आपने भी देखा होगा कि भारत में प्रॉपर्टी खरीदने वाले अक्सर महिला के नाम पर उसे रजिस्टर कराने को तरजीह देते हैं. यानी अपनी बेटी या फिर पत्नी के नाम पर घर-जमीन खरीदते हैं. इसके पीछे वजह सिर्फ पारिवारिक नहीं है, बल्कि तमाम फाइनेंशियल बेनेफिट्स हैं. जी हां, देश के ज्यादातर राज्यों में महिलाओं के नाम पर संपत्ति खरीदने पर स्टांप ड्यूटी से लेकर टैक्स छूट तक का लाभ मिल जाता है. ऐसे में अगर आप प्रॉपर्टी खरीद का प्लान कर रहे हैं, तो फिर इन फायदों के बारे में जान लें...
महिलाओं के लिए कम स्टांप ड्यूटी
Real Estate Sector में महिलाओं के नाम पर रजिस्ट्रेशन का चलन तेजी से बढ़ा है, क्योंकि ऐसा करने से तमाम तरह के फायदे मिलते हैं. इनकी जानकारी होना जरूरी है, क्योंकि ये सबसे महंगे सौदों में शामिल हो चुकी प्रॉपर्टी खरीद पर मोटी बचत जो हो जाती है. सबसे बड़ा फायदा स्टांप ड्यूटी (Stamp Duty) में छूट का होता है. देश के कई राज्यों में सरकारें महिलाओं के नाम पर संपत्ति खरीद पर स्टांप ड्यूटी कम रखती हैं. बता दें कि ये प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के दौरान पेमेंट की जाने वाली एक महत्वपूर्ण लागत होती है.
इसे उदाहरण से समझें, तो राजधानी दिल्ली में महिलाओं के लिए स्टांप ड्यूटी करीब 4% है, जबकि पुरुषों के लिए यह 6% तक होती है. दिल्ली ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों में भी महिलाओं को पुरुषों की तुलना में स्टांप ड्यूटी में 1-2% तक राहत दी जाती है. CII रियल एस्टेट कमेटी के प्रेसिडेंट अश्विंदर आर सिंह की मानें, तो ये सरकारी पॉलिसियां रियल एस्टेट परिदृश्य को नया रूप दे रही हैं. ये सिर्फ वित्तीय प्रोत्साहन ही नहीं हैं, बल्कि महिलाओं की फाइनेंशियल हेल्थ को मजबूत करने की दिशा में उठाए गए कदम भी हैं.
आसान Home Loan, कम ब्याज
महिला प्रॉपर्टी खरीदारों को मिलने वाले अन्य लाभों की बात करें, तो कई बैंक और होम फाइनेंस कंपनियां लोन लेने वाली महिलाओं को होम लोन की ब्याज दरों में छूट देती हैं. कम ब्याज दर पर दिए जाने वाले लोन से लाखों की बचत हो जाती है. एक्सपर्ट्स की मानें, तो Home Loan Interest Rates पुरुषों की तुलना में 0.05% से 0.10% कम हो सकते हैं. हालांकि, शुरुआत में अंतर मामूली लग सकता है, लेकिन 15 या 20 साल के लिए होम लोन के टेन्योर में इसका असर साफ दिखता है और ये बड़ी बचत का जरिया बनता है.
Tax छूट का लाभ करेगा लागत कम
घर का मालिक होने से टैक्स बेनेफिट्स भी मिलते हैं, जो संपत्ति खरीदने पर खर्च की जाने वाली प्रभावी लागत को कम करने में मददगार होते हैं. महिला घर खरीदार भी आयकर एक्ट की धारा 80C के तहत प्रिंसिपल पेमेंट पर 1.5 लाख रुपये तक की कटौती और धारा 24(B) के तहत ब्याज भुगतान पर 2 लाख रुपये तक की कटौती का क्लेम कर सकती हैं. इसके अलावा पहली बार घर खरीदने पर धारा 80EE के तहत होम लोन इंटरेस्ट पर 50,000 रुपये तक की अतिरिक्त कटौती का दावा भी किया जा सकता है. यही नहीं अगर प्रॉपर्टी पति-पत्नी दोनों के नाम पर है, तो अलग-अलग कटौती का दावा भी किया जा सकता है, जिससे टैक्स बेनेफिट ज्यादा हो जाता है.
सोने से संपत्ति की ओर महिलाएं
हमेशा से देश में महिलाएं सोने में निवेश करना पसंद करती रही हैं, क्योंकि वे इसे एक सुरक्षित निवेश ऑप्शन मानती हैं. लेकिन, रियल एस्टेट के बड़े लाभ इस चलन को धीरे-धीरे बदल रहे हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि अब अधिक महिलाएं संपत्ति को एक स्ट्रेटिजिक लॉन्गटर्म इन्वेस्टमेंट के रूप में देखने लगी हैं. घर की अवधारणा पर महिलाओं का प्रभाव लंबे समय से रहा है और अब अधिक महिलाएं इस सेक्टर में निवेश करती नजर आ रही हैं. सरकार की ओर से दिए जा रहे वित्तीय प्रोत्साहनों ने भी इस बदलाव में योगदान दिया है.
आजतक बिजनेस डेस्क