सड़क, फ्लाई ओवर, पुल, रेलवे लाइन, मेट्रो रूट के लिए कितने पैसे? सरकार ने कहा- 10 साल में 6 गुना कैपेक्स

Budget 2026: सरकार लगातार कैपेक्स को बढ़ा रही है, इससे इकोनॉमी को रफ्तार मिलती है. यह विकास को टिकाऊ बनाता है और लंबे समय में सरकार की टैक्स आमदनी बढ़ाने में मदद करता है.

Advertisement
कैपेक्स में लगातार इजाफा. (Photo: ITG) कैपेक्स में लगातार इजाफा. (Photo: ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 02 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:22 PM IST

केंद्र सरकार ऐसे प्रोजेक्ट पर खर्च करती है, जिससे लंबे समय तक फायदा मिलता है, उसे कैपेक्स कहते हैं. यह खर्च रोजमर्रा के कामों के लिए नहीं, बल्कि देश की संपत्ति बनाने के लिए होता है. इसे पूंजीगत व्यय भी कहा जाता है.

दरअसल, सरकारी कैपेक्स के तहत सड़कें, राष्ट्रीय राजमार्ग, पुल, रेलवे लाइन, मेट्रो परियोजनाएं, बंदरगाह, हवाई अड्डे, बिजली प्लांट, सिंचाई परियोजनाएं, सरकारी स्कूल, कॉलेज और अस्पताल बनाए जाते हैं. इन परियोजनाओं से देश की बुनियादी संरचना मजबूत होती है और भविष्य की आर्थिक गतिविधियों को सहारा मिलता है.

Advertisement

कैपेक्स का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे रोजगार के अवसर पैदा होते हैं. निर्माण और उससे जुड़े क्षेत्रों में काम बढ़ता है, जिससे लोगों की आय में इजाफा होता है. इसके अलावा बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर से उद्योगों को सस्ता और आसान परिवहन, ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स सुविधा मिलती है, जिससे निजी निवेश भी बढ़ता है.

कैपेक्स देश के लिए क्यों जरूरी?

सरकारी कैपेक्स से इकोनॉमी की रफ्तार भी बढ़ती है. यह विकास को टिकाऊ बनाता है और लंबे समय में सरकार की टैक्स आमदनी बढ़ाने में मदद करता है. आसान शब्दों में कहें तो सरकारी कैपेक्स भविष्य के विकास के लिए किया गया निवेश है, जो देश की आर्थिक नींव को मजबूत करता है.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि सरकारी कैपेक्स वित्त वर्ष 2014-15 में 2 लाख करोड़ से कई गुना बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 11.2 लाख करोड़ रुपये हो गया. वित्त वर्ष 2026-27 में इस गति को जारी रखने हेतु बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्तावित किया गया है. 

Advertisement

गौरतलब है कि पिछले एक दशक में सरकार ने सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर को बड़े स्तर पर बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं. इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर इनवेस्टमेंट ट्रस्ट (InvIT) और रियल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट (REIT) जैसे नए वित्तीय साधन शुरू किए गए. साथ ही NIIF और NaBFID जैसी संस्थाओं के जरिए भी इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश को बढ़ावा दिया गया.

सरकार आगे भी 5 लाख से ज्यादा आबादी वाले टियर-2 और टियर-3 शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर खास ध्यान देगी. इन शहरों को नए विकास केंद्र के रूप में तैयार किया जाएगा, ताकि रोजगार, उद्योग और सुविधाएं तेजी से बढ़ सकें.

एक्सपर्ट्स ने बजट को सराहा

वहीं Paisabazaar.com के CEO संतोष अग्रवाल ने कहा कि ये विकसित भारत के लक्ष्य तक पहुंचाने वाला बजट है. इस बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक 'तीन-स्तंभ' रणनीति पेश की है. जो विकास, सुधार और समावेशी विकास पर केंद्रित है. सरकार के प्रस्तावित उपाय क्रेडिट तक पहुंच बढ़ाने, अनुपालन को सरल बनाने और एक मजबूत फाइनेंशियल सिस्टम तैयार करने के उद्देश्य को दिखाते हैं, जो भारत के अगले विकास चरण को गति देंगे.

MSME सेक्टर के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का प्रस्ताव बजट में किया गया है, देश में रोजगार की दिशा में ये सशक्त कदम है. सरकार AI पर अपने फोकस को और मजबूत कर रही है. यह साफ दर्शाता है कि भारत अब AI के प्रचार से आगे बढ़कर उसके वास्तविक इस्तेमाल की ओर बढ़ रहा है.  

Advertisement

VFS Global के CEO के Zubin Karkaria का कहना है कि केंद्रीय बजट में विजन 2047 को ध्यान में रखते हुए देश के विकास की एक साफ दिशा दिखाई गई है. पर्यटन, आवागमन और लोगों के कौशल को आगे की तरक्की का अहम आधार माना गया है. सरकार ने पर्यटन को रोजगार बढ़ाने, विदेशी मुद्रा लाने और अलग-अलग क्षेत्रों के विकास का एक बड़ा जरिया माना है, जिससे भारत का ट्रैवल सेक्टर और मजबूत होगा.
 
उन्होंने कहा कि बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर और स्किल्स बढ़ाने पर खास ध्यान दिया गया है. इससे सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर होगी, पर्यटन स्थलों की तैयारी मजबूत होगी और कारोबार करना आसान बनेगा. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी, टूरिस्ट गाइड्स की ट्रेनिंग और नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड जैसी पहलें आने वाले समय में अच्छा असर दिखाएंगी.

इंफ्रा पर खर्च से बढ़ेगा निवेश

सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी ढांचा) के निर्माण के दौरान होने वाले जोखिमों को कम करना चाहती है, ताकि निजी निवेशकों और बैंकों का भरोसा बढ़े. इसके लिए सरकार एक इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड बनाने का प्रस्ताव कर रही है. इस फंड के जरिए कर्ज देने वालों को आंशिक लोन गारंटी मिलेगी, जिससे वे बिना डर के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में पैसा लगा सकें.

पिछले कुछ सालों में REITs संपत्तियों के मुद्रीकरण का एक सफल तरीका बनकर उभरे हैं. अब सरकार सरकारी कंपनियों (CPSEs) की अहम रियल एस्टेट संपत्तियों को REITs के जरिए दोबारा उपयोग में लाने (रीसाइक्लिंग) की योजना बना रही है.

Advertisement

माल ढुलाई को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए सरकार कई कदम उठाएगी. इसमें पूर्व से पश्चिम को जोड़ने वाला नया फ्रेट कॉरिडोर, ओडिशा में नए राष्ट्रीय जलमार्ग, युवाओं के लिए प्रशिक्षण संस्थान, और बनारस व पटना में जहाज मरम्मत केंद्र शामिल हैं. साथ ही 2047 तक जल और तटीय परिवहन की हिस्सेदारी 6% से बढ़ाकर 12% करने के लिए तटीय कार्गो प्रोत्साहन योजना शुरू होगी.

दूर-दराज इलाकों और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए समुद्री विमानों (Sea Planes) के स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा और इसके लिए VGF योजना लाई जाएगी. इसके अलावा प्रदूषण कम करने के लिए कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण (CCUS) तकनीक को बिजली, स्टील, सीमेंट और रसायन जैसे उद्योगों में बड़े स्तर पर लागू किया जाएगा. इसके लिए अगले पांच साल में 20,000 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement