Gold Rate: अभी रुकेगा नहीं सोना... ये हैं बड़े कारण, चीन से भी कनेक्शन

Gold Rate China Connection: सोने की कीमतों में बीते कुछ दिनों में भले ही तगड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, लेकिन लॉन्गटर्म में इसे लेकर सेंटीमेंट पॉजिटिव बना हुआ है, इसके पीछे एक्सपर्ट China Connection भी बता रहे हैं.

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सोने की कीमत में आने वाला है बड़ा उछाल! (Photo: Reuters) सोने की कीमत में आने वाला है बड़ा उछाल! (Photo: Reuters)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 11 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:18 PM IST

सोना-चांदी की कीमतों में क्रैश (Gold-Silver Price Crash) के बाद अचानक तेज उछाल देखने को मिला था और बीते कारोबारी दिन मंगलवार को ये फिर से फिसल गईं. इस उतार-चढ़ाव के बीच निवेशक ये सोचने में लगे हुए हैं कि क्या Gold-Silver Rate में आगे उछाल आएगा या फिर ये और टूट सकते हैं. इसे लेकर एक नई रिपोर्ट आई है, जिसमें आने वाले दिनों में खासतौर पर सोने की चाल को लेकर अनुमान जाहिर किया गया है और गोल्ड प्राइस आगे भी मजबूत होने की बात कही गई है. इसके साथ ही इसमें तेजी के पीछे का बड़ा चीन कनेक्शन (China Connection Of Gold Rate) भी बताया गया है. 

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Gold को लेकर सेंटीमेंट पॉजिटिव
Gold Rates में बीते साल की तेजी 2026 के पहले महीने जनवरी के आखिर तक देखने को मिली थी. बीते 29 जनवरी को ही एमसीएक्स पर जहां सोना (MCX Gold Rate) 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम के शिखर पर पहुंच गया था, तो वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमत पहली बार 5000 डॉलर प्रति औंस को पार कर गई थी. हालांकि, इस साल की शुरुआती तेजी के बाद आई तेज गिरावट के बावजूद एक्सपर्ट सोने की कीमतों को अच्छा समर्थन मिलने की उम्मीद जता रहे हैं. 

बिकवाली के बाद भी सोने में दम 
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स की 10 फरवरी को जारी नई गोल्ड रिपोर्ट (Gold Report) को देखें, तो जनवरी में आई जबर्दस्त अस्थिरता के कारण सोने की लगभग आधी बढ़त खत्म हो गई, लेकिन इसके बावजूद Gold Price 5,000 डॉलर प्रति औंस के मनोवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण स्तर से ऊपर स्थिर हो गई है. जनवरी में लंदन स्पॉट मार्केट में गोल्ड रेट रिकॉर्ड 5,594 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गए थे, लेकिन महीने के अंत में भारी बिकवाली भी देखने को मिली. कीमतों में गिरावट में अहम रोज भू-राजनीतिक तनाव में आई कमी ने निभाया. इस गिरावट के बाद भी LBMA और COMEX दोनों बाजारों में कीमतें 5,000 डॉलर से ऊपर बनी हुई हैं और मासिक आधार पर 10% से अधिक की वृद्धि दर्ज कर रही हैं, जो मजबूत डिमांड की ओर इशारा करती है. 

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Gold Rate को समर्थन दे रही डिमांड
सोने के आउटलुक को मजबूत करने का एक प्रमुख आधार इसमें निवेश का लगातार बढ़ना है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में सोने की कुल ग्लोबल डिमांड पहली बार 5,000 टन से अधिक हो गई, जिससे कुल बाजार मूल्य 555 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 45% की बढ़ोतरी दर्शाता है. Gold Investment ने इस इजाफे में बड़ा रोल निभाया. वैश्विक गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (Gold ETF) में सोने की हिस्सेदारी 801 टन बढ़ी, जो रिकॉर्ड में दूसरी सबसे मजबूत सालाना बढ़त रही. सोने की छड़ों और सिक्कों की मांग भी 12 साल के हाई लेवल पर पहुंच गई, जो सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की बढ़ती डिमांड को दर्शाती है. इसमें आगे भी तेजी की संभावना के पीछे के बड़े कारण भी हैं. 

पहला कारण: Gold ETF में भारी निवेश
गोल्ड इन्वेस्टमेंट की ये रफ्तार इस साल 2026 में भी जारी रही और जनवरी में Gold ETF में अब तक का सबसे मजबूत मासिक निवेश दर्ज किया गया, जो 19 अरब डॉलर था. इससे ग्लोबल ईटीएफ मैनेजमेंट के तहत संपत्ति बढ़कर रिकॉर्ड 669 अरब डॉलर हो गई. कुल वैश्विक भंडार भी उछलकर लाइफ टाइम हाई लेवल 4,145 टन पर पहुंच गया, जो Financial Crisis से बचाव के रूप में सोने में निवेशकों के निरंतर भरोसे को उजागर करता है. 

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दूसरा कारण: चीन समेत सेंट्रल बैंकों की खरीद
गोल्ड रेट में बढ़ोतरी के पीछे दुनियाभर के केंद्रीय बैंक की खरीदारी भी अन्य महत्वपूर्ण सहायक कारक बनी हुई है. 2025 में रिपोर्ट की गई सेंट्रल बैंकों की नेट खरीद 328 टन रही, जो 2024 के स्तर से मामूली रूप से कम है. खास तौर पर सोने की कीमतों में बढ़ोतरी में चीन का बड़ा रोल देखने को मिला है, क्योंकि चीन के केंद्रीय बैंक, पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (Peoples Bank Of China) ने जनवरी में लगातार 15वें महीने सोने की खरीद जारी रखी, जिससे कीमतों को सहारा देने में सरकारी क्षेत्र की मांग की भूमिका और भी मजबूत नजर आई. 

अभी रुकने वाला नहीं है सोना!
रिपोर्ट में ये तमाम कारण बताते हुए अनुमान लगाया गया है कि सोने की कीमतें (Gold Price) शॉर्ट टर्म में सीमित दायरे में रह सकती है, लेकिन मिड और लॉन्गटर्म में इनमें तेजी की उम्मीद है. Global Tension में कमी से इसकी रफ्तार धीमी हो सकती है, लेकिन केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार खरीद के साथ ही ईटीएफ में जोरदार निवेश इसे मजबूती देते नजर आ रहे हैं. एनालिस्ट का मानना ​​है कि मुनाफावसूली का मौजूदा दौर समाप्त होने के बाद कमोडिटी मार्केट का फोकस फिर से इन कारकों पर वापस आएगा और इससे सोने की भूमिका और मजबूत होगी.

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(नोट- सोना-चांदी या गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ में किसी भी निवेश से पहले अपने मार्केट एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें.)

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