बिहार पुलिस ने नाबालिगों और किशोर पीड़ितों के खिलाफ होने वाले अपराधों की रिपोर्टिंग के संबंध में वैधानिक सूचना जारी की है. यह निर्देश प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल मीडिया और सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स और यूट्यूब चैनलों के लिए जरूरी है. जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 की धारा 74 और पॉक्सो एक्ट 2012 की धारा 23 के तहत किसी भी पीड़ित बच्चे की पहचान प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उजागर करना एक दंडनीय अपराध है.
पुलिस ने पीड़ित का नाम, फोटो, वीडियो, माता-पिता का नाम, पता, स्कूल या सोशल मीडिया प्रोफाइल प्रकाशित करने पर पूरी तरह रोक लगा दी है. पहचान बताने वाले किसी भी संकेत, स्केच या आवाज का प्रसारण भी प्रतिबंधित है.
नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित शख्स या संस्थान के खिलाफ आईटी एक्ट और अन्य कानूनों के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई, कारावास और जुर्माना सुनिश्चित किया जाएगा.
क्या प्रकाशित करना है सख्त मना?
पुलिस ने कहा है कि न्यूज रिपोर्ट, वीडियो, रील, थंबनेल या डिबेट में पीड़ित की पहचान गुप्त रखनी होगी. पीड़ित का नाम, फोटो, वीडियो, स्कूल का नाम, मोहल्ला या ऐसी कोई भी जानकारी जिससे उसकी पहचान हो सके, साझा करना वर्जित है. यहां तक कि पीड़ित की आवाज या स्केच का इस्तेमाल भी कानूनन अपराध की श्रेणी में आएगा.
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कानूनी परिणाम और मीडिया को निर्देश
नियमों की अनदेखी करने पर संस्थान और शख्स दोनों जिम्मेदार होंगे. दोषी पाए जाने पर जेल की सजा और जुर्माना भरना पड़ सकता है. पुलिस ने सभी मीडिया माध्यमों को निर्देश दिया है कि वे बच्चे की गरिमा और गोपनीयता का सम्मान करें. किसी भी अपुष्ट या सनसनीखेज सामग्री को प्रसारित न करने की हिदायत दी गई है, जिससे कानूनी अनुपालन सुनिश्चित हो सके.
रोहित कुमार सिंह