आगामी 1 फरवरी को पेश हो रहे आम बजट से हर वर्ग के लोगों को उम्मीदें हैं. मध्यम वर्ग टैक्स कटौती की उम्मीद कर रहा है तो महिला वर्ग का सुरक्षा, सशक्तिकरण पर जोर है. इसी तरह रियल एस्टेट, ऑटो इंडस्ट्री समेत अन्य सेक्टर से भी राहत की मांग की जा रही है.
इसी कड़ी में अब बीमा उद्योग ने पर्सनल इनकम टैक्स में बीमा के लिए अलग से कटौती प्रावधान किए जाने की मांग की है. इसके अलावा मौजूदा 1.50 लाख रुपये तक की सीमा में बीमा पॉलिसी प्रीमियम पर मिलने वाली छूट का दायरा बढ़ाने पर जोर दिया है.
जीवन बीमा परिषद के सचिव एस एन भट्टाचार्य ने कहा, ''व्यक्तिगत जीवन बीमा पॉलिसियों के लिए चुकाये गए प्रीमियम पर इनकम टैक्स में कटौती के लिए अलग से प्रावधान किया जाना चाहिए.'' एस एन भट्टाचार्य के मुताबिक अगर अलग से कटौती नहीं दी जाती है तो धारा 80सी के तहत मौजूदा 1.5 लाख रुपये की सीमा को बढ़ाकर 3 लाख रुपये किया जाना चाहिए. इसमें बीमा प्रीमियम पर मिलने वाली कटौती को बढ़ाया जाए.
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वहीं आदित्य बिड़ला सन लाइफ इंश्योरेंस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) कमलेश राव ने पहली बार बीमा पॉलिसी लेने वाले लोगों के लिए इनकम टैक्स में 50,000 रुपये की अलग कटौती की मांग की है. कमलेश राव का मानना है कि प्योर सिक्योरिटी (मियादी) के लिए पॉलिसी लेने वालों के लिए 50,000 रुपये की अतिरिक्त सीमा रखे जाने से जीवन बीमा क्षेत्र में तेजी आएगी.
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इसके अलावा, गैर-जीवन बीमा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाली साधारण बीमा परिषद ने सरकार से पॉलिसी पर जीएसटी दर को 18 फीसदी से घटाकर 12 फीसदी करने की मांग की है. परिषद के महासिचव एम एन शर्मा ने कहा कि बीमा अब जरूरत बन गई है. लोगों के बीच जोखिम प्रबंधन को प्रोत्साहन देने के लिए साधारण बीमा उत्पादों पर जीएसटी दर को कम कर देना चाहिए.
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