TikTok ने ठोक दिया अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पर मुकदमा, बैन को बताया चुनावी हथकंडा 

यह मुकदमा लॉस एंजिलिस के फेडरल कोर्ट में किया गया है और इसमें प्रतिवादियों के रूप में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप, अमेरिकी वाणिज्य मंत्रालय और वाणिज्य मंत्री विल्बर रॉस का नाम है. 

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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ मुकदमा (फोटो: रॉयटर्स) अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ मुकदमा (फोटो: रॉयटर्स)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 25 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 11:42 AM IST
  • ट्रंप प्रशासन ने टिकटॉक पर बैन लगा दिया है
  • टिकटॉक इसके खिलाफ अमेरिकी कोर्ट में गया
  • राष्ट्रपति ट्रंप सहित कई लोगों पर मुकदमा

चीनी ऐप TikTok ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा उसे बैन करने आदेश के खिलाफ मुकदमा ठोक दिया है. टिकटॉक ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि ट्रंप ने फिर से चुनाव जीतने के लिए चीन विरोधी हवा को आग देने के ऐसा किया है. 

यह मुकदमा लॉस एंजिलिस के फेडरल कोर्ट में किया गया है और इसमें प्रतिवादियों के रूप में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप, अमेरिकी वाणिज्य मंत्रालय और वाणिज्य मंत्री विल्बर रॉस का नाम है. 

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ट्रंप के आरोपों को खारिज किया 
TikTok और उसकी पेरेंट कंपनी बाइटडांस ByteDance ने राष्ट्रपति कार्यालय के इन आरोपों को खारिज किया है कि वह अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं. कंपनी ने कहा कि निजता की रक्षा और टिकटॉक के अमेरिकी यूजर्स के डेटा को सुरक्षित रखने के लिए कंपनी 'असाधारण उपाय' करती है.

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क्या कहा था ट्रंप ने 
गौरतलब है अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने 6 अगस्त के एक कार्यकारी आदेश में टिकटॉक पर बैन लगाते हुए कहा था कि 90 दिनों के भीतर वह या तो अपना कारोबार अमेरिका से समेट ले या अपना कारोबार किसी अमेरिकी कंपनी को बेच दे. 


क्या कहा टिकटॉक ने 
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक टिकटॉक ने कहा, '3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप दोबरा चुने जाने के लिए जो चीनी विरोधी व्यापक अभियान चला रहे हैं, वह इसी का हिस्सा है.' 


टिकटॉक ने कहा, 'सरकार के खिलाफ मुकदमे को हम सामान्य बात नहीं समझते, लेकिन हमारे अमेरिकी कारोबार को बैन करने का आदेश आया है, इसलिए हमारे पास कोई रास्ता नहीं था.' 


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बाइटडांस टिकटॉक के अमेरिकी कारोबार को बेचने के लिए अमेरिकी कंपनियों माइक्रोसॉफ्ट और oracle से बातचीत भी कर रही थी. 

गौरतलब है कि अमेरिकी प्रशासन ने यह आशंका जाहिर की थी कि टिकटॉक के द्वारा लोगों की गोपनीय जान​कारियां चीन की कम्युनिस्ट सरकार तक पहुंचाई जा रही हैं. निजता और सुरक्षा का हवाला देकर भारत में भी टिकटॉक को बैन किया जा चुका है. 

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