कहानी छोटी है, लेकिन असर गहरा है. आज यूनियन बजट पेश करने के साथ सरकार ने ग्रीन एनर्जी को बड़ा बूस्ट देने की तैयारी की है. लिथियम आयन बैटरी से लेकर बायोगैस वाली सीएनजी तक, सबको एक साथ राहत दे दी गई. मतलब ये कि अब बिजली से चलने वाली गाड़ियां, क्लीन फ्यूल और देश में बनने वाली बैटरियों को लेकर सरकार ने कुछ अहम ऐलान किए हैं. इन फैसलों का सीधा फायदा देश में बैटरी मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और बायोगैस बेस्ड फ्यूल को मिलेगा.
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारण ने आज बजट पेश करते हुए कहा कि, लिथियम आयन (Lithiom ion) सेल बनाने में इस्तेमाल होने वाले कैपिटल गुड्स पर बेसिक कस्टम ड्यूटी छूट को अगले फाइनेंशियल ईयर (वित्त वर्ष) तक के लिए बढ़ा दिया गया है. इससे देश में बैटरी निर्माण करने वाली कंपनियों की लागत घटेगी और नए निवेश को बढ़ावा मिलेगा. यह कदम इलेक्ट्रिक व्हीकल और ऊर्जा भंडारण सेक्टर के लिए काफी अहम माना जा रहा है.
आमतौर पर किसी भी इलेक्ट्रिक वाहन में बैटरी की कॉस्टिंग सबसे ज्यादा (तकरीबन 40 प्रतिशत) तक होती है. सरकार के इन फैसलों से बैटरी की लागत कम होगी, जिसका असर भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतों पर भी देखने को मिलेगा.
वित्त मंत्री ने बायोगैस ब्लेंडेड सीएनजी को लेकर भी अहम घोषणा की. उन्होंने कहा कि बायोगैस मिक्स सीएनजी पर सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी का कैल्कुलेशन करते समय बायोगैस के प्राइस को बाहर रखा जाएगा. इससे इस ग्रीन फ्यूल की कीमत कम हो सकती है और इसका इस्तेमाल बढ़ेगा. यानी आप सस्ती सीएनजी गैस की उम्मीद कर सकते हैं.
ये सभी प्रस्ताव सरकार की पहले से चल रही पॉलिसी को और बेहतर करने में मदद करेंगे. खासतौर पर एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल बैटरी के लिए शुरू की गई प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव योजना (PLI) के तहत देश में बैटरी मैन्युफैक्चरिंग का मजबूत इकोसिस्टम तैयार होगा. सरकार का मानना है कि इन फैसलों से भारत क्लीन एनर्जी और नई तकनीक के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ेगा.
सरकार ने सोलर ग्लास के मैन्युफैक्चरिंग में इस्तेमाल होने वाले सोडियम एंटी मोनेट के इंपोर्ट पर भी बेसिक कस्टम ड्यूटी से छूट देने का प्रस्ताव रखा है. इसके साथ ही भारत में क्रिटिकल मिनरल्स की प्रोसेसिंग के लिए जरूरी कैपिटल गुड्स के इंपोर्ट को भी ड्यूटी फ्री करने का ऐलान किया गया है. इससे सोलर और बैटरी इंडस्ट्री को मजबूती मिलने की उम्मीद है.
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