बजट: बिटक्वॉइन जैसी क्रिप्टो करेंसी पर सरकार की रोक, उठाएगी ये खास कदम

वित्त मंत्री ने अपनी बजट घोषणा में कहा कि सरकार क्रिप्टो करेंसी को लीगल टेंडर नहीं मानती है. सरकार चाहती है कि इस करेंसी का प्रयोग कम हो और जो लोग इस करेंसी के जरिए गैरकानूनी काम कर रहे हैं, उसे कम किया जा सके.

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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

भारत सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 01 फरवरी 2018,
  • अपडेटेड 1:08 PM IST

क्रिप्टो करेंसी यानी बिटक्वॉइन के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आम बजट में खास घोषणा की है. सरकार के इस कदम पर काफी लोगों की नजरें लगी हुई थीं. हाल ही के समय में बिटकॉइन खरीदने का चलन काफी बढ़ा है.

वित्त मंत्री ने अपनी बजट घोषणा में कहा कि सरकार क्रिप्टो करेंसी को लीगल टेंडर नहीं मानती है. सरकार चाहती है कि इस करेंसी का प्रयोग कम हो और जो लोग इस करेंसी के जरिए गैरकानूनी काम कर रहे हैं, उसे कम किया जा सके.

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अरुण जेटली ने आम बजट 2018 कहा कि क्रिप्टो करेंसी का सभी तरह का इस्तेमाल रोकने के लिए सरकार सभी तरह के भुगतान में ब्लॉकचेन तकनीक इस्तेमाल भी करेगी. इसका मकसद डिजिटल इकोनॉमी को बढ़ाना होगा. इससे पहले भी सरकार ने क्रिप्टो करेंसी के जरिए लेनदेन पर निगरानी रखने का इंतजाम किया था.

निगरानी रखने का इंतजाम कर चुकी है सरकार

केंद्र सरकार ने इस करंसी को लेकर  इंस्‍टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) को ऑडिटिंग रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा था.  

आईसीएआई के डिजिटल अकाउंटिंग और एश्यारेंस स्‍टैंडर्ड बोर्ड के सदस्‍य देबाशीस मित्रा ने बताया था कि कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी थी. उन्होंने बताया कि आईसीएआई ने एक पैनल गठ‍ित कर दिया है और संभवत: यह 31 मार्च तक अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप देगा.

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म‍ित्रा ने बताया था कि ऑडिटिंग के दौरान यह देखा जाएगा कि आख‍िर इस करंसी को कैसे फाइनेंश‍ियल स्टेटमेंट में द‍िखाया जाए. उनके मुताबिक भारतीय कंपनियों की तरफ से बिटक्वॉइन में किए जा रहे लेनदेन का डाटा मौजूदा समय में न के बराबर मौजूद है. ऐसे में ऑड‍िटिंग के दौरान यह देखा जाएगा कि कैसे बिटक्वॉइन में लेनदेन को उनके वित्तीय लेनदेन में शामिल किया जाए.

क्या होती है डिजिटल करेंसी?

डिजिटल करेंसी इंटरनेट पर चलने वाली एक वर्चुअल करेंसी हैं. इंटरनेट पर इस वर्चुअल करेंसी की शुरुआत जनवरी 2009 में बिटक्वॉइन के नाम से हुई थी. इस वर्चुअल करेंसी का इस्तेमाल कर दुनिया के किसी कोने में किसी व्यक्ति को पेमेंट किया जा सकता है और सबसे खास बात यह है कि इस भुगतान के लिए किसी बैंक को माध्यम बनाने की भी जरूरत नहीं पड़ती.

कैसे काम करती है ये डिजिटल करेंसी?

बिटक्वॉइन का इस्तेमाल पीयर टू पीयर टेक्नोलॉजी पर आधारित है. इसका मतलब कि बिटक्वॉइन की मदद से ट्रांजैक्शन दो कंप्यूटर के बीच किया जा सकता है. इस ट्रांजैक्शन के लिए किसी गार्जियन अथवा सेंटरेल बैंक की जरूरत नहीं पड़ती. बिटकॉइन ओपन सोर्स करेंसी है जहां कोई भी इसकी डिजाइन से लेकर कंट्रोल को अपने हाथ में रख सकता है.

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इस माध्यम से ट्रांजैक्शन कोई भी कर सकता है क्योंकि इसके लिए किसी तरह की रजिस्ट्रेशन अथवा आईडी की जरूरत नहीं पड़ती. इस माध्यम से ट्रांजैक्शन की तमाम ऐसी खूबिया है जो मौजूदा समय में कोई बैंकिंग ट्रांजैक्शन नहीं देती.

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