देश के मेट्रो सिटीज में घर के दाम पिछले कुछ सालों में इतने ज्यादा बढ़ गए हैं कि आम लोगों के लिए यहां घर लेने का सपना महज सपना ही रह गया है. हालत ऐसी हो गई है कि किफायती घर ((Affordable House) भी अब लोगों के लिए अफोर्डेबल नहीं रह गया है. देश के बड़े शहरों में हालत ये है कि मिडिल क्लास के लोगों के लिए अफोर्डेबल हाउस मिलना भी बेहद मुश्किल हो गया है.
जमीन की कीमतें आसमान पर
पिछले कुछ सालों में लगातार बढ़ती जमीन की कीमतें, मेट्रो सिटीज में जमीन की उपलब्धता की कमी की वजह से भी घरों के दाम आसमान छू रहे हैं. वहीं सीमेंट, स्टील और दूसरे निर्माण के सामानों के रेट भी काफी बढ़ गए हैं.
आखिर क्यों किफायती घर मिलना हो रहा है मुश्किल? आजतक डिजिटल ने बात की प्रॉपर्टी एक्सपर्ट प्रदीप मिश्रा से. वो बताते हैं- 'मिडिल क्लास और निम्न वर्गीय परिवारों के लिए किफायती आवास एक बुनियादी जरूरत है, खासकर मेट्रो शहरों में जहां लोग अपने बजट में फिट होने वाले घरों की तलाश में हैं. घर हर किसी की बेसिक जरूरत होती है और देश का एक बड़ा हिस्सा किफायती आवास के माध्यम से ही अपने सपनों को पूरा कर सकता है. हालांकि, पिछले कुछ सालों में घरों की कीमतों में 40% तक की वृद्धि हुई है, जिससे किफायती घरों की मांग बढ़ी है, लेकिन उनकी आपूर्ति कम हो रही है.'
बिल्डर बना रहें हैं प्रीमियम और लग्जरी घर
रियल एस्टेट डेवलपर्स की प्राथमिकताएं अब प्रीमियम और लग्जरी प्रोजेक्ट्स की तरफ ज्यादा हैं, क्योंकि उन्हें इससे ज्यादा प्रॉफिट मिलता है. किफायती आवास प्रोजेक्ट की तुलना में लग्जरी और मिड-सेगमेंट घरों से अधिक मुनाफा होने के कारण, डेवलपर्स ऐसे प्रोजेक्ट पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. इससे किफायती घरों के प्रोजेक्ट में कमी आई है और लोगों के लिए अपने सपनों का घर खरीदना मुश्किल हो रहा है. ऐसे लोग जो कम बजट में लोन लेकर घर खरीदना चाहते हैं उनके लिए बाजार में महंगे विकल्प हैं. ऊपर से लोन की ब्याज दरें भी ज्यादा हैं, ऐसे में मिडिल क्लास के लोग घर नहीं खरीद पा रहे हैं.
क्या हैं विकल्प ?
ऐसे लोग जो किफायती घर की तलाश में हो वो क्या करें? इस सवाल के जवाब में प्रदीप मिश्रा बताते हैं- अगर आप किफायती घर की तलाश में हैं, तो कुछ महत्वपूर्ण बातें ध्यान में रखनी चाहिए. सबसे पहले, अपने बजट का सही आंकलन करें और सुनिश्चित करें कि आप अपनी सैलरी के अनुसार होम लोन की ईएमआई का भुगतान कर सकते हैं. दूसरी बात, प्रॉपर्टी की कीमतों में स्थिरता या गिरावट की संभावनाओं पर नजर रखें, इसके अलावा, सरकार द्वारा चलाई जा रही आवासीय योजनाओं का लाभ उठाने का प्रयास करें, जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना इन योजनाओं से आपको सब्सिडी मिल सकती है, जिससे आपके वित्तीय बोझ को कम किया जा सकता है.
पिछले कुछ सालों में मेट्रो सिटीज में देश भर से लोग रोजगार और बेहतर जीवनशैली की तलाश में आ रहे हैं, जिससे यहां घरों की मांग तो बेतहाशा बढ़ी है, लेकिन लोगों की डिमांड के हिसाब से नए प्रोजेक्ट नहीं बन रहे हैं.
स्मिता चंद