4000 रुपये में LPG सिलेंडर, डिलीवरी में देरी से ब्लैक मार्केट से खरीदारी... सर्वे में खुलासा

अफवाहों के बीच LPG सिलेंडर अब ब्लैक मार्केट में 4,000 रुपये तक बिक रहा है, कुछ परिवारों मजबूरी में खरीदना भी पड़ रहा है, क्योंकि बुकिंग के बाद सिलेंडर की डिलीवरी में देरी हो रही है.

Advertisement
कुछ लोग ब्लैक मार्केट से एलपीजी खरीदने को मजबूर. (Photo: ITG) कुछ लोग ब्लैक मार्केट से एलपीजी खरीदने को मजबूर. (Photo: ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 30 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 6:57 PM IST

रसोई गैस सिलेंडर तो मिल रहा है, लेकिन देरी की वजह से देश में काफी लोग परेशान हैं. एक सर्वे के मुताबिक देश के कई शहरों में गैस सिलेंडर समय पर नहीं मिलने के कारण लोग ब्लैक मार्केट का सहारा लेने को मजबूर हो गए हैं, जिससे ब्लैक मार्केट (Black Market) में सिलेंडर की कीमत बढ़कर 4000 रुपये तक पहुंच गई है.

Advertisement

LocalCircles के सर्वे के मुताबिक पिछले एक हफ्ते में करीब 43% घरों को LPG सिलेंडर मिलने में देरी का सामना करना पड़ा. वहीं, करीब 8% लोगों को मजबूरी में ब्लैक मार्केट से सिलेंडर खरीदना पड़ा. कई जगहों पर सिलेंडर बुक करने के बाद डिलीवरी में लंबा वक्त लग रहा है. इस गंभीर संकट के कारण कई लोगों को खाना पकाने के लिए लकड़ी या महंगे दामों पर सिलेंडर लेने पड़ रहे हैं.

सिस्टम में गड़बड़ी की शिकायत

इस बीच कुछ ग्राहकों ने शिकायत की है कि उनका सिलेंडर डिलीवर दिखाया गया, लेकिन वास्तव में मिला ही नहीं. इस तरह की समस्याएं सप्लाई सिस्टम में गड़बड़ी की ओर इशारा कर रही हैं, और यही कारण है कि सिलेंडर की कालाबाजारी में हो रही है. 

ब्लैक मार्केट में सिलेंडर के दाम हर रोज बढ़ रहे हैं. Survey में पाया गया कि जहां कुछ लोग 300 से 500 रुपये अतिरिक्त देकर सिलेंडर खरीद रहे हैं, वहीं कई जगहों पर लोगों को सिलेंडर के लिए 2000 से 4000 रुपये के बीच भुगतान करना पड़ रहा है. इसका मतलब है कि एक सिलेंडर की कीमत कई गुना बढ़ चुकी है, जो आम परिवार के बजट पर सीधा असर डाल रही है. जबकि 14.2 किलो वाले रसोई गैस सिलेंडर की कीमत असल में 900 रुपये के आसपास है.

Advertisement

इस संकट का असर सिर्फ घरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे व्यवसायों पर भी पड़ रहा है. कई शहरों में ढाबे, होटल और स्ट्रीट फूड गैस की कमी के कारण या तो बंद हो रहे हैं, या सीमित समय के लिए खुल रहे हैं. इससे रोजगार और आय दोनों प्रभावित हो रहे हैं. 

कुछ लोग लकड़ी जलाने को मजबूर

इस बीच कुछ लोग 500 रुपये प्रति किलो तक लूज (खुली) गैस खरीदने को मजबूर हैं, क्योंकि बड़े शहरों में ऐसे लोग भी रहते हैं, जो दिहाड़ी मजदूर करते हैं, और उनके पास LPG का कनेक्शन हैं, वो छोटे सिलेंडर के भरोसे ही रहते हैं, और उसी में लोकल मार्केट से 2-4 किलो गैस भरवा कर काम करते हैं. 

यही नहीं, सर्वे की मानें तो ग्रामीण इलाकों में गैस महंगी होने के कारण कई लोग फिर से लकड़ी और कोयले पर खाना बनाने लगे हैं, जिससे स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों पर नकारात्मक असर पड़ रहा है. वैसे सरकार दावा कर रही है कि देश में रसोई गैस की कोई कमी नहीं है. लेकिन इस दावे के बीच सप्लाई चेन में गड़बड़ी, बुकिंग सिस्टम की समस्याएं और कुछ मामलों में सिलेंडर की कालाबाजारी से लोगों की समस्याएं बढ़ गई हैं.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement