कोरोना वायरस महामारी के बीच चीन अपने सारे काम कर रहा है. जबकि, पूरी दुनिया थमी हुई है. पहले चीन ने मिलिट्री ड्रिल की. फिर एयरफोर्स ड्रिल की. अब उसने दो नई परमाणु पनडुब्बियां सेना को दी हैं. ये पनडुब्बियां बेहद अत्याधुनिक हैं. चीन की सरकार ने ये दो पनडुब्बियां चीनी नौसेना को उसकी 71वीं वर्षगांठ पर दी हैं. (फोटोः रॉयटर्स)
ये पनडुब्बियां टाइप-094 या जिन क्लास की है. ये एटमी बैलिस्टिक मिसाइलों से लैस हैं. इन पनडुब्बियों की टेक्नोलॉजी को भी सुधारा गया है. इनके राडार, सोनार और टॉरपीडो सब अत्याधुनिक हैं.
टाइप-094 सबमरीन एकसाथ 16 जेएल-2 बैलिस्टिक मिसाइल ले जा सकती हैं. इन मिसाइलों की रेंज 7000 किलोमीटर है.
चीन ने ऐसी कुल 6 पनडुब्बियां बनाई हैं. चीन की सरकार ने इनका प्रदर्शन पिछले साल अप्रैल में शानडोंग प्रांत के क्विंगडाओ शहर में समुद्र तट में किया था. माना जाता है कि दो सबमरीन नौसेना को चुपचाप पहले ही दी जा चुकी हैं.
चीन अभी 096 टाइप सबमरीन बना रहा है. जो और आधुनिक होंगी. ये 24 जेएल-3एस बैलिस्टिक मिसाइलें ले जा सकेंगी. इन मिसाइलों की रेंज 10 हजार किलोमीटर होगी. इसके बाद अमेरिका, यूरोप, चीन, रूस सब चीन की मिसाइलों की रेंज में आ जाएंगे. (फोटोः गेटी)
चीन के पास अभी 095 टाइप लड़ाकू पनडुब्बियां भी हैं. जो बेहद तेज और एडवांस्ड हैं. हाल ही में चीन की नौसेना ने जेएल-3 मिसाइल का सफल परीक्षण भी किया है. (फोटोः मिलिट्री टुडे)
चीन अपने हथियारों और सामरिक ताकतों को बढ़ाने में लगा हुआ है. उसने हाल ही में अपना खुद का एयरक्राफ्ट करियर बनाया था. जिसपर जे-15 फाइटर जेट्स रहते हैं. फिर इसके बाद इसके हिसाब से फाइटर जेट्स में बदलाव किए गए थे. (फोटोः विकीपीडिया)
चीन ने टाइप 055 डेस्ट्रॉयर भी बनाई है जो परमाणु संचालित हैं. यह चीन का सबसे तेज लड़ाकू जहाज है. इसके अलावा नया एंटी-सबमरीन पेट्रोल एयरक्राफ्ट भी नौसेना में शामिल किया गया है. इसका नाम गाओक्सिन-9 मैरीटाइम एंटी-सबमरीन वॉरफेयर प्लेन है. (फोटोः विकीपीडिया)
गौरतलब है कि पिछले महीने ही कोरोना वायरस के बीच चीन ने मिलिट्री ड्रिल किया था. इसके बाद एयरफोर्स का ड्रिल किया था. जिसकी वजह से उसके पड़ोसी देश चिंता में आ गए थे. कुछ देशों ने तो सुरक्षा के लिए मिसाइलें तक तैनात कर ली थीं. (फोटोः गेटी)