दीपावली की रात तीन कत्ल! बेगूसराय ट्रिपल मर्डर में सीरियल किलर विकास कुमार को कोर्ट ने सुनाई मौत की सजा

बेगूसराय ट्रिपल मर्डर मामले में एडीजे-3 न्यायालय ने आरोपी विकास कुमार को फांसी की सजा सुनाई है. 27 अक्टूबर 2019 को दीपावली की रात उसने भाई कुणाल कुमार, भाभी कंचन देवी और भतीजी सोनम कुमारी की गोली मारकर हत्या की थी. भतीजे शिवम पर भी फायर किया, जो बच गया. अदालत ने अपराध को हिनियस क्राइम मानते हुए मौत की सजा दी.

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आरोपी विकास कुमार.(Photo: Saurabh Kumar/ITG) आरोपी विकास कुमार.(Photo: Saurabh Kumar/ITG)

सौरभ कुमार

  • बेगूसराय,
  • 12 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:01 PM IST

बेगूसराय में चर्चित ट्रिपल मर्डर मामले में अदालत ने गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाया है. एडीजे-3 के न्यायाधीश ब्रजेश कुमार सिंह ने आरोपी विकास कुमार को फांसी की सजा दी है. अदालत ने इस वारदात को “हिनियस क्राइम” यानी बेहद जघन्य और दुर्लभ अपराध करार दिया. विकास कुमार को बेऊर जेल से बेगूसराय जेल लाया गया था और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई के बाद सजा सुनाई गई.

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दरअसल, यह मामला दीपावली की रात 27 अक्टूबर 2019 का है. उस रात विकास कुमार ने अपने ही घर में घुसकर अपने भाई कुणाल कुमार, भाभी कंचन देवी और भतीजी सोनम कुमारी की गोली मारकर हत्या कर दी थी. इस घटना ने पूरे इलाके को दहला दिया था.

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भतीजे पर भी चलाई गोली, बच गई जान

वारदात के दौरान विकास कुमार ने अपने भतीजे शिवम कुमार पर भी पिस्टल से फायरिंग की. शिवम के अनुसार, आरोपी ने उस पर दो बार गोली चलाई, लेकिन कारतूस खत्म हो गया और एक गोली मिस फायर हो गई. इसी वजह से उसकी जान बच सकी. शिवम ने भागकर अपनी जान बचाई और उसी के आवेदन पर मामला दर्ज हुआ था.

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शिवम ने बताया कि वह घर के बाहर था. गोली की आवाज सुनकर अंदर पहुंचा तो देखा कि उसके माता-पिता और बहन को गोली मारी जा रही थी. आरोपी ने उसे भी मारने की कोशिश की, लेकिन गोली खत्म होने के कारण वह बच गया. बाद में मौसा और अन्य लोगों को आता देख आरोपी वहां से भाग गया.

पहले भी कर चुका था दो हत्याएं

जांच में सामने आया कि विकास कुमार पहले भी अपने परिवार के दो लोगों की हत्या कर चुका था. नवंबर 2012 में उसने अपने चाचा अरुण कुमार को घर पर गोली मारकर हत्या कर दी थी. इस मामले में उसे आजीवन कारावास की सजा मिली थी. लेकिन उसने हाई कोर्ट से फर्जी जमानत के कागजात लगाकर जेल से बाहर आने में सफलता पा ली.

जेल से बाहर आने के बाद जून 2017 में उसने अपनी चाची मनी देवी की भी घर के दरवाजे पर गोली मारकर हत्या कर दी. यह मामला एडीजे-4 की अदालत में चल रहा है. इसके बाद 2019 में उसने अपने भाई, भाभी और भतीजी की हत्या कर दी. इन सभी हत्याओं के पीछे जमीन विवाद और संपत्ति हड़पने की मंशा बताई गई.

छह गवाहों की गवाही पर फैसला

सरकारी वकील राम प्रकाश यादव ने बताया कि सत्रवाद संख्या 465/21 में अदालत ने छह गवाहों की गवाही सुनी. सभी गवाहों ने घटना का समर्थन किया. अदालत ने इसे रेयर केस मानते हुए मौत की सजा सुनाई. वकील ने कहा कि ऐसा मामला कम ही देखने को मिलता है, जिसमें कोई व्यक्ति अपने चाचा, चाची, भाई, भाभी और भतीजी की हत्या कर दे.

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उन्होंने कहा कि समाज में ऐसे व्यक्ति का रहना कलंक है. इसी आधार पर न्यायालय ने सख्त फैसला सुनाया. ट्रिपल मर्डर के चार दिन बाद पुलिस ने विकास कुमार को देवघर से गिरफ्तार किया था.

पीड़ित परिवार ने जताई संतुष्टि

मृतक के बेटे शिवम कुमार ने अदालत के फैसले पर संतोष जताया. उसने कहा कि उसके अंकल ने जमीन के लालच में उसके माता-पिता और बहन की हत्या कर दी. उनका मानना था कि अगर परिवार के पांच लोग खत्म हो जाएंगे तो पूरी संपत्ति उस पर कब्जा कर लेंगे.

शिवम ने कहा कि अदालत ने जो फैसला दिया है, उससे उन्हें न्याय मिला है. हालांकि आरोपी उनका सगा चाचा है, लेकिन उसके किए अपराध के लिए सजा मिलना जरूरी था. फांसी की सजा मिलने के बाद पीड़ित परिवार ने राहत और संतोष जाहिर किया है.

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