बिहार ने आर्थिक मोर्चे पर पकड़ी रफ्तार... विकास दर 13% के पार, GSDP और प्रति व्यक्ति आय में भी आया रिकॉर्ड उछाल

बिहार ने आर्थिक मोर्चे पर मजबूत पकड़ बना ली है और रफ्तार पकड़ ली है. विकास दर 13 फीसदी से ज्यादा हो गई है. इसके अलावा, GSDP और प्रति व्यक्ति आय में भी बड़ा उछाल आया है. बिहार अब देश के तेजी से बढ़ते राज्यों में शामिल हो गया है.

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आर्थिक मोर्चे पर बिहार ने मजबूत पकड़ बना ली. (Photo- PTI) आर्थिक मोर्चे पर बिहार ने मजबूत पकड़ बना ली. (Photo- PTI)

रोहित कुमार सिंह

  • पटना,
  • 08 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:12 AM IST

बिहार की आर्थिक रफ्तार तेज बनी हुई है. वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य की विकास दर 13 प्रतिशत के पार पहुंच गई है. योजना एवं विकास विभाग की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में विभागीय मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि राज्य का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) लगातार बढ़ रहा है, जो बिहार की मजबूत होती अर्थव्यवस्था का संकेत है.

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मंत्री ने बताया कि वर्तमान मूल्य पर वित्तीय वर्ष 2024-25 में जीएसडीपी की वार्षिक वृद्धि दर 13.09 प्रतिशत रही है, जबकि स्थिर मूल्य (2011-12) पर यह 8.64 प्रतिशत दर्ज की गई है. इसी अवधि में प्रति व्यक्ति आय वर्तमान मूल्य पर 76,490 रुपये और स्थिर मूल्य पर 40,973 रुपये रही है.

मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना में 72 हजार से अधिक योजनाएं पूर्ण

मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के अंतर्गत 17वीं बिहार विधानसभा और विधान परिषद के सदस्यों ने वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 के दौरान कुल 5,088 करोड़ रुपये की योजनाओं की अनुशंसा की. इसके मुकाबले 3,633 करोड़ रुपये खर्च कर 72,206 योजनाएं पूर्ण की जा चुकी हैं, जबकि 17,621 योजनाओं पर कार्य प्रगति पर है.

मंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2023-24 से प्रति विधानमंडल सदस्य की वार्षिक अनुशंसा राशि को 3 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 4 करोड़ रुपये कर दिया गया है.

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सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना में करोड़ों की लागत से कार्य

विभागीय उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया गया कि सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) के तहत 18वीं लोकसभा के सांसदों की अनुशंसा पर नवंबर 2025 तक स्वीकृत 2,456 योजनाओं में से 1,108 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जिन पर 117 करोड़ 64 लाख रुपये खर्च किए गए हैं.

वहीं, 17वीं लोकसभा के दौरान स्वीकृत 13,093 योजनाओं में से 12,190 योजनाएं पूरी हुईं, जिन पर 621 करोड़ 90 लाख रुपये का व्यय हुआ. राज्यसभा सांसदों की अनुशंसा पर वित्तीय वर्ष 2014-15 से 2025-26 तक स्वीकृत 3,792 योजनाओं में से 2,914 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि 868 योजनाओं पर कार्य जारी है.

स्वयं सहायता भत्ता योजना पर 1,267 करोड़ रुपये खर्च

मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना के तहत 2 अक्टूबर 2016 से 31 दिसंबर 2025 तक 12वीं या समकक्ष परीक्षा पास 8 लाख 76 हजार 473 युवाओं को भत्ता प्रदान किया गया है. इस पर कुल 1,267 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं.

इसके अलावा, 1 अक्टूबर 2025 से स्नातक उत्तीर्ण युवाओं को भी इस योजना के दायरे में लाया गया है. 31 दिसंबर 2025 तक 31,006 स्नातक युवाओं को भत्ता दिया गया, जिस पर 3 करोड़ 10 लाख रुपये खर्च किए गए हैं.

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लोक वित्त समिति और भवन निर्माण योजनाएं

लोक वित्त समिति के समक्ष वित्तीय वर्ष 2024-25 में 586 योजनाओं की अनुशंसा की गई, जिनकी अनुमानित लागत 1 लाख 38 हजार 811 करोड़ रुपये है. वहीं, वित्तीय वर्ष 2025-26 में दिसंबर 2025 तक 357 योजनाओं की अनुशंसा की गई, जिनकी लागत 1 लाख 68 हजार 870 करोड़ रुपये आंकी गई है.

इसके अलावा, षष्ठम राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा पर 2,000 पंचायत सरकार भवनों के निर्माण को प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है. इनमें से 1,960 भवनों के लिए निविदा प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. ई-किसान भवन योजना के तहत स्वीकृत 210 योजनाओं में से 186 भवनों का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है.

मंदिर और कब्रिस्तान घेराबंदी योजना अंतिम चरण में

राज्य में मंदिर और कब्रिस्तान की घेराबंदी का कार्य भी लगभग पूर्ण हो चुका है. बिहार मंदिर चाहरदीवारी निर्माण योजना के तहत स्वीकृत 654 योजनाओं में से 538 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं. वहीं, कब्रिस्तान घेराबंदी योजना के तहत 4,289 योजनाओं में से 3,893 योजनाओं का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है.

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