'सपनों का घर' बेचने वाले कैसे बीच सड़क पर ढूंढ़ते हैं कस्टमर? कहानी कैचर की

कैचर न सिर्फ लोगों को सपनों का घर बेचते हैं, बल्कि अपनी मेहनत से अपना और अपने परिवार के सपनों को भी साकार करते हैं, लेकिन इनकी खुद की कमाई इतनी कम होती है कि वो अपने लिए घर का सपना तक नहीं देख सकते.

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कैचर की कहानी कैचर की कहानी

स्मिता चंद

  • नोएडा,
  • 06 मई 2025,
  • अपडेटेड 12:50 PM IST

चिलचिलाती धूप हो या हाड़ कंपाने वाली सर्दी, कभी लू के थपेड़ों को झेलते हुए तो वहीं बारिश के मौसम में पेड़ की आड़ लेकर खुद को बचाते हुए सड़क पर खड़े कुछ लोग आपकी गाड़ी के सामने आते होंगे और फ्लैट बेचने की कोशिश करते होंगे. कैचर, एजेंट, ब्रोकर नामों से पहचाने जाने वाले ये लोग आपको घर का सपना दिखाते हैं और फ्लैट बेचने की कोशिश करते हैं. कई बार गुस्से में लोग इन्हें दुत्कारते भी हैं, लेकिन मुस्कुराते हुए वो फिर दूसरी गाड़ी की ओर देखने लगते हैं. आजतक डिजिटल ने इन लोगों से जानने की कोशिश की ये लोग कैसे काम करते हैं और उनकी क्या चुनौतियां हैं?   

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29 साल की डॉली आठवीं पास हैं, घरवालों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है. इसलिए अभी तक शादी नहीं की है. धूल भरी सड़क पर खड़े होकर, पसीने से तर-बतर डॉली हर गुजरती गाड़ी की खिड़की पर इस उम्मीद में झांकती हैं, कि कोई उनकी बात सुनेगा. वो इस सड़क पर सुबह 10 बजे से 6.30 बजे तक खड़ी रहती है. वो लोगों को रोकती हैं और उन्हें अपने हाउसिंग प्रोजेक्ट के बारे में बताती हैं.  उनके पास वन बीएचके से लेकर विला तक के रेट कार्ड हैं, वन बीएचके की कीमत 20 लाख है और 83 लाख में विला मौजूद है. 

डॉली बताती हैं- 'मैं महीने में 15 हजार कमा लेती हूं, और अगर मेरे लाए हुए कस्टमर घर घरीदते हैं, तो इंसेंटिव अलग से मिलता है.' वे रोज गांधी नगर से ग्रेटर नोएडा वेस्ट की इस सड़क पर आकर तैनात हो जाती हैं और आते- जाते हर राहगीर को रोककर अपने प्रोजेक्ट के बारे में बताती हैं, दिन में करीब 100 लोगों से बात करती हैं, तब जाकर 4-5 लोग सेल्स ऑफिस जाने को तैयार होते हैं, उसमें भी घर खरीदने वालों की संख्या काफी कम होती है.   

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22 साल के वरुण ने बीसीए किया है फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते हैं, लेकिन ये काम क्यों करते हैं इस सवाल के जवाब में कहते हैं- 'यहां इंस्टेंट मनी मिलता है. रियल एस्टेट का काम सीखने के लिए ये अच्छी शुरुआत है.' वरुण बताते हैं कि उनकी 7 घंटे की ड्यूटी होती है वो लोगों को रोकते हैं और उनको प्रोजेक्ट के बारे में बताते हैं और लोगों को तैयार कर सेल्स ऑफिस ले जाते हैं. अगर हमारे ले गए ग्राहक घर खरीद लें तो उसके बदले इंसेटिव भी मिलता है. मुझे ऑफिस में बैठकर काम करना पसंद नहीं है, इसलिए ये काम मुझे अच्छा लगता है, बस गर्मी में थोड़ी दिक्कत होती हैं, लेकिन मेहनत तो हर काम में करना पड़ता है, चाहे एसी में बैठो या बाहर धूप में.'  

 

17 साल के आमिर कैचर का काम करते हैं, वो कुर्सी पर बैठे फ्लैट के रेट लिस्ट लोगों को दिखाते हैं. उनका काम है किसी तरह से गाड़ी को रोकना, उसके बाद की जिम्मेदारी एजेंट की होती है, वो कस्टमर को सेल्स ऑफिस तक ले जाते हैं. आमिर को इस काम के लिए हफ्ते में 3 हजार रुपये मिलते हैं. आमिर ने पढ़ाई की नहीं इसलिए ये काम चुना, उनको अपने काम से कोई शिकायत नहीं हैं वो कहते हैं- मुझे बस सड़क पर लोगों की कार रोक कर एजेंट से मिलवाना होता है. मैं सुबह 9 बजे यहां आकर बैठ जाता हूं और शाम को 5 बजे तक मेरी ड्यूटी होती है. 

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52 के सतेंद्र सिंह एक कंपनी में नौकरी करते थे, लेकिन कोविड में जॉब छूट गई दो बच्चों की जिम्मदारी सिर पर थी. घर चलाना मुश्किल हो रहा था, तब वो रियल एस्टेट सेक्टर में आए और उनको यहां कैचर का काम मिला. वो पिछले 2 सालों से सुबह 11 बजे यहां आते हैं और शाम को 5 बजे तक रहते हैं. उन्हें महीने में 16 हजार रुपये मिलते हैं. सतेंद्र बताते हैं- आजकल कस्टमर मुश्किल से मिलते हैं क्योंकि फ्लैट काफी महंगे मिलते हैं.'  वो मुझसे बात कर रहे थे, लेकिन उनकी नजर हर आती जाती गाड़ी पर थी, जो भी उस रास्ते से गुजरता तुरंत बुकलेट लेकर सामने खड़े हो जाते.   

क्या है कैचर की चुनौतियां?
 
खुद को ब्रोकर बताने वाले राजू कहते हैं- मैं तीन, चार बिल्डरों के लिए काम करता हूं. मैं कस्टमर ले जाता हूं और अगर वो फ्लैट खरीदता है तो मुझे एक परसेंट मिलता है. लेकिन कई बार ऐसा होता है कि कोई कस्टमर नहीं मिलता ऐसे में अपना खर्च चलाना मुश्किल होता है. राजू ने अपने लोकेशन पर एक कैचर बैठा रखा है. जो उनके लिए कस्टमर लेकर आता है. वो कहते हैं- कैचर का पैसा तो फिक्स है,लेकिन हमारा पैसा फ्लैट बिकने पर ही मिलता है.

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कैचर का काम करने वाले लोगों को सैलरी तो मिलती हैं, लेकिन इनको कोई और बेनिफिट नहीं मिलता. इन लोगों को बीच सड़क पर ही काम करना है, लेकिन इनके लिए कोई इंश्योरेंस की व्यवस्था नहीं है. वहीं कुछ कैचर ऐसे भी हैं, जिनको कस्टमर लाने पर ही पैसा मिलता है. कुछ लोगों को महीने का 15 कस्टमर का टारगेट मिला है, लेकिन अगर वो टारगेट नहीं पूरा कर पाते हैं, तो उनका पैसा काट भी लिया जाता है.    

डॉली, वरुण, आमिर और सतेंद्र जैसे ये कैचर न सिर्फ लोगों को सपनों का घर बेचते हैं बल्कि अपनी मेहनत से अपना और अपने परिवार के सपनों को भी साकार करते हैं, लेकिन इनकी खुद की कमाई इतनी कम होती है कि वो अपने लिए घर का सपना तक नहीं देख सकते.  
 

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