शेयर बाजार में गुरुवार को गिरावट आई है. इसकी सबसे बड़ी वजह आईटी कंपनियों के शेयरों में आई बड़ी गिरावट है. भारतीय आईटी स्टॉक्स इंफोसिस, टीसीएस से लेकर विप्रो और एचसीएलटेक के शेयर बुरी तरह टूटे हैं. गुरुवार को इन शेयरों में 5 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिली, जिस कारण इन कंपनियों के मार्केट कैप से एक लाख करोड़ रुपये कम हो गए.
इंफोसिस के शेयर 5.18 फीसदी गिरकर 1396 रुपये प्रति शेयर के निचले स्तर पर पहुंच गए. TCS के शेयर 4.58 फीसदी गिरकर 2776 रुपये पर आ गए. HCL टेक के शेयर 4.55 फीसदी गिरकर 1480.50 रुपये पर आ गए. विप्रो के शेयर 3.76 फीसदी टूटकर 221.10 रुपये पर आ गए. टेक महिंद्रा के शेयर भी 4.84 प्रतिशत गिरकर 1,555 रुपये पर आ गए.
1 लाख करोड़ रुपये साफ
इंट्राडे के दौरान इन पांच कंपनियों के शेयरों का मार्केट कैपिटलाइजेशन 2,37,1285 करोड़ रुपये रहा, जबकि बुधवार को यह 2,47,1656 करोड़ रुपये था. इसका मतलब है कि एक दिन में इन पांचों कंपनियों से 1,00,372 करोड़ रुपये कम हुए हैं.
क्यों आई इन शेयरों में गिरावट?
अमेरिकी बाजार में इंफोसिस, विप्रो और कॉग्निजेंट के एडीआर में रातोंरात 5 प्रतिशत तक की गिरावट आई थी, जिसकी वजह से गुरुवार को भारतीय बाजार में भी गिरावट आई है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिकी बाजारों में उथल-पुथल मची हुई है, क्योंकि उच्च बीटा और उच्च अस्थिरता वाले शेयरों जैसे कि भीड़भाड़ में शीर्ष पर रहने वाले शेयरों में भारी गिरावट देखी जा रही है.
उनका यह भी कहना है कि एंथ्रोपिक द्वारा विशेष क्लाउड कोवर्क प्लगइन्स के लॉन्च से अमेरिका में सॉफ्टवेयर कंपनियों के शेयरों में बिकवाली हावी हुई है. निवेशकों के बीच ऐसी आशंकाएं हैं कि AI सॉफ्टवेयर इन आईटी कंपनियों के बिजनेस मॉडल को पूरी तरह से खत्म कर सकता है, जिस कारण निवेशक इन कंपनियों के शेयर तेजी से बेच रहे हैं. इसके साथ ही SaaS, कंसल्टिंग और डेटा एनालिटिक्स शेयरों में भी अंधाधुंध बिकवाली हुई है.
सालों का काम हफ्तों में
एक रिपोर्ट में निर्मल बैंग ने कहा कि पैलेंटिर और एंथ्रोपिक ने समय और वर्कफ़्लो इकोनॉमी पर अटैक करके कीमतों में बदलाव को तेज कर दिया है. इसमें कहा गया है कि पैलेंटिर का यह दावा कि SAP ECC से S4 में माइग्रेशन वर्षों के बजाय हफ्तों में पूरा किया जा सकता है. सीधे तौर पर समय अवधि, श्रम तीव्रता और ग्राहक जुड़ाव को कम करता है.
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार का कहना है कि अमेरिका में टॉप भारतीय आईटी कंपनियों के एडीआर में आई तेज गिरावट से संकेत मिलता है कि भारतीय आईटी क्षेत्र को संघर्ष करना पड़ेगा. आईटी से अन्य क्षेत्रों में निवेश बढ़ने से अच्छा प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों के शेयरों को मदद मिलेगी.
टीसीएस का सबसे बुरा हाल
कभी टीसीएस मार्केट कैप के हिसाब से भारत की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी हुआ करती थी, लेकिन अब ये भारत की 5वीं कंपनी बन चुकी है. एक दिन पहले SBI ने टीसीएस को पीछे छोड़ा था और अब ये ICICI बैंक से भी पीछे चली गई है. अब TCS का मार्केट कैप 10.03 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि ICICI Bank का मार्केट कैप 10.16 लाख करोड़ रुपये है और एसबीआई का मार्केट कैप 11 लाख करोड़ रुपये के पार चला गया है.
(नोट- किसी भी शेयर में निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें.)
आजतक बिजनेस डेस्क