अब एविएशन सेक्टर पर मंदी की मार! क्रैश हुआ इंडिगो-AI का मुनाफा

आर्थिक मंदी की मार अब देश के एविएशन सेक्‍टर में देखने को मिल रही है. एविएशन सेक्‍टर की टॉप कंपनी इंडिगो के मुनाफे में 150 फीसदी की गिरावट आई है.

आर्थिक मंदी की मार अब एविएशन सेक्‍टर में
नागार्जुन
  • नई दिल्‍ली,
  • 17 सितंबर 2019,
  • अपडेटेड 1:51 PM IST

  • इंडिगो के मुनाफे में करीब 150 फीसदी की गिरावट आई
  • एअर इंडिया को हुआ 8,400 करोड़ का घाटा

देश के ऑटो, एफएमसीजी और टेक्‍सटाइल सेक्‍टर के बाद एविएशन इंडस्‍ट्री पर आर्थिक मंदी की मार देखने को मिल रही है. हालात ये हो गए हैं कि देश की अधिकतर एयरलाइन कंपनियां या तो कर्ज के बोझ में दबी हैं या फिर घाटे में चल रही हैं.  

किस एयरलाइन का क्‍या हाल

बीते 1 साल में देश की दिग्गज एयरलाइन कंपनी इंडिगो के मुनाफे में करीब 150 फीसदी की गिरावट आई है. हालांकि वित्त वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही में इंडिगो के मुनाफे में रिकॉर्ड 1,203 करोड़ रुपये का इजाफा जरूर हुआ है. बहरहाल, इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड के स्वामित्व वाली इंडिगो की भारतीय बाजार में कुल 50 फीसदी हिस्सेदारी है. एक अन्‍य एयरलाइन विस्‍तारा की बात करें तो कंपनी को वित्त वर्ष 2018-19 में 800 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है. इससे पहले के वित्त वर्ष में विस्‍तारा को 431 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था. कमोबेश यही संकट स्‍पाइसजेट के साथ भी है. 

एअर इंडिया को 8,400 करोड़ का घाटा

एअर इंडिया को वित्त वर्ष 2018-19 में 8,400 करोड़ रुपये का जबरदस्त घाटा हुआ. वित्त वर्ष 2018-19 में एअर इंडिया की कुल आय 26,400 करोड़ रुपये रही. इस दौरान कंपनी को 4,600 करोड़ रुपये का ऑपरेटिंग लॉस उठाना पड़ा है. जून की तिमाही में सिर्फ पाकिस्तानी एयरस्पेस बंद होने की वजह से एअर इंडिया को 175 से 200 करोड़ रुपये का ऑपरेटिंग लॉस हुआ है. बता दें कि एअर इंडिया पर कुल 58,000 करोड़ रुपये का कर्ज है और इसे चुकाने के लिए एयरलाइंस को सालाना 4,000 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं.

अस्‍थायी तौर पर बंद हो चुकी है जेट एयरवेज

किसी दौर में देश की सबसे बड़ी एयरलाइन के तौर पर पहचान बना चुकी जेट एयरवेज के विमान ने बीते 17 अप्रैल से उड़ान नहीं भरी है. दरअसल, जेट एयरवेज करीब 12 हजार करोड़ के कर्ज में डूबी है. फिलहाल, जेट एयरवेज दीवालिया प्रक्रिया से गुजर रही है. वहीं जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल चेयरमैन पद से इस्‍तीफा दे चुके हैं. यही नहीं, वित्तीय अनियमितताओं की वजह से कानूनी शिकंजे में भी हैं.वहीं जेट एयरवेज के अधिकतर कर्मचारी बेरोजगार हो चुके हैं.

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