प्‍याज-टमाटर के साथ अब सोना-चांदी... RBI ने लिया ये बड़ा फैसला, क्‍या कम होंगे दाम?

RBI ने गोल्‍ड और सिल्‍वर की कीमतों को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है, जो अब एक फ्रेमवर्क लिस्‍ट के तहत रखे जाएंगे. इस लिस्‍ट में आलू-टमाटर और प्‍याज को भी रखा गया है.

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सोने और चांदी को लेकर आरबीआई का बड़ा फैसला (Photo: Getty/RBI) सोने और चांदी को लेकर आरबीआई का बड़ा फैसला (Photo: Getty/RBI)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्‍ली,
  • 06 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:50 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक के एमपीएसी बैठक के तहत शुक्रवार को कई बड़े फैसले लिए गए, जिसमें सबसे खास फैसला रेपो रेट को लेकर था. आरबीआई ने रेपो रेट को अनचेंज रखा है, जिसका मतलब है कि अब आपके लोन की ईएमआई नहीं बढ़ेगी. वहीं आरबीआई ने एमएसएमई बिजनेस के लिए लोन का अमाउंट बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिया. 

इन सबके अलावा, RBI ने सोने और चांदी को लेकर भी एक बड़ा फैसला लिया है. रिजर्व बैंक ने कहा कि इनफ्लेशन मॉनिटरी फ्रेमवर्क (महंगाई निगरानी ढांचा) प्याज और टमाटर जैसी पारंपरिक रूप से निगरानी की जाने वाली वस्तुओं के साथ-साथ सोने और चांदी की कीमतों को भी इसमें शामिल किया है. 

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सोने और चांदी की ऊंची कीमतों ने केंद्रीय बैंकों को इसे महंगाई निगराी दायरे में शामिल करने के लिए प्रेरित किया है. बाजार विश्लेषकों का मानना ​​है कि इस कदम का उद्देश्य ग्‍लोबल प्राइस में बदलाव और घरेलू उपभोग से अत्यधिक प्रभावित अर्थव्यवस्था में महंगाई के दबावों का अधिक व्यापक आकलन प्रदान करना है. इससे सोने-चांदी की कीमतों पर कोई असर नहीं होगा.

महंगाई दर 
CPI के आधार पर मापी जाने वाली मूल महंगाई, जिसमें खाद्य और ईंधन को शामिल नहीं  किया जाता है, कीमती धातुओं की बढ़ती कीमतों के बावजूद नियंत्रण में बनी हुई है. दिसंबर के आंकड़ों से पता चलता है कि सोने और चांदी को छोड़कर महंगाई दर 2.6 फीसदी पर स्थिर है, जो दिखाता है कि महंगाई कंट्रोल में है. 
 
आरबीआई ने चेतावनी दी है कि भू-राजनीतिक जोखिम, ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता और मौसम में बदलाव से आने वाले महीनों में महंगाई में ग्रोथ का खतरा पैदा हो सकता है. प्रतिकूल आधार प्रभाव के कारण 2025-26 के अंत तक सालाना आधार पर महंगाई में वृद्धि हो सकती है, भले ही कुल महंगाई की ग्रोथ गति धीमी दिखाई दे. केंद्रीय बैंक इन कारकों पर लगातार नजर रख रहा है और वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता को देखते हुए सतर्कता के महत्व पर जोर दे रहा है.

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सोने और चांदी की कीमतें
पिछले एक साल में सोने और चांदी की कीमतों में काफी वृद्धि हुई है, जिसे वैश्विक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनावों ने और बल दिया है. कीमती धातुओं की कीमतों में इस उछाल का कारण अमेरिकी डॉलर का कमजोर होना, वास्तविक ब्याज दरों के नकारात्मक बने रहने की आशंका और भू-राजनीतिक और वित्तीय जोखिमों को लेकर निवेशकों की बढ़ती चिंता जैसे कारक हैं . 

बात दें शुक्रवार को शाम 5 बजे एमसीएक्‍स पर सोने का भाव 1000 रुपये चढ़कर 1.53 लाख रुपये हो गए थे. वहीं चांदी की कीमतें 3000 रुपये गिरकर 240540 रुपये पर थीं. 

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