भीषण गर्मी से खराब हो रही शाही लीची की फसल, कृषि वैज्ञानिक ने बताए बचाव के तरीके

मुजफ्फरपुर में भीषण गर्मी और बारिश ना होने की वजह से शाही लीची की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है, जिसकी वजह से इस साल लीची के उत्पादन में कमी देखने को मिल सकती है. वहीं राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक ने लीची की फसल को बचाने के तरीके बताए हैं.

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मणि भूषण शर्मा

  • मुजफ्फरपुर,
  • 07 मई 2024,
  • अपडेटेड 11:53 AM IST

भारत में शाही लीची का सबसे अधिक उत्पादन बिहार के मुजफ्फरपुर में किया जाता है. यहां से कई देशों में शाही लीची की सप्लाई होती है. लेकिन इस साल भीषण गर्मी पड़ने की वजह से शाही लीची के उत्पादन पर बुरा असर पड़ सकता है. तेज धूप और कम बारिश से शाही लीची के फल फटने के साथ-साथ जल रहे हैं, जिसको लेकर शाही लीची के किसान मायूस हैं. अगर ऐसा ही मौसम एक सप्ताह तक रहा तो इस बार प्रसिद्ध शाही लीची मार्केट में कम दिखेगी.

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शाही लीची की फसल को बचाने के लिए कृषि वैज्ञानिक ने दिए सुझाव

शाही लीची को मौसम की बेरुखी से बचाने के लिए राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक ने बताया कि लीची के बाग में नमी बनाएं रखें और पानी का छिड़काव करते रहे. इसके अलावा बोरोन का छिड़काव करें, इसमें 0.4 प्रतिशत ब्रॉक्स लें और 1 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें. उन्होंने बताया कि फलों के लौंग के आकार का बन जाने पर बोरॉन का पहला छिड़काव (अप्रैल प्रथम सप्ताह में ) 4 ग्राम प्रति लीटर पानी एवं दूसरा छिड़काव फलों के रंग के शुरूआत (लाली) होने के समय (मई प्रथम सप्ताह) में करें. इससे फलों के फटने की समस्या कम हो जाती है.



भीषण गर्मी से आम और  लीची के बगीचों में बड़ी तेजी से फलों में फटने के साथ पेड़ से फल झड़ने से किसान परेशान हैं. चिलचिलाती गर्मी से फलों की शुरुआती वृद्धि के दौरान फल के त्वचा का असामान्य विकास इस विकार को बढ़ावा दे रहा है. वहीं किसानों का कहना है कि लीची और आम के फलों के फटने से भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. आम और लीची को बचाने के लिए फिलहाल बारिश नहीं होने के कारण टैंकर से छिड़काव करना पड़ रहा है, जिससे उपज की लागत में भारी वृद्धि हो रही है. 



लीची किसान बनवारी सिंह ने बताया कि लीची हम लोगों की प्रमुख नगदी फसल है, लेकिन लगातार तेज धूप और बारिश नहीं होने की वजह से फल फट और जल रहा है, जिससे शाही लीची खराब हो गई है. वहीं अगर एक सप्ताह के अंदर बारिश नहीं हुई तो चने की फसल भी खराब हो सकती है.



लीची अनुसंधान केन्द्र के फ्रूट साइंटिस्ट डॉक्टर सुनील कुमार ने बताया कि लीची का फल फटने की जो समस्या है उसका कारण है पौधों में सूक्ष्म पोषक तत्वों और नमी की कमी, इसी वजह से शाही लीची के फल फट रहे हैं. इसका साधारण उपाय यह है कि फल लगने के 15 से 20 दिन के बाद ब्रॉन और बोरेक्स 0.4 प्रतिशत प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें. इसके अलावा फलों के गुच्छों को टीसू के बैग से ढक सकते हैं. इससे फलों पर तेज धूप नहीं पड़ेगी और शाही लीची के फलों की फटने की समस्या भी खत्म हो जाएगी.

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