चीन की एक यूनिवर्सिटी ने नया खुलासा किया है. यहां के शोधकर्ताओं ने कहा है कि कोरोना वायरस सिर्फ छूने, छींकने या खांसने से नहीं फैलता. यह कोरोना संक्रमित इंसान के मल से भी दूसरे इंसानों को जकड़ सकता है. इसलिए अब चीन के शोधकर्ता चाहते हैं कि दुनिया भर में सभी कोरोना संदिग्धों की स्टूल टेस्ट (मल जांच) भी हो. ताकि, कोरोना की पुष्टि और पुख्ता हो सके. (फोटोः रॉयटर्स)
चीन की हॉन्गकॉन्ग यूनिवर्सिटी के मेडिसिन विभाग के शोधकर्ताओं ने हाल ही में 14 कोरोना वायरस कोविड-19 मरीजों के शरीर से 339 सैंपल लिए. इनमें मल, मूत्र, नाक से स्वैब, गले से थूक और खून शामिल था. (फोटोः रॉयटर्स)
इसमें पता चला कि तीन मरीजों के नाक के स्वैब, गले के थूक में कोरोना संक्रमण नहीं मिला. लेकिन सभी 14 मरीजों के मल में कोरोना का संक्रमण स्पष्ट तौर पर दिखाई दे रहा था. ये सभी इंसानी मल की वजह से ही संक्रमित हुए भी थे. (फोटोः रॉयटर्स)
हैरतअंगेज बात ये है कि कोरोना वायरस इन 14 मरीजों के मूत्र यानी यूरिन में नहीं मिला. लेकिन चार मरीजों के खून में कोरोना का संक्रमण मिला. (फोटोः रॉयटर्स)
प्रोफेसर पॉल चैन के-श्योंग ने बताया कि थूक से कोरोना संक्रमण की जांच करना बेहद कारगर है. लेकिन आजकल इंसानी शरीर वायरस और बैक्टीरिया का घर बना चुका है. इसलिए बाकी टेस्ट भी किए जाने जरूरी हैं, ताकि बीमारी की पुष्टि हो. (फोटोः रॉयटर्स)
प्रो. पॉल चैन के-श्योंग (फोटो में बाएं) ने बताया कि हॉन्गकॉन्ग में लोग यह जानते ही नहीं कि गले के अंदर जमा थूक को जोर से कैसे थूके कि वह सही तरीके से बाहर आए. इसलिए ये भी हो सकता है कि हॉन्गकॉन्ग में मौजूद लोगों ने सही कोरोना जांच न कराई हो. (फोटोः Xiaomei Chen)
प्रोफेसर श्योंग ने बताया कि हमने जिन मरीजों की जांच की उनके थूक में 1 मिलिलीटर थूक में 32 लाख वायरस हैं. जबकि, इंसानी मल में 12 हजार वायरस प्रति मिलिलीटर था. यानी इंसानी मल में भी कोरोना वायरस ने कब्जा जमा लिया है. (फोटोः एपी)
प्रोफेसर पॉल चैल के-श्योंग ने लोगों से अपील की है कि वे हद से ज्यादा हाइजीन बनाए रखें. जितना ज्यादा सफाई में रहेंगे. जितना ज्यादा आइसोलेट रहेंगे उतना ज्यादा उम्मीद होगी कोरोना से बचे रहने की. सफाई और हाइजीन ही इसका बेहतर बचाव है. (फोटोः एपी)
इसके बाद प्रोफेसर श्योंग ने बताया कि अब पूरी दुनिया को चाहिए कि वह कोरोना के संदिग्धों के मल की भी जांच करे. इससे ज्यादा बेहतर परिणाम सामने आएंगे. इससे चिकित्साकर्मियों को कोरोना मरीजों में संक्रमण की पुष्टि होगी. (फोटोः रॉयटर्स)