Success Story: मां-बाप की सेवा के लिए छोड़ी सेना की नौकरी, आज जैविक खेती से कमाते हैं 50 हजार रुपये महीना

भारतीय सेना में नौकरी कर रहे बेटे को पता चला कि मां-बाप को कैंसर है. इसके बाद परिवार की सेवा करने के लिए उन्होंने नौकरी छोड़ दी और गांव में ही जैविक खेती शुरू कर दी. आज वह इससे बढ़िया मुनाफा कमा रहे हैं. साथ ही मां-बाप के पास रहकर उनकी सेवा भी करते हैं.

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ऋतिक राजपूत

  • बिजनौर,
  • 07 अप्रैल 2024,
  • अपडेटेड 2:19 PM IST

उत्तर प्रदेश के बिजनौर के रहने वाले एक किसान ने अनूठी मिसाल पेश की है. मां-बाप की परेशानियों के कारण सेना में काम कर रहे इस युवक ने नौकरी छोड़कर गांव में जैविक खेती शुरू कर दी. आज वह इससे बढ़िया मुनाफा कमा रहे हैं. उन्होंने आजतक से खास बातचीत में अपने सफर को शेयर किया.

बिजनौर जिले के रहने वाले पूर्व सैनिक राहुल ने सेना की नौकरी छोड़ी और गांव में ही जैविक खेती करने लगे. इससे आज वह महीने में 50000 रुपये की आमदनी करते हैं. यही नहीं इलाके में किसानों को जैविक खेती की तकनीक भी सिखा रहे हैं. उन्होंने आजतक को बताया कि वह अपने मां-बाप के पास रहकर उनकी सेवा के साथ ही जैविक खेती भी करते हैं.

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उन्होंने आजतक से बातचीत में बताया कि सेना में नौकरी करने के दौरान उन्हें पता चला कि उनके माता-पिता को कैंसर है. इसके बाद वह उनके सेवा के लिए नौकरी छोड़ दी. घर आने के बाद इनकम के लिए उन्होंने जैविक खेती की ठानी और इसकी  शुरुआत कर दी. उन्होंने 3 एकड़ जमीन में 3500 केले के पौधे लगाएं हैं. वहीं, 5 एकड़ की जमीन पर जैविक तरीके से गन्ना की खेती भी करते हैं. उन्होंने आगे बताया कि एक सीजन में प्रत्येक पौधे से लगभग 24 किलो केला होता है. इसे बेचकर उन्हें प्रत्येक महीने 50 से 55 हजार रुपये की कमाई होती है.

जैविक खेती के लिए किसानों को किया प्रेरित

राहुल खुद तो खेती करते ही हैं साथ ही जगह-जगह जाकर किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित भी करते हैं. उन्होंने बताया कि जैविक खेती से लोगों के स्वास्थ्य को काफी फायदा है. वह चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा किसान जैविक खेती करें. क्योंकि इसके फसलों के सेवन से लोग कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से बच सकते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि फिलहाल उन्हें फसल का सही दाम नहीं मिल पा रहा है. एक्सपोर्टर तो तैयार हैं लेकिन उनके पास अभी ज्यादा क्वांटिटी नहीं है. इस वजह से वह बड़े स्तर पर इस काम को नहीं कर पा रहे हैं.

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ड्रिप सिंचाई का करते हैं उपयोग

राहुल ने बताया कि वह अपने खेत में ड्रिप सिंचाई का उपयोग करते हैं. इस तकनीक से वह काफी पानी बचाते हैं. ड्रिप सिंचाई सबसे कुशल और सफल तरीका है. ड्रिप सिंचाई खेत में अत्यधिक पानी भरने से रोकती है, यह निराई को भी कम करती है. उन्होंने पिछले महीने फास्ट टैग शुल्क पर 11000 रुपये खर्च किए ताकि किसानों को जैविक खेती के फायदे बताए जा सकें. वहीं, उनका खुद का अपना यूट्यूब चैनल भी है. जहां वह अपनी सामग्री अपलोड करते हैं. वह बताते हैं कि खेती में कीटनाशकों और रासायनिक अप्राकृतिक उर्वरकों का प्रयोग कम से कम करना चाहिए.


 

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