वित्त मंत्रालय ने कहा कि जीएसटी से कारोबारियों को काफी फायदा है और सरकार ने काफी सहूलियतें दी हैं. कारोबारियों को बड़ी राहत देते हुए 40 लाख रुपये सालाना तक के टर्नओवर वाले कारोबार को जीएसटी से मुक्त कर दिया गया है. वित्त मंत्रालय ने जीएसटी से कारोबार जगत के फायदे को लेकर अपनी उपलब्धियां गिनाई हैं.
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गौरतलब है कि 27 अगस्त को जीएसटी कौंसिल की 41वीं बैठक होने वाली है. वित्त मंत्रालय ने कहा कि सरकार ने 1.5 करोड़ रुपये तक के सालाना टर्नओवर वाले कारोबार को कम्पोजिट स्कीम का चुनाव कर सिर्फ 1 फीसदी टैक्स देने का विकल्प दिया है. गौरतलब है कि अरुण जेटली के वित्त मंत्री रहने के दौरान ही साल 2019 की जनवरी में गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स कौंसिल ने छोटे कारोबारियों को बड़ा तोहफा दिया था. 40 लाख रुपये तक के सालाना टर्नओवर वाली कंपनियों को जीएसटी रजिस्ट्रेशन से मुक्ति दे दी गई.
पहले यह सीमा 20 लाख रुपये की थी. इसी तरह जीएसटी काउंसिल ने पूर्वोत्तर एवं पहाड़ी राज्यों की कंपनियों के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन से छूट की सीमा 10 लाख रुपये से दोगुना कर 20 लाख रुपये सालना टर्नओवर करने का ऐलान किया था.
क्या कहा वित्त मंत्रालय ने
वित्त मंत्रालय ने एक ट्वीट में कहा, 'फिलहाल सिर्फ कुछ लग्जरी और अन्य गैरजरूरी सामान पर ही 28 फीसद की जीएसटी का ऊंचा टैक्स लगाया गया है. पहले 230 आइटम पर 28 फीसदी टैक्स था जिसे घटाकर सिर्फ 30 आइटम तक कर दिया गया है. बाकी 200 आइटम को और कम टैक्स वाले स्लैब में लाया गया है.'
निर्माण क्षेत्र को भी राहत
इसी तरह निर्माण क्षेत्र, खासकर हाउसिंग सेक्टर को भी कई राहत दी गई है. इस सेक्टर के लिए अब जीएसटी रेट सिर्फ 5 फीसदी है. यही नहीं अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए जीएसटी को सिर्फ 1 फीसदी कर दिया गया है.
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टैक्सपेयर बेस बढ़ा
वित्त मंत्रालय ने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद टैक्सपेयर बेस दोगुना हो गया है. शुरुआत में जीएसटी के तहत आने वाले एसेसी यानी कारोबारी करीब 65 लाख थे, अब यह संख्या बढ़कर 1.24 करोड़ तक पहुंच गई है.
वित्त मंत्रालय ने कहा कि जीएसटी की सभी प्रक्रियाएं पूरी तरह से ऑटोमेटेड हैं. अब तक 50 करोड़ रिटर्न ऑनलाइन फाइल हो चुके हैं और 131 करोड़ ई-वे बिल जनरेट हुए हैं.
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