प्राइवेट विमानन कंपनी जेट एयरवेज की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है. लोगों को आशंका होने लगी है कि कहीं जेट एयरवेज का भी किंगरफिशर एयरलाइंस जैसा हाल न हो जाए. कंपनी के 119 विमान हैं जिनमें 78 खड़े हो गए हैं. कंपनी को मार्च अंत तक 1700 करोड़ रुपये चुकाने हैं. कंपनी की बिगड़ती आर्थिक सेहत को लेकर सरकार भी चिंतित है, खुद केंद्रीय नागर विमानन मंत्री सुरेश प्रभु मामले को लेकर गंभीर हैं. उन्होंने आपात बैठक बुलाने का आदेश दिया है. (Photo: Getty)
जेट एयरवेज के केवल 41 विमान सेवा में
दरअसल पिछले कुछ महीनों से जेट एयरवेज पर कर्ज की बोझ पर बढ़ता जा रहा है. कंपनी लगातार इससे उबरने की कोशिश कर रही है, लेकिन उबर नहीं पा रही है. नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) की रिपोर्ट कंपनी की हालात बयां करने के लिए काफी है. DGCA की मानें तो इस समय केवल 41 विमान ही परिचालन के लिए उपलब्ध हैं, जबकि एयरलाइन के पास कुल 119 विमान हैं. यानी 78 विमान खड़े हैं. फिलहाल बेड़े में शामिल 41 विमानों से 603 घरेलू और 382 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें जारी हैं. (Photo: Getty)
DGCA ने मंगलवार को अपनी रिपोर्ट में कहा कि जेट एयरवेज की फिलहाल 41 उड़ानें परिचालन की स्थिति में रह गई हैं और आने वाले हफ्ते में और कमी आ सकती है. डीजीसीए का मानना है कि जेट एयरवेज के मामले में स्थितियां तेजी से बदलती जा रही हैं. वहीं जेट एयरवेज के एयरक्राफ्ट इंजीनियरों के संगठन ने विमानन नियामक को खत लिखकर कहा है कि 3 महीने का वेतन बकाया है और उड़ान सुरक्षा खतरे में है. (Photo: Getty)
16 हजार कर्मचारियों का भविष्य अधर में
इस बीच सरकार भी अब जेट एयरवेज
के 16 हजार कर्मचारियों के भविष्य को लेकर चिंतित है. केंद्रीय मंत्री
सुरेश प्रभु ने नागर विमानन सचिव को जेट एयरवेज की स्थिति पर विचार करने के
लिए आपात बैठक करने के निर्देश दिए हैं. मंत्री ने सचिव को डीजीसीए से
तत्काल रिपोर्ट मांगने के लिए भी कहा है. बैठक में विमानों को खड़ा करने,
एडवांस बुकिंग, कैंसिलेशन, रिफंड और सुरक्षा मुद्दों को लेकर चर्चा करने के
आदेश दिए गए हैं.
दरअसल, 18 मार्च को जेट एयरवेज ने आबूधाबी में अपनी उड़ानों को रद्द कर दिया था, जिससे यात्रियों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. सोमवार को जेट एयरवेज ने बीएसई को सूचित किया था कि पट्टेदारों के बकाया राशि को नहीं चुकाने की वजह से उसने अपने 4 और विमानों के परिचालन को बंद कर दिया है. (Photo: Getty)
बकाया वेतन नहीं मिलने पर उड़ान रोकने की धमकी
वहीं जेट एयरवेज के डोमेस्टिक पायलटों के संगठन ने भी चेतावनी दी है कि अगर उनके बकाया वेतन का भुगतान 31 मार्च तक नहीं किया जाता है तो 1 अप्रैल से उड़ानें रोक दी जाएंगी. गिल्ड में एयरलाइन के करीब 1,000 घरेलू पायलट हैं. वेतन मामले में प्रबंधन से कोई आश्वासन नहीं मिलने के बाद गिल्ड ने पिछले हफ्ते ने श्रम मंत्री संतोष गंगवार को भी पत्र लिखकर मामले में दखल का आग्रह किया. (Photo: Getty)
नरेश गोयल का इमोशनल खत
हालांकि संकट से जूझ रही 25 साल पुरानी जेट एयरवेज कंपनी के चेयरमैन नरेश गोयल ने अपने 16,000 कर्मचारियों को पत्र लिखकर कहा है कि वह कंपनी पर भरोसा बनाए रखें. क्योंकि कंपनी की ओर से स्थिरता बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं. गोयल ने खत में लिखा है कि विमान खड़े होने की वजह से कंपनी का नकदी संकट बढ़ना है, जिसके चलते वह पट्टे पर लिए गए विमानों का किराया चुकाने में विफल रही है.
उन्होंने कर्मचारियों को भरोसा दिया है कि कंपनी की रणनीतिक साझेदार विमानन कंपनी एतिहाद एयरवेज के साथ बातचीत जारी है और भारतीय स्टेट बैंक की अगुवाई वाले कर्जदाताओं के समूह से भी चर्चा की जा रही है. कंपनी में एतिहाद की 24 प्रतिशत हिस्सेदारी है. (Photo: Getty)
कर्ज में डूबी है कंपनी
जेट एयरवेज कंपनी के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि वह अपने पट्टेदारों का बकाया नहीं चुका पा रही है, जिस वजह से विमानन कंपनी लगातार अपने विमानों का परिचालन बंद कर रही है. इस बीज जेट एयरवेज का कर्ज बढ़कर 8,052 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है. कंपनी को मार्च अंत तक 1,700 करोड़ रुपये की किस्त चुकानी है. (Photo: Getty)
कंपनी की बदहाली की सबसे बड़ी वजह कमाई में गिरावट और खर्चे बढ़ना है. कंपनी को जनवरी-मार्च (2018) तिमाही में करीब 1,040 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था, जिसके बाद मई 2018 में जेट एयरवेज में इसकी सब्सिडियरी जेटलाइट के मर्जर को मंजूरी नहीं मिलने से भी कंपनी की आर्थिक सेहत बिगड़ती गई. (Photo: Getty)