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कौन हैं जफरुल इस्लाम? कुवैत को शुक्रिया कहकर विवादों में घ‍िरे

aajtak.in
  • 29 अप्रैल 2020,
  • अपडेटेड 8:14 PM IST
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लेखक-पत्रकार के तौर पर पहचाने जाने वाले जफरुल इस्लाम खान दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हैं. मंगलवार को उन्होंने सोशल मीडिया पर कुवैत का शुक्रि‍या करते हुए कहा था कि अगर वो भारत में अल्पसंख्यकों पर हो रही नाइंसाफी की श‍िकायत अरब देशों से कर देंगे तो जलजला आ जाएगा. अपने इस बयान के बाद वो चर्चा में आ गए हैं. आइए जानते हैं- कौन हैं डॉ जफरुल इस्लाम खान, किसलिए आ गए हैं चर्चा में.

Image Credit: Facebook

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उन्होंने फेसबुक पर लिखा था कि भारतीय मुसलमानों का साथ देने के लिए कुवैत का शुक्र‍िया. उन्होंने ट्व‍िटर पर शेयर हो रही कुवैत की जिस टिप्पणी पर चिट्ठी लिखी थी, उसे भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने फर्जी करार दिया था.

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जफरुल इस्लाम का जन्म मार्च 1948 में भारत के बड़हरिया आज़मगढ़ में हुआ था. वह मौलाना वहीदुद्दीन खान के पुत्र हैं, जो एक मुस्लिम विचारक हैं. डॉ जफरुल की प्राथमिक शिक्षा मदरसा-तुल-इस्लाह, आजमगढ़ के एक मदरसे और दारुल उलूम नदवातुल उलमा लखनऊ में हुई थी. बाद में उन्होंने 1966-73 के दौरान अल-अजहर और काहिरा विश्वविद्यालय में अध्ययन किया.

(पुरानी तस्वीर: अपने बेटों के साथ डॉ खान)

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डॉ जफरुल ने साल 1987 में मैनचेस्टर विश्वविद्यालय से इस्लामी अध्ययन में पीएचडी प्राप्त की. फिर साल 1970 के दशक में उन्होंने लीबियन विदेश मंत्रालय में अनुवादक-संपादक के रूप में काम किया.

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वो अरबी, अंग्रेजी और उर्दू में 50 से अधिक किताबें लिख चुके हैं. उन्होंने भारत-मुस्लिम विषयों पर इस्लाम के विश्वकोश (लीडेन) में आठ लेखों का योगदान दिया है. वो रेडियो और टीवी चैनलों पर इस्लामी और दक्षिण एशियाई मुद्दों पर एक नियमित टिप्पणीकार हैं, जिसमें अल जज़ीरा और बीबीसी अरबी शामिल हैं.

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संवैधानिक पद पर रहते हुए भारतीय मुसलमानों को लेकर अरब देशों का शुक्र‍िया अदा करके वो सवालों के घेरे में आ गए हैं. उन्होंने फेसबुक पर जारी चिट्ठी में लिखा कि हिंदुत्व कट्टरपंथ‍ियों ने सोचा था कि आर्थि‍क वजहों से मुस्ल‍िम व अरब संसार भारत में मुस्ल‍िम प्रताड़ना पर साथ नहीं देगा.

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वहीं कुवैत की सरकार ने विदेश मंत्रालय से इस पर स्पष्ट किया कि हम भारत के अंदरूनी मामलों में दखल नहीं देंगे. यहां देख‍िए कि उन्होंने अपनी चिट्ठी में क्या लिखा था.

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दूसरे दिन अपनी चिट्ठी पर विवाद होने के बाद उन्होंने बुधवार को दूसरी पोस्ट लिखकर इस पर अपना पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि उन्होंने भारत में मुस्ल‍िमों की स्थ‍िति पर अपना पक्ष रखा था.

यहां देख‍िए कि उन्होंने बुधवार को दोबारा क्या कहा.

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