क्या आपने कभी सुना है कि कोई पहले सुसाइड नोट लिख ले और मरने का फैसला बाद में करे? या आप इस बात पर यकीन करेंगे कि कोई सुसाइड नोट लिखे भी और उसे ऐसे छुपा कर रखे कि मरने के तीन बाद तक किसी को मिले ही नहीं? और कमाल ये कि तीन दिन बाद वही सुसाइड नोट पुलिस को खुद वो शख्स लाकर दे, जो खुद ही शक के घेरे में हो. रिपोर्टर पूजा तिवारी की मौत के तीन दिन बाद सामने आए एक सुसाइड नोट ने अचानक ये सारे सवाल खड़े दिए हैं.
शक के घेरे में पूजा का सुसाइड नोट
पूजा का सुसाइड नोट मिलने का सीधा सा मतलब है कि ये खत मरने से पहले लिखा गया. चार पन्नों के इस सुसाइड नोट को लिखा अंग्रेजी में गया है पर भाषा हिंदी की है. चार में से दो पन्नों पर दस्तखत हैं मगर दो पन्नों पर नहीं. दस्तखत के तौर पर पूरा नाम लिखा गया है- पूजा तिवारी. पर सबसे अजीब बात ये है कि सुसाइड नोट के चारों पन्नों में से किसी पर भी कोई तारीख नहीं लिखी गई है.
वेब पोर्टल में जर्नलिस्ट के तौर पर काम करने वाली पूजा तिवारी की मौत के तीन दिन बाद अब अचानक ये सुसाइड नोट सामने आया है. वो भी उस शख्स के जरिए जो खुद शक के घेरे में है. हरियाणा पुलिस का इंस्पेक्टर अमित. पूजा का ये सुसाइड नोट अमित ने बुधवार शाम को खुद पुलिस को सौंपा.
उठ रहे हैं ये सवाल
बात गौर करने वाली है कि एक ऐसा इंसान जो मरने जा रहा है, क्या वो उस सुसाइड नोट को किसी बैग में छुपा कर रखेगा? या फिर ऐसी जगह रखेगा जहां किसी की भी नजर आसानी से पड़े. खास तौर पर ऐसी हालत में जबकि वो खुद चाहती है कि उसकी मौत के लिए उसके घर वालों या दोस्तों को परेशान न किया जाए? फिर पूजा ने सुसाइड नोट को ऐसी जगह क्यों छुपा कर रखा कि वो तीन दिन बाद मिला? और वो भी तीन दिन बाद खुद वो शख्स वो नोट लेकर पुलिस के पास पहुंचता है, जिसकी तरफ इन तीन दिनों में शक की सुई सबसे तेजी से घूमती है.
पुलिस को नहीं लेकिन अमित को मिला सुसाइड नोट
इंस्पेक्टर अमित के मुताबिक जिस बैग में पूजा ने सुसाइड नोट रखा था, उस बैग को वो भी इस्तेमाल करता था. वही बैग लेकर वो पंचकुला चला गया था. बुधवार शाम को अचाक बैग में रखे सुसाइड नोट पर नजर पड़ी, जिसके बाद उसने उसे पुलिस को सौंप दिया. अब यहां सवाल ये खड़ा होता है कि पूजा की मौत के बाद पुलिस ने पूजा का सारा घर खंगाल डाला. मगर तब वो बैग और सुसाइड नोट पुलिस को क्यों नहीं मिला? हालांकि जिस बैग में ससाइड नोट मिलने का अमित दावा कर रहा है कि वो बैग पूजा की मौत के एक रोज बाद भी उसी के फ्लैट में था.
पूजा ने पहले ही क्यों लिख लिया सुसाइड नोट
सुसाइड नोट को लेकर एक और अहम सवाल खड़ा होता है. एक मई की शाम से लेकर देर रात करीब डेढ़ बजे तक पूजा लगातार या तो इंस्पेक्टर अमित के साथ थी या फिर उसकी दोस्त अमरीन उसके साथ थी. फिर पूजा ने सुसाइड नोट कब लिखा? आम तौर पर सुसाइड करने वाले मरने का फैसला अचानक करते है. अमूमन ऐसा नहीं होता कि सुसाइड नोट पहले से लिख कर रख ले और मरने का फैसला बाद में करे. फिर मौत से महज डेढ़ घंटे पहले तक पूजा की बातचीत से कतई ऐसा नहीं लग पहा था वो खुदकुशी करने जा रही है.
पुलिस करेगी पूजा की हैंडराइटिंग की जांच
इन्हीं तमाम सवालों को देखते हुए फरीदाबाद पुलिस फिलहाल सुसाइड नोट की सच्चाई को लेकर कुछ नहीं कह रही है. पुलिस का कहना है कि पहले वो सुसाइड नोट और पूजा की हैंडराइटिंग का मिलान कराएगी. रिपोर्ट आने के बाद ही तय होगा कि सुसाइड नोट सचमुच पूजा ने ही लिखा है या फिर ये पुलिस को भटकाने की कोई चाल है. वैसे सुसाइड नोट देने के 24 घंटे बाद ही उसी इंस्पेक्टर अमित को फरीदाबाद पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने आईपीसी की धारा 306 के तहत अमित को गिरफ्तार किया है यानी उस पर खुदकुशी के लिए मजबूर करने का मामला दर्ज हुआ है. अब सवाल ये है कि अगर अमित की वजह से पूजा ने खुदकुशी की तो फिर सुसाइड नोट में उसने कुछ और क्यों लिखा है?
सुसाइड नोट लिखने के लिए दो पेन का इस्तेमाल
ये सुसाइड नोट दो अलग-अलग कलम से लिखे गए हैं, क्योंकि सुसाइड नोट लिखने के लिए दो अलग-अलग रंग की स्याही इस्तेमाल की गई है. पहला पन्ना नीले रंग की स्याही से लिखा गया फिर शायद बीच में ही स्याही खत्म हो गई तो बाकी का नोट दूसरी कलम से लिखा गया यानी काले लंग की स्याही से.
मौत के लिए नहीं कोई जिम्मेदार लेकिन...
सुसाइड नोट में साफ लिखा है कि पूजा की मौत के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं माना जाए. न घर वालों को और न दोस्तों को. अलबत्ता फरीदाबाद की डॉक्टर दंपत्ति का नाम लिखते हुए उनके खिलाफ भ्रूण हत्या के सिलसिले में कार्रवाई की बात जरूर लिखी गई है पर उन्हें भी पूजा ने खुद की मौत के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया है.
पूजा की मौत बन गई है मिस्ट्री
इस सुसाइड नोट का कुल लब्बोलुआब यही है कि पूजा झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ स्टिंग ऑपरेशन करने के बाद से परेशान थी क्योंकि एक डॉक्टर ने उसके खिलाफ ब्लैकमेलिंग का मामला पुलिस में दर्ज करा दिया था. यहां सवाल इस मामले में पुलिस की भूमिका को लेकर भी है. क्या पुलिस जानबूझ कर या फिर डॉक्टरों के दबाव में आकर पूजा को परेशान कर रही थी? जाहिर है सारी कहानी सामने होते हुए भी पूजा की मौत की मिस्ट्री अभी सुलझनी बाकी है.
मोनिका शर्मा