्रेशन श्रम मंत्रालय से नहीं किया गया है. जिसके बाद सभी को रेस्क्यू कर प्रशासन की देखरेख में वापस उनके घर भेज दिया गया. (इनपुट-जय कुमार)

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चक्रधरपुर पुलिस, बीडीओ और आरपीएफ पूरे मामले की जांच कर रही है. सभी युवतियां पश्चिम सिंहभूम और सरायकेला खरसावां जिले के विभिन्न इलाकों से आईं थीं. घटना शुक्रवार रात आठ बजे की है. दरअसल, सभी युवतियां चक्रधरपुर रेलवे स्टेशन में टाटा यशवंतपुर ट्रेन के इंतजार में बैठी थीं. इसी दौरान आरपीएफ ने जांच पड़ताल में मामला संदिग्ध पाया. 

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इसके बाद मामले की जानकारी चक्रधरपुर पुलिस, प्रखंड विकास पदाधिकारी और पारा लीगल वॉलिंटियर्स को दी गयी. सभी चक्रधरपुर स्टेशन पहुंचे और मामले की जांच शुरू की. युवतियों से बातचीत में पता चला कि युवतियां चाईबासा के गुरुकुल नामक एक एनजीओ (संस्था) में सिलाई की ट्रेनिंग लेने के बाद चेन्नई की एक निजी कंपनी में सिलाई का काम करने ले जाई जा रही हैं.

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इन युवतियों को गुरुकुल की वार्डन प्रमिला गोप चेन्नई ले जा रही थी. चक्रधरपुर थाना प्रभारी प्रवीण कुमार और बीडीओ रामनारायण सिंह ने प्रमिला गोप से पूछताछ की तो पता चला कि युवतियों को श्रम मंत्रालय से रजिस्ट्रेशन नहीं कराया गया है. बड़ी संख्या में काम दिलाने के लिए युवतियों को बिना रजिस्ट्रेशन के ले जाने के मामले को देखते हुए प्रशासन ने सभी युवतियों को चेन्नई जाने से रोक लिया और वार्डन प्रमिला गोप को सभी युवतियों का श्रम मंत्रालय से रजिस्ट्रेशन कराने का सख्त निर्देश दिया. प्रशासन की देख रेख में सभी युवतियों को वापस उनके घर भेज दिया गया.

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युवतियों से जानकारी ली गयी तो उन्होंने बताया की उन्हें उनके जिले में कोई रोजगार नहीं मिल पा रहा है. घर में आर्थिक समस्या है इसलिए वे सिलाई का ट्रेनिंग लेकर चेन्नई काम करने जा रही हैं. श्रम मंत्रालय से रजिस्ट्रेशन की जानकारी उन्हें नहीं है. इधर जिला विधिक सेवा प्राधिकार के लीगल वॉलिंटियर्स ने भी युवतियों से पूछताछ में पाया कि बड़ी संख्या में युवतियों को बिना रजिस्ट्रेशन के चेन्नई ले जाया जा रहा है जो कि गैरकानूनी है. 

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बीडीओ ने बताया की गुरुकुल की वार्डन के पास कोई भी वैध आदेश या पत्र नहीं है जिसके तहत युवतियों को इतनी बड़ी संख्या में काम दिलाने के लिए चेन्नई ले जाया जा रहा था. श्रम मंत्रालय से एक भी युवती का रजिस्ट्रेशन तक नहीं कराया गया है. इसलिए सभी को वापस घर भेज दिया गया है. पूरे मामले की जांच अभी जारी है. 

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