यूपी: कीटनाशकों के बैन से क्‍यों नाराज हुए किसान? जानें फसलों पर कितना पड़ेगा असर

उत्तर प्रदेश के 30 जिलों में कुल 10 प्रकार के कीटनाशक रसायनों के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी गई है. सरकार के मुताबिक, इन कीटनाशकों का प्रयोग बासमती चावल के उत्पादकों के हित में नहीं है. वहीं, दूसरी तरफ कई किसान बिना विकल्प दिए अचानक कीटनाशकों पर प्रतिबंध लगाने से नाराज नजर आ रहे हैं.

Advertisement
Uttar Pradesh Govt bans 10 Pesticides Uttar Pradesh Govt bans 10 Pesticides

कुमार अभिषेक / उदय गुप्ता

  • लखनऊ,
  • 05 अक्टूबर 2022,
  • अपडेटेड 4:57 PM IST

Uttar Pradesh Govt bans 10 Pesticides: उत्तर प्रदेश सरकार ने धान की फसलों को बचाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कीटनाशकों को लेकर एडवाइजरी जारी की है. एडवाइजरी के मुताबिक, प्रदेश के 30 जिलों में  कुल 10 प्रकार के कीटनाशक रसायनों के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी गई है. सरकार का कहना है कि इन कीटनाशकों का प्रयोग बासमती चावल के उत्पादकों के हित में नहीं है.

Advertisement

उत्तर प्रदेश सरकार के विशेष सचिव ऋषिरेन्द्र कुमार की तरफ से पिछले 30 सितंबर 2022 को बाकायदा एक अधिसूचना जारी की गई है. इन 10 कीटनाशकों का प्रयोग बासमती चावल के विक्रय, वितरण करने वाले किसानों के हित में नहीं है. 

इन जिलों में लगाई गई है रोक 

बासमती चावल पर कीटनाशकों के प्रयोग पर आगरा, अलीगढ़, औरैया, बागपत, बरेली, बिजनौर, बदायूं, बुलंदशहर, एटा, कासगंज, फर्रुखाबाद, फिरोजाबाद, इटावा, गौतम बुध नगर, गाजियाबाद, हापुड़, हाथरस, मथुरा, मैनपुरी, मेरठ, मुरादाबाद, अमरोहा, कन्नौज, मुजफ्फरनगर, शामली, पीलीभीत, रामपुर, सहारनपुर, शाहजहांपुर और संभल में प्रतिबंध लगाया गया है.

इन कीटनाशकों पर लगाया गया है प्रतिबंध 
 >ट्राईसाईक्लाजोल
 >बुप्रोफेजिन
 >एसीफेट
 >क्लोरपीरिफॉस
 >मेथामीडोफास
 >प्रॉपिकॉनाजोल
 >थायोमेथाकसाम
 >प्रोफेनोफास
 >आइसोप्रोथिओलान
 >कार्बेंडाजिम

मुजफ्फरनगर में किसानों की ये है राय
मुजफ्फरनगर के किसान सरकार के इस फैसले को किसान विरोधी बता रहे हैं. किसान पिंटू चौधरी का कहना है कि सरकार ने इन कीटनाशक दवाइयों को बंद करने का गलत फैसला ले लिया है. किसान पहले ही बर्बादी की कगार पर है और अब इन दवाइयों के बंद होने पर किसानों के सामने एक और नई परेशानी खड़ी हो जाएगी.

Advertisement

किसान प्रमोद चौधरी के मुताबिक, फसलों में लगने वाले रोगों के कारण पहले ही पैदावार कम हो रही है. फसलों में कीटनाशक के छिड़काव करने के बाद भी रोग लग ही जाता है. अब कीटनाशक ही बंद हो जाएंगे तो फसलों का क्या होगा. फसल ज्यादा खराब होगी साथ में किसानों की परेशानियां भी बढ़ेगी. इसके विकल्प तौर पर अन्य कोई दवाइयां बाजार में उपलब्ध करानी होगी ताकि फसलों को बचाया जा सके.

किसान बालिन्दर चौधरी की माने तो इन दवाइयों को बंद करने के बाद किसानों के सामने बहुत बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी. मोटा पैसा खर्च करके किसान अपने खेतों में कीटनाशक दवाई छिड़क कर कुछ हद तक अपनी फसलों को बचा पाते हैं. अब किसानों के सामने कोई विकल्प नहीं बचेगा. इससे उनका नुकसान ज्यादा होगा.

पीलीभीत के किसानों ने सरकार से जताई असहमति   
उत्तर प्रदेश राज्य सरकार के 30 बासमती उत्पादक जिलों में बासमती धान की फसल पर 10 कीटनाशक दवाइयों के विक्रय वितरण व प्रयोग पर रोक लगाई है. पीलीभीत के किसानों का कहना है कि एकदम कीटनाशक दवाइयों  पर रोक न लगाई जाए. पीलीभीत के अग्रणी किसान और किसान संगठन से जुड़े बलजिंदर सिंह नें बताया कि सरकार ऑर्गेनिक खेती पर जोर दे रही है. सूंडी के प्रकोप की वजह से बासमाती चावल में इन कीटनाशकों का प्रयोग ज्यादा होगा. एकदम से इन दवाओं के प्रयोग से उनकी फसलों को काफी नुकसान होगा.

Advertisement

सरकार के फरमान से एटा के किसान भी परेशान 
सरकार के इस फरमान से एटा के किसान भी असहमति जता रहे हैं. एटा के रहने वाले राजकुमार सिंह नाम के किसान ने बताया कि किसान पहले से ही बहुत परेशान है पहले बारिश ना होने से फसल को नुकसान हुआ था. फिर ज्यादा बारिश के चलते फसलों को नुकसान हुआ है. सरकार इन बातों पर ध्यान दिए बिना नए नियम बना रही है. इन कीटनाशकों के बैन से हमारे फसल पर प्रभाव पड़ेगा. इस नियम को लाने से पहले सरकार को कोई ऐसा विकल्प देना चाहिए था, जिससे फसलों को कीटों और बीमारियों से बचाया जा सके.

सरकार के फैसले से सहमत भी दिखे कुछ किसान 
धान की फसल और बासमती के अच्छे उत्पादन के लिए कीटनाशक प्रतिबंध लगने के बाद इटावा के किसानों ने एक तरफ सराहना की तो दूसरी तरफ फसलों को नुकसान के बचाव के लिए विकल्प देने के लिए भी मांग की है.

(मुजफ्फरनगर से संदीप सैनी, पीलीभीत से सौरभ पांडे, एटा से देवेश पाल सिंह और इटावा से अमित तिवारी के इनपुट के साथ)

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement