आधार जरूरी हुआ तो कहीं बिग बॉस का घर न बन जाए देश

अब जब सरकार इसे अपने कामकाज को आसान करने के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर रही है तो अंदाजा लग रहा है कि उसका यह प्रोग्राम जरूरत से ज्यादा वृहद हो जाने के खतरे से भी जूझ रहा है.

कहीं जरूरत से ज्यादा बड़ा न हो जाए व्यापक होता आधार नंबर
राहुल मिश्र
  • नई दिल्ली,
  • 09 मार्च 2017,
  • अपडेटेड 10:56 AM IST

देश के सभी 125 करोड़ से अधिक नागरिकों को एक यूनीक बायोमेट्रिक लिंक आईडी नंबर 'आधार' देना शुरू हुए अभी एक दशक भी नहीं हुए हैं. 112 करोड़ भारतीयों को यह नंबर दिया जा चुका है. इस आधार प्रोग्राम को शुरू करने के पीछे सरकार की मंशा देश के सभी नागरिकों की पहचान का एक जरिया तैयार करना था. लेकिन अब जब सरकार इसे अपने कामकाज को आसान करने के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर रही है तो अंदाजा लग रहा है कि उसका यह प्रोग्राम जरूरत से ज्यादा वृहद हो जाने के खतरे से भी जूझ रहा है.

आईडी की चुनौती? देश में किसी काम को करने के लिए आईडी की समस्या रहती है. मोबाइल का सिम चाहिए तो 2-3 तीन आईडी दीजिए. ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आईडी, पासपोर्ट के लिए आईडी. किसी संस्था अथवा सरकार द्वारा भी आईडी मांगे जाने पर भी आप वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस, राशन कार्ड जैसे डॉक्यूमेंट सामने कर देंगे. लेकिन इन सभी डॉक्यूमेंट पर संस्थाएं तो दूर सरकार तक सवाल खड़ा कर देती है. लिहाजा, इन सभी चुनौतियों को हल करने के लिए केन्द्र सरकार का आधार नंबर है. इसे नागरिकों की आंख से यूनीक रैटिना ईमेज और फिंगरप्रिंट के जरिए तैयार किया जाता है. इस नंबर का डुप्लीकेशन नहीं किया जा सकता और इसे बतौर आईडी देश में लागू किया जा रहा है.

आधार का विस्तार बैंक अकाउंट से जुड़ने वाला नागरिकों का आधार नंबर सरकार के लिए वित्तीय मदद पहुंचाने का जरिया बनेगा. जहां पहले सिर्फ चुने हुए पढ़े-लिखे लोगों तक सरकारी स्कीमों का फायदा पहुंच पाता था जिसे आईडी, फॉर्म इत्यादि के इस्तेमाल की जानकारी थी. इस आधार के सहारे सरकार नागरिकों के बैंक खातों में सीधे पैसा ट्रांसफर कर सकेगी. जहां पहले देश का एक बड़ा तबका बैंकिंग के दायरे से बाहर था आधार की मदद से वह बैंक, इंश्योरेंस सेवाओं के साथ-साथ सरकार से स्वास्थ्य, पीडीएस, जनधन इत्यादि जैसी सेवाओं को आसानी से ले सकता है.

जरूरत पड़ने पर आधार की मदद से किसी से उधार लेने, पेंशन फंड से पैसे निकालने, रेलवे और हवाई यात्रा के लिए टिकट लेने जैसी सेवाओं को भी आसानी से किया जा सकता है. इन सभी सेवाओं के लिए सरकार अथवा संस्थाओं को सिर्फ आपके फिंगरप्रिंट या आंख को स्कैन करने की जरूरत होगी और आपको सभी सेवाओं के लिए हरी झंडी मिल जाएगी.

रिलायंस की तरह सरकार का काम भी होगा आसान हाल ही में लांच हुई रिलायंस इंडस्ट्रीज की मोबाइल नेटवर्क सेवा ने आधार नेटवर्क का सहारा लेते हुए सिर्फ तीन महीने में 10 करोड़ सब्सक्राइबर जोड़ने में सफलता पाई है. वहीं इससे पहले सरकारी अथवा निजी मोबाइल ऑपरेटर के ऑफिस पर एक डुप्लीकेट सिम कार्ड निकलवाने के लिए आपको लंब-चौड़े फॉर्म के साथ कई आईडी की फोटोकॉपी लगानी पड़ती थी. अब केन्द्र सरकार इसी तर्ज पर आधार का सहारा लेते हुए नागरिकों तक वित्तीय मदद पहुंचाने का विकल्प तैयार कर चुकी है.

कितना खतरा है आधार में केन्द्र सरकार ने जब आधार प्रोग्राम की शुरुआत की थी तब दलील दी थी कि यह प्रोग्राम पूरी तरह से नागरिकों की स्वेच्छा पर होगा. आधार नंबर लेना अनिवार्य नहीं होगा. इसका इस्तेमाल सिर्फ सरकार द्वारा सोशल सिक्योरिटी के नाम पर दिए जाने वाले वित्ती लाभ को सीधे नागरिकों के बैंक अकाउंट में करने के लिए किया जाएगा. लेकिन केन्द्र सरकार के फैसलों से साफ है कि मौजूदा समय में केन्द्र सरकार आधार को सभी सेवाओं के लिए अनिवार्य करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. ऐसा होता है तो बीते एक दशक में एह केन्द्र सरकार का अबतक का सबसे वृहद प्रोग्राम बन जाएगा जिसे संभालने के लिए इसे संचालित करने वाली संस्थाओं से बड़े ढ़ांचे की जरूरत पड़ सकती है.

 

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