पीएनबी घोटाला: सीबीआई ने आरबीआई के पूर्व डिप्टी गवर्नर से की पूछताछ

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में दो अरब डॉलर के घोटाले के सिलसिले में सीबीआई ने जिन लोगों से पूछताछ की है, उनमें हारुन आरबीआई के सबसे वरिष्ठ पूर्व अधिकारी हैं.

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आरबीआई के पूर्व डिप्टी गवर्नर हारुन राशिद खान (फाइल फोटो) आरबीआई के पूर्व डिप्टी गवर्नर हारुन राशिद खान (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 06 अप्रैल 2018,
  • अपडेटेड 11:55 PM IST

सीबीआई ने आरबीआई के पूर्व डिप्टी गवर्नर हारुन राशिद खान से हीरा कारोबारी नीरव मोदी और मेहुल चोकसी से संबंधित बैंक धोखाधड़ी मामले तथा पिछली संप्रग सरकार द्वारा कथित तौर पर कारोबारियों को फायदा पहुंचाने के लिए सोना आयात के नियमों में ढील दिए जाने के सिलसिले में शुक्रवार को पूछताछ की.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, (पीएनबी) में दो अरब डॉलर के घोटाले के सिलसिले में सीबीआई ने जिन लोगों से पूछताछ की है, उनमें हारुन आरबीआई के सबसे वरिष्ठ पूर्व अधिकारी हैं. को देश के वित्तीय इतिहास में सबसे बड़ा माना जाता है.

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सूत्रों ने बताया कि की हारुन से पूछताछ उस वक्त के नीतिगत ढांचे के इर्द-गिर्द केंद्रित रही, जब पीएनबी ने और चोकसी को फर्जी 'गारंटी पत्र' (एलओयू) जारी किए थे.

अधिकारियों ने बताया कि हारुन से संप्रग सरकार की 80:20 सोना आयात योजना के बारे में की गई जिसकी मंजूरी तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने आम चुनाव की मतगणना से महज तीन दिन पहले 13 मई 2014 को दी थी. इस योजना से कथित तौर पर चोकसी की कंपनी और कुछ अन्य को अप्रत्याशित लाभ हासिल करने में मदद मिली थी.

हालांकि, जांच एजेंसी ने हारुन से किए गए सवालों के बारे में किसी भी तरह की जानकारी देने से इनकार कर दिया. हारुन को एक जुलाई 2011 को डिप्टी गवर्नर के पद पर पदोन्नत किया गया था और चार जुलाई 2014 को और दो साल के लिए उनकी पुनर्नियुक्ति की गई थी. वह आरबीआई में वित्त बाजार, आंतरिक ऋण प्रबंधन विभागों और विदेशी प्रबंधन सहित कई अन्य विभागों के प्रभारी थे.

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अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय जांच एजेंसी ने कल के तीन मुख्य महाप्रबंधकों और एक महाप्रबंधक से पूछताछ की थी. इन चारों अधिकारियों से संप्रग सरकार की सोना आयात योजना के बारे में पूछताछ की गई थी. हारुन से पूछताछ इसी प्रक्रिया को जारी रखते हुए की गई.

आरबीआई सूत्रों ने बताया कि इसके अधिकारियों से अन्य जांच एजेंसियां और विनियामक नियमित रूप से विचार-विमर्श करते हैं ताकि केंद्रीय बैंक के तहत बैंकिंग और अन्य नीतिगत विषयों पर स्पष्टता मुहैया हो सके. इस मामले में यही चीज हुई है.

सरकार ने एक बयान में कहा है कि संप्रग सरकार की 20:80 योजना से छह महीनों में 13 कारोबारी घरानों को 4,500 करोड़ रुपये का अप्रत्याशित लाभ हुआ.

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