बिहार: SDO पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाने वाले BDO हो गए सस्पेंड, ये है पूरा मामला

बिहार के कटिहार जिले में तैनात बरसोई प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) हरिओम शरण को मंगलवार को निलंबित कर दिया गया. उन्होंने कुछ दिन पहले विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) के दौरान एक वरिष्ठ अधिकारी पर उत्पीड़न का आरोप लगाया था.

Advertisement
प्रशासन की छवि खराब करने की कोशिश का आरोप- (Photo: Representational) प्रशासन की छवि खराब करने की कोशिश का आरोप- (Photo: Representational)

aajtak.in

  • कटिहार,
  • 15 जुलाई 2025,
  • अपडेटेड 11:28 PM IST

बिहार के कटिहार जिले में तैनात बरसोई प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) हरिओम शरण को मंगलवार को निलंबित कर दिया गया. उन्होंने कुछ दिन पहले विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) के दौरान एक वरिष्ठ अधिकारी पर उत्पीड़न का आरोप लगाया था.

कटिहार जिला प्रशासन द्वारा जारी बयान में बताया गया कि जिलाधिकारी मनीष कुमार मीणा ने निलंबन का आदेश जारी किया है. जिलाधिकारी ने कहा कि हरिओम शरण को कारण बताओ नोटिस भेजा गया था, लेकिन उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया.

Advertisement

प्रशासन की छवि खराब करने की कोशिश का आरोप
बयान में यह भी कहा गया कि शरण ने सोशल मीडिया और समाचार पत्रों के जरिए सरकार और प्रशासन की छवि खराब करने की कोशिश की, जो एक सरकारी कर्मचारी के आचरण के खिलाफ है. इसलिए उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी.

BDO ने लगाया था मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप 
हरिओम शरण ने पिछले सप्ताह यह आरोप लगाया था कि संबंधित एसडीओ (अनुविभागीय अधिकारी) उन्हें मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण अभियान में लक्ष्य पूरा करने के लिए मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं. इसी वजह से उन्होंने इस्तीफा देने का दावा किया था.

उनका यह कथित इस्तीफा सोशल मीडिया पर वायरल भी हुआ था, लेकिन जिलाधिकारी मनीष कुमार मीणा ने सोमवार को पीटीआई को बताया कि उन्हें ऐसा कोई इस्तीफा आधिकारिक रूप से नहीं मिला है. साथ ही उन्होंने यह भी जानकारी दी थी कि शरण ने बाद में माफी मांगकर फिर से ड्यूटी ज्वाइन कर ली थी.

Advertisement

बिना अनुमति के मीडिया में बयान दिया
अब प्रशासन ने यह साफ कर दिया है कि नियमों और सरकारी सेवा के आचरण के उल्लंघन को गंभीरता से लिया जाएगा. BDO हरिओम शरण पर सोशल मीडिया के ज़रिए बदनाम करने और बिना अनुमति के मीडिया में बयान देने का आरोप है, जो सेवा नियमों के विरुद्ध है. प्रशासन ने कहा है कि आगे की विभागीय कार्रवाई नियमों के तहत पूरी पारदर्शिता से की जाएगी.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement