संसद में हैं 788 गार्जियन, पर गोद लिए 'गांवों' का क्या हुआ?

राष्ट्रीय स्तर पर इस योजना को तीन चरणों में पूरा किया जाना है. जहां 2015 में सभी सांसदों को अपने लिए एक गांव का चयन कर आदर्श ग्राम विकसित करना था, 2016 और 2017 में उन्हें एक बार फिर अपने लिए 1-1 गांव को गोद लेना था.

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गोद लिए गए कितने गांव अब अपने पैर पर खड़े हैं गोद लिए गए कितने गांव अब अपने पैर पर खड़े हैं

राहुल मिश्र

  • नई दिल्ली,
  • 25 जुलाई 2017,
  • अपडेटेड 3:50 PM IST

मई 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार का गठन होने के बाद अक्टूबर 2014 में सांसद आदर्श ग्राम योजना को लॉन्च किया गया. इस योजना के तहत देश के सभी सांसदों को अपने-अपने चुनाव क्षेत्रों में पहले एक-एक गांव को गोद लेना था. एक साल के अंदर गांव का विकास एक मॉडल गांव की तर्ज पर करना था जिससे वह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आदर्शों पर चलते हुए अपने पैरों पर खड़े हो सकें.

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राष्ट्रीय स्तर पर इस योजना को तीन चरणों में पूरा किया जाना है. जहां 2015 में सभी सांसदों को अपने लिए एक गांव का चयन कर आदर्श ग्राम विकसित करना था, 2016 और 2017 में उन्हें एक बार फिर अपने लिए 1-1 गांव को गोद लेना था. इस पूरी योजना के तहत देश के सभी सांसदों को 2019 तक कम से कम तीन गांवों को विकास के टॉप गेयर में पहुंचाने का था.

मोदी सरकार की इस योजना का अक्टूबर में 3 साल पूरा हो जाएगा. ऐसे में सवाल है कि क्या इन तीन साल के दौरान गोद लिए गए किसी गांव ने अपने पैर पर खड़े होने का हुनर सीखा? या फिर एक बार फिर देश के सभी सांसद एक खराब गार्जियन साबित हुए क्योंकि तीन साल बाद भी गांव न तो अपने पैरों पर खड़े हो पाए और न ही वह अपने गार्जियन की गोद से नीचे उतर सके?

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आदर्श ग्राम योजना- पहला चरण

केन्द्र सरकार द्वारा दिए गए आंकड़ों के मुताबिक सांसद आदर्श ग्राम योजना के पहले चरण में लोकसभा के 543 सांसदों में से 500 सांसदों ने अपने चुनाव क्षेत्र में एक गांव को गोद लिया. वहीं राज्य सभा के कुल 254 सदस्यों में से 203 सदस्यों ने योजना के मुताबिक अपने लिए एक-एक गांव का चयन किया है. लोकसभा और राज्य सभा मिलाकर जहां देश में कुल 796 सांसद थे, वहीं लगभग ढाई साल बाद भी 93 सांसदों ने अपने लिए गांव का चयन नहीं किया है. यानी पहले चरण में देशभर में महज 703 गांवों को विकास के टॉप गेयर पर डालने के लिए चयन किया गया.

आदर्श ग्राम योजना- दूसरा चरण

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस योजना के दूसरे चरण में स्थिति और भी खराब है. लोकसभा के 545 सांसदों में महज 286 सांसदों ने अपने लिए एक गांव का चयन किया है. वहीं 259 सांसदों को अभी भी अपने लिए एक-एक गांव का चयन करना है. वहीं राज्य सभा में मौजूद 243 सांसदों में महज 94 सांसदों ने गोद लेने वाले गांवों का चयन किया हैं. अभी भी 152 सांसदों द्वारा दूसरे चरण के लिए एक गांव चुना जाना बाकी है. लिहाजा, आंकड़ों के मुताबिक दूसरे चरण के लिए कुल 788 सांसदों में महज 380 सांसदों ने अपने लिए एक गांव का चयन किया है. वहीं 411 सांसदों को योजना के इस चरण के लिए गांव का चयन करना अभी बाकी है. यानी दूसरे चरण में 50 फीसदी से अधिक सांसदों ने अभी तक एक गांव को गोद लेने की प्रक्रिया को पूरा नहीं किया है.

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आदर्श ग्राम योजना- तीसरा चरण

आदर्श ग्राम योजना का तीसरा चरण पूरे आदर्श ग्राम योजना पर गंभीर सवाल खड़ा करता है. अभी तक के आंकड़ों के मुताबिक लोकसभा के 545 सांसदों में महज 34 सांसदों ने इस चरण में अपने लिए एक गांव को गोद लेने का फैसला किया है. वहीं राज्यसभा के 243 सांसदों में महज 11 सांसदों ने जरूरी प्रक्रिया को पूरा किया है. लिजाहा, आंकड़ों के मुताबिक कुल 788 सांसदों में अभी तक 743 सांसदों ने तीसरे चरण के लिए एक भी गांव का चयन नहीं किया है.

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने चुनाव क्षेत्र वाराणसी से योजना के दूसरे चरण के लिए 17 फरवरी 2016 को नागेपुर ग्राम पंचायत का चयन किया था. पहले चरण के लिए पीएम मोदी ने 10 नंबवर 2014 को जयापुर गांव का चयन किया था. वहीं तीसरे चरण के लिए खुद पीएम मोदी को अपने लिए एक गांव का चयन करना बाकी है. अब जब गांवों को आदर्श बनाने के लिए गोद लेने की यह रफ्तार है तो जाहिर है सरकार के उन आंकड़ों का इंतजार और रोचक होगा जिससे यह पता चल सके कि आखिर इस पूरी कवायद के बाद सांसदों की गोद से निकलकर कितने गांव अपने पैर पर खड़े हो चुके हैं.

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