Advertisement

बिजनेस

चीन को भारत की मिर्च मंजूर, लेकिन बीफ पर कहा- बाद में सोचेंगे

अमित कुमार दुबे
  • 09 मई 2019,
  • अपडेटेड 10:58 PM IST
  • 1/8

भारत ने चीन से कहा है कि वह अपने बाजारों में उसके कृषि और पशुपालन उद्योग से जुड़े उत्पादों को अधिक बाजार पहुंच उपलब्ध कराए. एक अधिकारी ने कहा कि भारत का मानना है कि इससे उसका चीन के साथ व्यापार घाटा कम हो सकेगा.

  • 2/8


बीफ (भैंस का मांस), दूध और दुग्ध उत्पादों से संबंधित आवश्यक दस्तावेज चीन के सामान्य सीमाशुल्क प्रशासन (जीएससीसी) के पास जमा कराए गए हैं. चीन मुंहपका और खुरपका बीमारियों की आशंका की वजह से भारत से बीफ के आयात को अनुमति नहीं देता है. 

  • 3/8

वाणिज्य सचिव अनूप वाधवान तथा जीएसीसी के उप मंत्री ली गुओ के बीच गुरुवार को यहां हुई बैठक में इन मुद्दों पर विचार विमर्श हुआ. भारत ने चीन को सूचित किया है कि वह कई वर्षों से 70 देशों को बिना ग्लैंड और बिना हड्डी वाले फ्रोजन मांस का निर्यात कर रहा है.

Advertisement
  • 4/8

अधिकारी ने बताया कि चीन ने कहा है कि वह इस मुद्दे पर गौर करेगा. बैठक में चीन ने भारत से उसके डेयरी उत्पादों मसलन चॉकलेट और कैंडीज, सेब, नाशपाती और गेंदे को अधिक बाजार पहुंच उपलब्ध कराने को कहा. भारत ने सितंबर, 2008 से चीन से चॉकलेट, चॉकलेट उत्पाद, कैंडीज आदि के आयात पर प्रतिबंध लगाया हुआ है.

  • 5/8

मिर्च-खली पर डील
वहीं भारत और चीन ने भारतीय मिर्च खली के निर्यात के लिए एक प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए हैं. वाणिज्य मंत्रालय ने यह जानकारी दी. वाणिज्‍य सचिव अनूप वधावन और चीन के सामान्य सीमा शुल्क प्रशासन (जीएसीसी) के उप मंत्री ली गुओ के बीच हुई बैठक के बाद इस पर हस्ताक्षर हुए. 

  • 6/8

बैठक के दौरान, दोनों पक्षों ने कृषि उत्पादों को मंजूरी के भारतीय अनुरोधों समेत व्यापार से जुड़े मामलों पर विचार-विमर्श किया. मंत्रालय ने बयान में कहा, 'बैठक के अंत में भारत से चीन को मिर्च खली (चिली मील) के निर्यात के लिए प्रोटोकॉल पर हस्‍ताक्षर किए गए.'

Advertisement
  • 7/8

इसके अलावा दोनों पक्षों ने बाजार पहुंच से जुड़े मुद्दों को जल्‍द से जल्द सुलझाने पर सहमति जताई है, ताकि ज्‍यादा संतुलित व्‍यापार को बढ़ावा दिया जा सके और भारत एवं चीन के शीर्ष नेताओं के सपनों को साकार किया जा सके. भारत देश में विनिर्मित और कृषि उत्पादों के लिए चीन में अधिक बाजार पहुंच की मांग कर रहा है ताकि व्यापार घाटे को कम किया जा सके. इस दृष्टि से यह बैठक महत्वपूर्ण है.

  • 8/8


हाल ही में भारत ने चीन के साथ 380 उत्पादों की सूची चीन के साथ साझा की थी, इनमें बागवानी, वस्त्र, रसायन और फार्मा उत्पाद शामिल हैं. इन उत्पादों के निर्यात की काफी संभावनाएं हैं. इन उत्पादों का निर्यात बढ़ाने से भारत को चीन के साथ अपने व्यापार घाटे को कम करने में मदद मिलेगा. अप्रैल-फरवरी 2018-19 के दौरान भारत का व्यापार घाटा 50.12 अरब डॉलर था.

Advertisement

लेटेस्ट फोटो

Advertisement