रतन टाटा ने नियुक्त किए दो नए डायरेक्टर, मामले को पीएम तक ले जाना चाहते हैं मिस्त्री

साइरस मिस्त्री ने पीएम मोदी से मिलने का समय मांगा है. चेयरमैन के पद पर रहते हुए मिस्त्री को राजनीतिक पकड़ मजबूत करते हुए देखा गया था.

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साइरस मिस्त्री साइरस मिस्त्री

लव रघुवंशी

  • नई दिल्ली,
  • 26 अक्टूबर 2016,
  • अपडेटेड 9:22 AM IST

साइरस मिस्त्री को टाटा ग्रुप के चेयरमैन पद से हटाए जाने के बाद नए दावेदार की खोज शुरू हो गई है. कंपनी ने चार महीने में नए चेयरमैन की नियुक्ति का दावा किया है, तब तक रतन टाटा को अंतरिम चेयरमैन बनाया गया है. ग्रुप के चेयरमैन पद के लिए टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक एन. चंद्रशेखरन और जगुआर लैंड रोवर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राल्फ स्पेथ के नाम सबसे आगे चल रहे हैं. दोनों को कंपनी निदेशक मंडल में डायरेक्टर नियुक्त किया गया है. इसके साथ ही टाटा संस के निदेशक मंडल में सदस्यों की संख्या 11 हो गई है.

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पीएम तक पहुंचा मामला
इस बीच ये मसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंच गया है. साइरस मिस्त्री ने पीएम मोदी से मिलने का समय मांगा है. चेयरमैन के पद पर रहते हुए मिस्त्री को राजनीतिक पकड़ मजबूत करते हुए देखा गया था. वहीं रतन टाटा ने भी मामले में पीएम को शामिल करते हुए लेटर लिखकर मिस्त्री को हटाए जाने के बारे में जानकारी दी.

इससे पहले खबर आई कि टाटा ग्रुप में मतभेदों का मामला अदालत तक पहुंच गया है. टाटा की ओर से सुप्रीम कोर्ट, बॉम्बे हाई कोर्ट और NCLT में साइरस मिस्त्री को अपनी बर्खास्तगी के खिलाफ कोई कदम उठाने से रोकने के लिए कैविएट दायर किया गया है. साइरस मिस्त्री के ऑफिस से जानकारी दी गई है कि साइरस ने कोई कैविएट फाइल नहीं की है. मिली जानकारी के मुताबिक टाटा ने मिस्त्री की ओर से किसी लीगल एक्शन के मद्देनजर कैविएट दाखिल की है.

 

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बाजार में गिरावट
टाटा ग्रुप ने अपने अब तक से सबसे युवा चेयरमैन साइरस मिस्त्री को हटाए जाने की कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई. वहीं टाटा संस के चेयरमैन पद से सायरस मिस्त्री को हटाने की खबर से शेयर बाजार में गिरावट आई है. मिस्त्री के कार्यकाल में टाटा ग्रुप की कंपनियों के शेयरों की कीमत 515 फीसदी तक बढ़ी है. ऐसे में बाजार निराश तो हुआ ही है, अनिश्चितता भी पैदा हो सकती है.

टाटा ग्रुप की कंपनियों पर मंगलवार के कारोबार में निगेटिव असर दिखा है. समूह की जिन कंपनियों पर बुरी खबरों का असर पहले ही दिख रहा है उन कंपनियों के शेयरों पर ज्यादा मार पड़ सकती है. बाजार की चाल भी थोड़ी निगेटिव रह सकती है.

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