आज के समय में महंगाई काफी बढ़ गई है. वहीं, खाने-पानी की चीजों के दाम भी बढ़ते ही जा रहे हैं, जिसकी वजह से आम आदमी की जेब का भार बढ़ गया है. ऐसे में अगर हम खाने में इस्तेमाल होने वाली कुछ चीजों के पेड़-पौधे घर पर ही लगा लें, तो हम महंगाई से बच सकते हैं. ऑरिगेनों का उपयोग पिज्जा और पास्ता में खूब किया जाता है और बाजार से खरीदने पर यह काफी महंगा भी मिलता है. ऐसे में आप ऑरिगेनों का पौधा घर पर गमले में भी लगा सकते हैं, जिसके लिए राष्ट्रीय बीज निगम की वेबसाइट से आप आसानी से ऑरिगेनो के बीज खरीद सकते हैं. बता दें कि राष्ट्रीय बीज निगम की तरफ से ऑरिगेनो के बीज को खरीदने पर ऑफर भी दिया जा रहा है.
ऐसे खरीदें ऑरिगेनो के बीज
राष्ट्रीय बीज निगम (National Seeds Corporation) किसानों की सुविधा के लिए ऑनलाइन ऑरिगेनो की बीज बेच रहा है और बीज खरीदने पर एक गिफ्ट हैंपर भी दे रहा है. ऐसे में ऑरिगेनो के बीज को आप ओएनडीसी के ऑनलाइन स्टोर से खरीद सकते हैं. यहां किसानों को कई अन्य प्रकार की फसलों के बीज भी आसानी से मिल जाएंगे. किसान इसे ऑनलाइन ऑर्डर कर सकते हैं, जिसकी डिलीवरी उन्हें आसानी से घर पर ही मिल जाएगी.
बीज की खरीदी पर मिलेगा ये गिफ्ट
राष्ट्रीय बीज निगम की वेबसाइट से ऑरिगेनो के बीज खरीदने पर आपको एक टी-शर्ट मुफ्त मिलेगी. बता दें कि ये ऑफर सिर्फ 22 सितंबर तक ही उपलब्ध है. वहीं, ये सामान आपको बाजार की कीमतों से सस्ता मिलेगा. बात करें ऑरिगेनो के बीज की कीमत की तो इसके 2 पैकेट आपको फिलहाल 5 प्रतिशत छूट के साथ 190 रुपये में राष्ट्रीय बीज निगम की वेबसाइट पर मिल जाएगा.
ऐसे लगाएं ऑरिगेनो का पौधा
ओरिगैनो के पौधे को आप बीज या कटिंग की मदद से उगा सकते हैं. इसके लिए सबसे पहले जल निकासी वाले गमले में साफ मिट्टी डालें. ध्यान रहे कि आप गमले में ऊपर तक मिट्टी ना डालें. ऐसा करने पर पानी के लिए जगह नहीं बच पाएगी. इसके बाद गमले में ओरिगैनो के बीज डालें और उसके ऊपर हल्की-हल्की मिट्टी डाल दें. फिर गमले में पानी डालें जिससे बीज और मिट्टी को नमी मिलेगी. ऐसे आपका पौधा लगभग 3 महीने में तैयार हो जाएगा. वहीं, गमले में केमिकल वाले खाद देने के बजाए ओरिगैनो के पौधे में प्राकृतिक खाद डालें.
ओरिगैनो के पौधे को आप सालभर में कभी भी लगा सकते हैं. फिर भी अगर आप गर्मी के मौसम में ओरिगैनो लगाएंगे तो ज्यादा अच्छा रहेगा. इस पौधे को घर के बाहर और अंदर में से कहीं भी लगा सकते हैं.
आजतक एग्रीकल्चर डेस्क