राजस्थान: बेटा दिव्यांग है, चल नहीं सकता, लॉकडाउन में फंसे मजदूर ने साइकिल चुराकर लिखी चिट्ठी

अपनी साइकिल चोरी होने पर साहब सिंह काफी निराश हुए. साइकिल चोरी की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज कराने जा रहे थे, लेकिन जब उन्होंने ये पत्र पढ़ा तो वो भी भावुक हो गए और थाने से आधे रास्ते लौट आए. अब वे इस मामले की शिकायत पुलिस में नहीं करना चाहते हैं.

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प्रतीकात्मक तस्वीर (पीटीआई) प्रतीकात्मक तस्वीर (पीटीआई)

सुरेश फौजदार

  • भरतपुर ,
  • 16 मई 2020,
  • अपडेटेड 4:18 PM IST

  • भरतपुर के शख्स की चोरी हुई साइकिल
  • घर आने के लिए मजदूर ने चुराई साइकिल
  • चिट्ठी लिखकर मालिक से मांगी माफी
कोरोना वायरस और लॉकडाउन ने लोगों के सामने ऐसी मजबूरी पैदा की है कि उसे अपना स्वाभिमान गिरवी रखना पड़ रहा है. राजस्थान के भरतपुर में एक मजदूर लॉकडाउन में ऐसा फंसा कि उसे चोरी करनी पड़ी, लेकिन अपने ईमान का सौदा करते हुए अपने प्रायश्चित के लिए उसने एक भी गुंजाइश छोड़ दी.

लॉकडाउन में यूं फंसा, चोर बन गया

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राजस्थान के भरतपुर मथुरा मार्ग पर स्थित सहनावाली गांव निवासी साहब सिंह की साइकिल चोरी हो गई. साहब सिंह जब अपनी साइकिल निकालने लगे तो वह गायब थी, लेकिन वहां उन्हें एक चिट्ठी मिली. चिट्ठी का मजमून ही ये बताने के लिए काफी था कि चोरी करने वाला किस मुसीबत में था.

बेटा दिव्यांग है, चल नहीं सकता

इस व्यक्ति ने पत्र में अपना परिचय दिया. उसने नाम बताया मोहम्मद इकबाल और निवासी बताया उत्तर प्रदेश के बरेली का. मोहम्मद इकबाल ने कहा कि मैं मजदूर हूं और मजबूर भी हूं. मोहम्मद इकबाल ने बड़ी साफगोई से कहा कि मेरा बेटा दिव्यांग है जो चल नहीं सकता हैं, हमें बरेली जाना है. इसलिए आपकी साइकिल चुरा रहा हूं, हो सके तो माफ कर देना.

नमस्ते जी, आपकी साइकिल चुरा रहा हूं

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मोहम्मद इकबाल की चिट्ठी का पूरा ब्यौरा आप खुद पढ़िए, "नमस्ते जी, मैं आपकी साइकिल लेकर जा रहा हूं. हो सके तो मुझे माफ कर देना जी क्योंकि मेरे पास कोई साधन नहीं है. मेरा एक बच्चा है, उसके लिए मुझे ऐसा करना पड़ा, क्योंकि वो दिव्यांग है.चल नहीं सकता, हमें बरेली तक जाना है. आपका कसूरवार, एक यात्री मजदूर एवं मजबूर. मोहम्मद इकबाल खान. बरेली."

थाने जा रहे थे, लेकिन चिट्ठी पढ़ भावुक हुए

अपनी साइकिल चोरी होने पर साहब सिंह काफी निराश हुए. साइकिल चोरी की रिपोर्ट में पुलिस में दर्ज कराने जा रहे थे, लेकिन जब उन्होंने ये पत्र पढ़ा तो वो भी भावुक हो गए और थाने से आधे रास्ते लौट आए. अब वे इस मामले की शिकायत पुलिस में नहीं करना चाहते हैं.

साहब सिंह के बड़े भाई प्रभु दयाल ने बताया कि उनके भाई किसान हैं और उनके घर के घर के बाहर पुरानी साइकिल खड़ी रहती थी जो चोरी हो गई. इसी के साथ ये लेटर भी पड़ा मिला.

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