सुप्रीम कोर्ट की फटकार, घर खरीदारों को परेशान करने वाले बिल्डरों को राहत नहीं

सुप्रीम कोर्ट की यह सुनवाई उन लाखों घर खरीदारों के लिए उम्मीद की किरण है, जो सालों से अपने घर और मालिकाना हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं. कोर्ट का सख्त रुख यह भरोसा दिलाता है कि अब बिल्डरों की मनमानी नहीं चलेगी और खरीदारों को उनका वाजिब हक मिलकर रहेगा

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घर खरीदारों के लिए राहत (Photo-ITG) घर खरीदारों के लिए राहत (Photo-ITG)

अनीषा माथुर

  • नई दिल्ली,
  • 20 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:05 PM IST

नोएडा और ग्रेटर नोएडा के हजारों घर खरीदारों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने राहत दी है. मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने बिल्डरों द्वारा की गई धोखाधड़ी और देरी के मामलों पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट कर दिया कि खरीदारों को प्रताड़ित करने वाले बिल्डरों के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जाएगी.

सुनवाई के दौरान CJI ने सख्त लहजे में कहा कि जो भी बिल्डर या उनसे जुड़ी संस्थाएं घर खरीदारों के मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न के लिए जिम्मेदार हैं, वे इस मामले में लगातार पक्षकार बनी रहेंगी. कोर्ट ने साफ कर दिया कि ऐसे बिल्डरों को किसी भी तरह की अंतरिम राहत नहीं दी जाएगी. अदालत का यह रुख उन बिल्डरों के लिए बड़ा झटका है जो कानूनी दांव-पेच के जरिए राहत की उम्मीद कर रहे थे.

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कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत स्पष्ट करते हुए कहा कि केवल इसलिए कि कोई प्रोजेक्ट अब पूरा हो गया है चाहे वह बिल्डर द्वारा किया गया हो या NBCC द्वारा बिल्डर के पिछली वादाखिलाफी को भूला नहीं जा सकता. अदालत ने साफ किया कि काम पूरा होने का मतलब यह नहीं है कि बिल्डर ने जो देरी की या खरीदारों को जो नुकसान पहुंचाया, उसकी जिम्मेदारी खत्म हो गई है.

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रजिस्ट्री में देरी: नोएडा अथॉरिटी को लेकर नाराजगी

सुनवाई में सुपरटेक (Supertech) मामले का विशेष जिक्र हुआ. याचिकाकर्ता ने कोर्ट के संज्ञान में लाया कि एमिकस रिपोर्ट के अनुसार, NBCC ने फ्लैटों का निर्माण पूरा कर लिया है. लेकिन हैरानी की बात यह है कि खरीदारों के बार-बार अनुरोध के बावजूद नोएडा अथॉरिटी 500 में से 487 फ्लैटों की रजिस्ट्री करने से इनकार कर रही है. सुपरटेक सुपरनोवा मामले में खरीदारों के सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है और इस पर अथॉरिटी के साथ बातचीत जारी है.

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नोएडा और ग्रेटर नोएडा में मकानों की डिलीवरी में हुई भारी देरी की जांच कर रही CBI को सुप्रीम कोर्ट ने और अधिक समय दिया है. इसके साथ ही, अदालत ने बैंकों और NBFC द्वारा दायर उन आवेदनों पर भी गौर किया, जिनमें कोर्ट द्वारा नियुक्त कमेटी द्वारा इन्वेंट्री बेचकर जुटाए गए फंड के उपयोग की अनुमति मांगी गई है. बेंच ने कमेटी को निर्देश दिया कि वे इन वित्तीय संस्थानों की मांगों पर गंभीरता से विचार करें.

मामले की जटिलता और कई प्रोजेक्ट्स के शामिल होने के मद्देनजर, सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि  विभिन्न प्रोजेक्ट्स पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर फाइल किया जाए. इससे कोर्ट को हर एक प्रोजेक्ट की वर्तमान स्थिति और खरीदारों की समस्याओं को अलग-अलग समझने में मदद मिलेगी.

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