वुहान में 23 जनवरी को लॉकडाउन का ऐलान किया गया था. 76 दिन के लॉकडाउन को 8 अप्रैल को खत्म किया गया है. लॉकडाउन के खत्म होने के बाद कई लोगों की कहानियां सामने आ रही हैं, जिसमें वह अपने अनुभव साझा कर रहे हैं. वहीं हम आपको एक भारतीय शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने ऐसे समय वुहान शहर में रहने की हिम्मत दिखाई जब कोरोना वायरस का कहर मंडरा रहा था. वह भारत लौट सकते थे, लेकिन न लौटने का फैसला किया. आइए जानते हैं क्या थी इस फैसले की पीछे की वजह.
न्यूज एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए, वुहान में भारतीय नागरिकों ने कहा कि वे बहुत खुश हैं. लॉकडाउन हटने के बाद वह अच्छा महसूस कर रहे हैं. बुधवार को अधिकारियों ने मध्य चीनी शहर में 11 मिलियन लोगों पर लगे प्रतिबंध हटा दिया है. अब वह कहीं भी आ जा सकते हैं.
वुहान में काम करने वाले एक हाइड्रोबॉयोलॉजिस्ट अरुणजीत टी सथराजिथ काफी खुश हैं. उन्होंने कहा, लॉकडाउन खुलने के बाद मैं खुलकर बोल पा रहा हूं, क्योंकि इतने समय तक मुझसे बात करने वाला कोई नहीं था. हर कोई घर के अंदर रहता था.
आपको बता दें, जहां भारत ने वुहान शहर में फंसे भारतीयों को लेने के लिए विमान भेजे, उस समय अरुणजीत ने वुहान में ही रहने का फैसला किया था. वैसे वह केरल से हैं. उनका मानना था कि परेशानी होने पर किसी भी जगह से भागकर जाना या बच निकलना 'भारतीयों' के लिए आदर्श की बात नहीं है.
वहीं दूसरी ओर अरुणजीत इस बात को बखूबी जानते थे कि यदि वह वापस भारत लौटते हैं, तो हो सकता है कोरोना वायरस के कुछ लक्षण उनके साथ आ जाते. ऐसे में केरल में पत्नी और बच्चे के अलावा, उनके माता-पिता और ससुराल वाले रहते हैं. वह ये जानते थे कि 50 साल से ऊपर वाले व्यक्ति को कोरोना वायरस से ज्यादा खतरा है.
अरुणजीत ने बताया, कोरोना वायरस को कंट्रोल करने के लिए लॉकडाउन का निर्णय भारत का सराहनीय कदम है. लेकिन भारत के लिए प्रमुख समस्या मॉनसून के आने पर हो सकती है. क्योंकि इसी समय लोगों को खांसी, जुकाम, बुखार होना आम बात है. ऐसे में इम्यूनिटी लेवल कम हो जाता है. वहीं दूसरी ओर कोरोना वायरस से लड़ने के लिए शरीर की इम्यूनिटी लेवल का मजबूत होना जरूरी है. उस वक्त ये वायरस और विषैला हो सकता है.
अरुणजीत ने बताया, लॉकडाउन के दौरान वुहान में सख्ती से इसका पालन किया गया था. लगभग 72 दिनों के लिए मैंने खुद को अपने कमरे में बंद कर लिया था. मेरे पड़ोसी के तीन छोटे बच्चे हैं. मैंने उन्हें एक बार भी अपने फ्लैट से बाहर आते नहीं देखा था.