गुरुग्राम का 'फ्रॉड', प्रॉपर्टी निवेशेकों के लिए अलार्म, बिल्डर के मायाजाल से कैसे बचें

गुरुग्राम के मशहूर '32nd Avenue' के CEO ध्रुव दत्त शर्मा की गिरफ्तारी ने रियल एस्टेट सेक्टर में हड़कंप मचा दिया है, जहां ₹500 करोड़ के बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है. यह मामला दिखाता है कि कैसे रूतबे और चमक-धमक की आड़ में निवेशकों की मेहनत की कमाई को बर्बाद किया जाता है.

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गुरुग्राम फ्रॉड केस से लोगों को सबक लेने की जरूरत (Photo-ITG) गुरुग्राम फ्रॉड केस से लोगों को सबक लेने की जरूरत (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:18 AM IST

गरुग्राम के एक बड़े रियल एस्टेट फ्रॉड से पूरे शहर और निवेशकों के बीच हलचल मच गई है. यह मामला तब सामने आया जब गुरुग्राम पुलिस ने शहर के मशहूर कमर्शियल हब '32nd Avenue' के संस्थापक और सीईओ ध्रुव दत्त शर्मा को गिरफ्तार किया. पुलिस के मुताबिक, यह एक सुनियोजित और बड़े पैमाने पर की गई धोखाधड़ी है, जिसमें करीब ₹500 करोड़ से अधिक के घोटाले का अनुमान है.

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आरोप है कि शर्मा ने न केवल एक ही कमर्शियल यूनिट को कई अलग-अलग निवेशकों को बेचा, बल्कि उनसे 'एश्योर्ड रेंटल रिटर्न' का वादा करके भी मुकर गए. जांच में यह भी सामने आया है कि निवेशकों के खून-पसीने की कमाई को लग्जरी प्रोजेक्ट्स और व्यक्तिगत ऐश-ओ-आराम में लगा दिया गया. फिलहाल, आर्थिक अपराध शाखा (EOW) इस पूरे मनी ट्रेल की जांच कर रही है और आरोपी ध्रुव दत्त शर्मा छह दिन की पुलिस रिमांड पर हैं, जिससे आने वाले दिनों में और भी चौंकाने वाले खुलासे होने की उम्मीद है. 

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कैसे लोगों को फंसाया?

34 साल का ध्रुव दत्त शर्मा अमेरिका से पढ़ाई करके लौटा एक बड़ा कारोबारी है. जिसने गुरुग्राम में '32nd Avenue' जैसा शानदार इलाका तैयार किया है, जो अपने रेस्टोरेंट्स और कैफे के लिए मशहूर है. ध्रुव ने अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है. वे इससे पहले 'GuestHouser' नाम की कंपनी भी चला चुका है और साल 2018 में उसकी कामयाबी को देखते हुए मशहूर 'फोर्ब्स' मैगजीन ने उन्हें एशिया के '30 अंडर 30' (30 साल से कम उम्र के प्रभावशाली लोग) की लिस्ट में शामिल किया था.

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2015 से वे दिल्ली-एनसीआर, हैदराबाद और गोवा जैसे शहरों में प्रॉपर्टी के बड़े प्रोजेक्ट्स संभाल रहा है. वे गुरुग्राम के सबसे महंगे और आलीशान इलाकों में से एक 'DLF Camellias' में रहता है. लोग शायद उसके बैकग्राउंड को देखकर उस पर भरोसा कर बैठे, लेकिन जब हकीकत सामने आई तो इस केस के ऐसे निवेशकों को और सावधान कर दिया जो रियल एस्टेट में निवेश का प्लान कर रहे हैं.  

निवेशक फ्रॉड से कैसे बचें

ये केस उन लाखों निवेशकों के लिए एक चेतावनी है, जो सुनहरे भविष्य के सपने लेकर रियल एस्टेट में कदम रखते हैं. सालों तक अपनी छोटी-छोटी जरूरतों को मारकर जमा की गई पूंजी जब किसी घोटाले की भेंट चढ़ जाती है, तो वह इंसान को आर्थिक और मानसिक रूप से तोड़ देती है. लेकिन सवाल यह है कि क्या इस तरह की धोखाधड़ी से बचा जा सकता है? विशेषज्ञों का मानना है कि थोड़ी सी सावधानी और कानूनी जागरूकता आपको ऐसे जाल से बचा सकती है.

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रेरा (RERA) की शरण में जाएं

रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट, 2016 यानी RERA ग्राहकों का सबसे बड़ा हथियार है. किसी भी प्रोजेक्ट में निवेश करने से पहले यह सुनिश्चित करें कि वह संबंधित राज्य की रेरा अथॉरिटी में रजिस्टर्ड है या नहीं. रेरा की वेबसाइट पर जाकर प्रोजेक्ट की आईडी चेक करें. वहां आपको बिल्डर के पिछले रिकॉर्ड, जमीन के मालिकाना हक और प्रोजेक्ट पूरा होने की समय सीमा की सटीक जानकारी मिलेगी.

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'एश्योर्ड रिटर्न' के लालच से बचें

ध्रुव दत्त शर्मा के मामले में भी 'एश्योर्ड रेंटल रिटर्न' का लालच एक बड़ा हथियार था. अक्सर बिल्डर निवेशकों को लुभाने के लिए बैंक से ज्यादा ब्याज या निश्चित किराए का वादा करते हैं. याद रखें, यदि कोई ऑफर बहुत ज्यादा आकर्षक लग रहा है, तो उसके पीछे जोखिम भी उतना ही बड़ा हो सकता है. ऐसे वादों की कानूनी वैधता बहुत कम होती है और कंपनी दिवालिया होने की स्थिति में आप अपना मूलधन भी खो सकते हैं.

 'डबल सेलिंग' का खेल और टाइटल सर्च

कई बार एक ही यूनिट को दो या तीन लोगों को बेच दिया जाता है, इससे बचने के लिए किसी स्वतंत्र वकील से 'टाइटल सर्च रिपोर्ट' तैयार करवाएं. पिछले 30 सालों के रिकॉर्ड की जांच करवाएं कि जमीन का मालिक कौन है और क्या उस पर कोई बैंक लोन या कानूनी विवाद तो नहीं है.

 कागजी कार्रवाई में ढिलाई न बरतें

सिर्फ अलॉटमेंट लेटर के भरोसे न रहें. सेल एग्रीमेंट (Sale Agreement) को हमेशा रजिस्टर करवाएं. बिल्डर-बायर एग्रीमेंट की हर शर्त को ध्यान से पढ़ें. अक्सर 'हिडन चार्जेस' या पजेशन में देरी होने पर मिलने वाले जुर्माने की शर्तें बिल्डर के पक्ष में झुकी होती हैं.

साइट विजिट और पजेशन का ट्रैक

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केवल चमकदार ब्रोशर या विज्ञापनों पर भरोसा न करें. समय-समय पर साइट पर जाकर कंस्ट्रक्शन की प्रगति देखें. अगर काम रुक गया है या देरी हो रही है, तो तुरंत अन्य निवेशकों के साथ मिलकर ग्रुप बनाएं और अथॉरिटी से संपर्क करें.

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