नोटबंदी-GST का असर नहीं हुआ खत्म, इस साल 7% से कम रहेगी GDP की रफ्तार

नोटबंदी और जीएसटी का झटका नये साल में भी भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार रोके रहेगा. इसकी वजह से वित्त वर्ष 2017-18 में जीडीपी की वृद्धि दर 7 फीसदी से नीचे रह सकती है.  विशेषज्ञों ने यह आशंका जताई है. विशेषज्ञों की यह राय जीडीपी के अग्र‍िम अनुमान के आंकड़ों से पहले सामने आई है.

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नोटबंदी और जीएसटी इस साल भी पीएम मोदी के ल‍िए मुसीबत खड़ी कर सकते हैं नोटबंदी और जीएसटी इस साल भी पीएम मोदी के ल‍िए मुसीबत खड़ी कर सकते हैं

विकास जोशी

  • नई दिल्ली,
  • 04 जनवरी 2018,
  • अपडेटेड 11:22 AM IST

नोटबंदी और जीएसटी का झटका नये साल में भी भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार रोके रहेगा. इसकी वजह से वित्त वर्ष 2017-18 में जीडीपी की वृद्धि दर 7 फीसदी से नीचे रह सकती है.  विशेषज्ञों ने यह आशंका जताई है. विशेषज्ञों की यह राय जीडीपी के अग्र‍िम अनुमान के आंकड़ों से पहले सामने आई है.

7 फीसदी के पार जाना मुश्क‍िल

सेंट्रल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (सीएसओ) शुक्रवार को नेशनल इनकम यानी जीडीपी का एडवांस एस्टीमेट जारी करेगा. एसबीआई रिसर्च के प्रमुख अर्थशास्त्री सौम्य कांति घोष ने कहा कि इस वित्त वर्ष में जीडीपी के लिए 7 फीसदी का आंकड़ा पार कर पाना मुश्क‍िल है.  हालांकि तीसरी और चौथी तिमाही में अर्थव्यवस्था बेहतर प्रदर्शन कर सकती है.

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बेस रेट को रिवाइज करने की जरूरत

उन्होंने कहा कि अगर बेस को नीचे की ओर रिवाइज किया जाता है, तो इकोनॉमी के अच्छे दिन आने की उम्मीद की जा सकती है. पीटीआई ने घोष के हवाले से लिखा कि बीते साल के अपरिवर्तित बेस ईयर पर जीडीपी ग्रोथ 6.5 फीसदी रह सकता है.

ग्रोथ की उम्मीद कम

भारतीय अर्थव्यवस्था 2016-17 में 7.1 फीसदी की दर से बढ़ी. हालांकि 2015-16 में यह इससे बेहतर स्थ‍िति में थी और इसकी रफ्तार 8 फीसदी रही थी. घोष ने कहा कि जीडीपी की वृद्धि दर बेहतर स्थ‍िति में रह सकती है अगर पिछले साल के एक्सपांसन को नीचे की ओर संशोध‍ित किया जाता है. उन्होंन कहा कि वित्त वर्ष 2017-18 के लिए बेस रेट कम रहने से ज्यादा ग्रोथ की उम्मीद की जा सकती है.

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इन्होंने भी जताई लचर प्रदर्शन की आशंका

वहीं, योजना आयोग के पूर्व डिप्टी चेयरमैन मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने भी घोष की तरह ही राय दी. उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ लगभग 6.2 फीसदी से 6.3 फीसदी के बीच रह सकती है. एक्सिस बैंक के चीफ इकोनॉमिस्ट सुगत भट्टाचार्या ने कहा कि इस साल ग्रॉस वैल्यू एडेड (जीवीए) 6.6-6.8 फीसदी के बीच रह सकता है.

जीएसटी का होगा असर

योजना आयोग के पूर्व सदस्य और वरिष्ठ अर्थशास्त्री अभिजीत सेन ने कहा कि जीएसटी के बाद टैक्स व्यवस्था काफी खामियां सामने आई हैं. इनका असर इस साल भी दिखेगा. इसकी वजह से आर्थ‍िक विकास की रफ्तार कम होगी. उन्होंने अनुमान लगाया कि वित्त वर्ष 2018 के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6 से 6.5 फीसदी के बीच रह सकती है.

जीवीए क्या होता है

जीवीए एक नया मेथड है, जिसे सीएसओ अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन मापने के लिए यूज करता है. जीडीपी का अनुमान टैक्स को जीवीए के साथ जोड़कर और सब्स‍िडी को घटाकर तैयार किया जाता है.

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