सस्ता घर, कम EMI... बजट 2026 से क्या हैं मिडिल क्लास और एक्सपर्ट्स की मांगें

बजट का फोकस अगर "घर खरीदार" पर रहता है, तो मध्यम वर्ग के लिए यह साल खुशियों भरा हो सकता है. एक्सपर्ट्स का साफ कहना है कि टैक्स छूट की सीमा बढ़ाना और किफायती आवास की परिभाषा बदलना ही वो दो रास्ते हैं जिनसे "सबके लिए घर" का सपना सच हो पाएगा.

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बजट से रियल एस्टेट सेक्टर को हैं उम्मीदें (Photo-ITG) बजट से रियल एस्टेट सेक्टर को हैं उम्मीदें (Photo-ITG)

स्मिता चंद

  • नई दिल्ली,
  • 16 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:26 PM IST

बजट के काउंटडाउन के साथ ही घर खरीदारों की उम्मीदों और रियल एस्टेट विशेषज्ञों के सुझावों की फेहरिस्त तैयार हो गई है. इस बार नजरें सिर्फ टैक्स छूट जैसे छोटे फायदों पर नहीं, बल्कि शहरी आवास की बदलती अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाली दूरगामी नीतियों पर टिकी हैं. आम लोगों से लेकर बाजार के जानकार तक, सभी सरकार से ऐसी प्रक्रियाओं की उम्मीद कर रहे हैं जिनमें मंजूरी की रफ्तार तेज हो और घर खरीदारों के लिए आसान वित्तीय रास्ते खुलें. एक स्थिर नीतिगत माहौल की यह मांग न केवल इस क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि देश के शहरी विकास को एक नई और सुरक्षित दिशा देने में भी मील का पत्थर साबित होगी.
 
ALYF के फाउंडर और सीईओ, सौरभ वोहरा कहते हैं- 'बजट से रियल एस्टेट सेक्टर और घर खरीदारों को बड़ी उम्मीदें हैं, जहां मुख्य फोकस होम लोन पर मिलने वाली टैक्स छूट और मध्यम वर्ग को राहत देने पर टिका है. खरीदार चाहते हैं कि सरकार धारा 24(b) के तहत ब्याज कटौती की सीमा और 80C के अंतर्गत मिलने वाली रियायतों को बढ़ाए, ताकि ₹40 से ₹80 लाख के बजट वाले घरों की प्रभावी EMI कम हो सके और निवेश को बढ़ावा मिले. इसके साथ ही, पिछले बजट में दो घरों तक काल्पनिक किराए (Notional Rent) पर मिली कर छूट ने पहले ही दूसरे घर के मालिकों के लिए स्वामित्व की राह आसान की है, जिससे अब टियर-2 शहरों और वेकेशन डेस्टिनेशंस में प्रॉपर्टी खरीदने का क्रेज बढ़ा है कुल मिलाकर, बजट में टैक्स सीमाओं में बढ़ोतरी और किफ़ायती आवास नीतियों में निरंतरता न केवल आम आदमी की जेब का बोझ कम करेगी, बल्कि रियल एस्टेट बाजार में मांग और आपूर्ति के चक्र को भी नई गति प्रदान करेगी.' 

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बजट से क्या चाहते हैं एक्सपर्ट? 

बजट केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि शहरों के भविष्य को नया आकार देने का सबसे बड़ा जरिया है. सांघवी रियल्टी के प्रबंध निदेशक, पक्षाल सांघवी का मानना है कि ' अगर बजट में पुरानी इमारतों के पुनर्विकास पर ध्यान दिया जाए, तो यह न केवल शहरों की सूरत बदलेगा, बल्कि लोगों को सुरक्षित घर भी देगा.'

वहीं, एलायंस सिटी डेवलपर्स की सीईओ, अंकिता लुहारुका के कहती हैं- 'डेवलपर्स के लिए अप्रूवल की प्रक्रिया में स्पष्टता और वित्तीय अनुशासन बहुत जरूरी है.' वे कहती हैं कि 'पारदर्शिता और दूरदर्शी योजनाओं वाला बजट न केवल रियल एस्टेट सेक्टर को मजबूती देगा, बल्कि उन आम नागरिकों का भरोसा भी बढ़ाएगा जो अपने पुराने मकानों को एक बेहतर और आधुनिक घर में बदलते देखने की उम्मीद रखते हैं.'

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आगामी बजट को लेकर डैलकोर (Dalcore) के मैनेजिंग डायरेक्टर, सिद्धार्थ चौधरी का कहते हैं- 'इस बार फोकस नीतिगत निरंतरता और प्रीमियम हाउसिंग मार्केट्स, जैसे कि गुरुग्राम के गोल्फ कोर्स रोड पर होना चाहिए. अगर सरकार स्टांप ड्यूटी को तर्कसंगत बनाती है और होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली टैक्स छूट को बढ़ाती है, तो इससे न केवल घर खरीदने वालों का उत्साह बढ़ेगा, बल्कि निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होगा.' 

सिद्धार्थ चौधरी आगे कहते हैं कि डेवलपर्स के लिए 'इंफ्रास्ट्रक्चर स्टेटस' के फायदों को बढ़ाना और कम ब्याज दर पर लंबी अवधि के कर्ज की उपलब्धता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है, ताकि हाई-क्वालिटी प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा किया जा सके. चूंकि गुरुग्राम अब एक ग्लोबल रेजिडेंशियल और कमर्शियल हब बन चुका है, ऐसे में एक दूरदर्शी बजट एनसीआर को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय रियल एस्टेट निवेश के लिए सबसे पसंदीदा डेस्टिनेशन के रूप में और मजबूती से स्थापित कर सकता है.'

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क्या कम होंगी घर की कीमतें?

Aratt Developers और Ayatana Hospitalities के चेयरमैन, टोनी विंसेंट का कहना है- इस बार रियल एस्टेट सेक्टर की नजरें मुख्य रूप से जीएसटी (GST) और टैक्स ढांचे में सुधार पर टिकी हैं. हालांकि किफायती आवास के लिए जीएसटी दरें पहले से ही कम हैं, लेकिन निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स में इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की सुविधा न मिलने से लागत बढ़ जाती है. अगर सरकार जीएसटी संरचना में सुधार कर इनपुट टैक्स क्रेडिट की अनुमति देती है, तो इससे न केवल पारदर्शिता आएगी, बल्कि घरों की कीमतें भी कम हो सकेंगी.'

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डायरेक्ट टैक्स के मोर्चे पर, टोनी विंसेंट का मानना है कि कैपिटल गेन टैक्स और प्रॉपर्टी रखने की समय सीमा (Holding Period) पर पुनर्विचार करने की सख्त जरूरत है. उनके अनुसार, इंडेक्सेशन के लाभ को फिर से लागू करना निवेशकों को महंगाई की मार से बचाएगा. साथ ही, होम लोन के ब्याज और मूलधन (Principal) भुगतान पर टैक्स छूट की सीमा बढ़ाने से सीधे तौर पर उन लोगों को फायदा होगा जो अपने लिए घर खरीदना चाहते हैं.
 

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