इंडेक्सेशन क्या है? समझिए फॉर्मूला, कभी भी घर-जमीन बेचने पर नहीं होगा TAX का झोल

हमारे देश में तमाम ऐसे लोग हैं, जो निवेश के नजरिये से प्रॉपर्टी में पैसे लगाते हैं, और लंबी अवधि के बाद बेचते हैं, जिसपर मुनाफा होता है. इसी प्रॉफिट पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स लगता है. लेकिन इंडेक्सेशन की वजह टैक्स राशि बहुत कम हो जाती है.

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इंडेक्सेशन की वजह से टैक्स में भारी बचत. (Photo: ITG) इंडेक्सेशन की वजह से टैक्स में भारी बचत. (Photo: ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 31 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:04 PM IST

इंडेक्सेशन (Indexation) को लेकर लोग हमेशा कंफ्यूज रहते हैं, क्योंकि नियम थोड़ी कठिन है. लेकिन आज हम आपको इसे आसान तरीके से समझाते हैं. दरअसल, जब कोई शख्स घर, जमीन, सोना या डेट म्यूचुअल फंड जैसे एसेट्स को लंबे समय के बाद बेचता है तो उसपर मुनाफा भी होता है.

देश में तमाम ऐसे लोग हैं, जो निवेश के नजरिये से प्रॉपर्टी में पैसे लगाते हैं, और लंबी अवधि के बाद तगड़ा प्रॉफिट भी बनाते हैं.  इसी प्रॉफिट पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स लगता है. 

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लेकिन सरकार यह भी मानती है कि किसी एसेट की कीमत बढ़ने के पीछे सिर्फ मुनाफा नहीं, बल्कि महंगाई (Inflation) भी एक बड़ी वजह होती है. इसी महंगाई के असर को कम करने के लिए टैक्स कानून में इंडेक्सेशन की सुविधा दी गई है. इंडेक्सेशन एक टैक्स से जुड़ा फायदा है, जिससे महंगाई (Inflation) का असर घटाकर कैपिटल गेन टैक्स कम किया जाता है.

इंडेक्सेशन के क्या फायदे

इंडेक्सेशन के तहत एसेट की खरीद कीमत को Cost Inflation Index (CII) के अनुसार बढ़ाकर माना जाता है. इससे टैक्स के लिए जो लाभ (Capital Gain) निकलता है, वह कम हो जाता है और टैक्स का बोझ घटता है. यह सुविधा खासतौर पर प्रॉपर्टी, सोना और डेट म्यूचुअल फंड जैसे निवेशों में मिलती है. हालांकि शेयर और इक्विटी म्यूचुअल फंड में इंडेक्सेशन का लाभ नहीं मिलता है.
 
आइए एक आसान उदाहरण से समझते हैं, मान लीजिए किसी व्यक्ति ने साल 2015 में एक घर 50 लाख रुपये में खरीदा था. करीब 10 साल के बाद 2024 में उसे करीब 90 लाख रुपये में बेच दिया गया. अगर साधारण तरीके से देखें तो इसमें 40 लाख रुपये का मुनाफा दिखता है. अगर इंडेक्सेशन की सुविधा न होती, तो फिर पूरा 40 लाख रुपये टैक्सेबल माना जाता.

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बिना इंडेक्सेशन के 40 लाख रुपये पर 20% LTCG टैक्स लगता, यानी टैक्स (40 लाख × 20%= 8 लाख रुपये) बनता है. इसके ऊपर 4% सेस अलग से देना पड़ता. यानी कुल टैक्स और भी बढ़ जाता. 

इंडेक्सेशन का फॉर्मूला

लेकिन इंडेक्सेशन के साथ तस्वीर बदल जाती है. मान लें कि 2015 का CII 254 था और 2024 में CII बढ़कर 348 हो गया. अब यहां इंडेक्सेशन रूल लागू होगा... 50 × (348/254)- 68.5 लाख रुपये, यानी इंडेक्सेशन के साथ घर की कीमत 68.5 लाख रुपये होती है. 

टैक्सेबल कैपिटल गेन (90 लाख– 68.5 लाख= 21.5 लाख रुपये) होगा. इसपर 20% LTCG टैक्स लगेगा, जो करीब 4.3 लाख रुपये बैठता है. साफ है कि इंडेक्सेशन की वजह से टैक्स लगभग आधा रह गया. क्योंकि बिना इंडेक्सेशन टैक्स 8 लाख रुपये ज्यादा लग रहा था.

अगर इंडेक्सेशन की सुविधा न हो, तो निवेशकों पर टैक्स का बोझ काफी बढ़ जाता. इंडेक्सेशन न सिर्फ महंगाई के असर को संतुलित करता है, बल्कि लॉन्ग टर्म निवेश को भी प्रोत्साहित करता है. यही वजह है कि प्रॉपर्टी और डेट जैसे निवेशों में इंडेक्सेशन को एक बड़ा टैक्स लाभ माना जाता है.

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