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Olympics: जीत के बाद गोलपोस्ट पर क्यों बैठ गए थे श्रीजेश? टीम इंडिया की 'दीवार' ने दिया ये जवाब

टीम इंडिया की इस जीत में पूर्व कप्तान और गोलकीपर पीआर श्रीजेश का अहम योगदान रहा. श्रीजेश टीम के सबसे अनुभवी खिलाड़ियों में से एक हैं और ओलंपिक में पदक पाने का सपना वह कितने वर्षों से पाले होंगे जो आज जाकर सच हुआ है.

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PR Sreejesh (Photo-Getty Images) PR Sreejesh (Photo-Getty Images)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • श्रीजेश ने टीम इंडिया के लिए बचाए कई गोल
  • टीम इंडिया के कप्तान रह चुके हैं पीआर श्रीजेश

भारत की पुरुष हॉकी टीम ने टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक पर कब्जा कर इतिहास रच दिया. टीम इंडिया ने बुधवार को जर्मनी को 5-4 से हराकर ओलंपिक में 41 साल बाद पदक अपने नाम किया. इस जीत के बाद टोक्यो से लेकर दिल्ली तक जश्न का माहौल है. खिलाड़ियों के परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं है. 

टीम इंडिया की इस जीत में पूर्व कप्तान और गोलकीपर पीआर श्रीजेश का अहम योगदान रहा. श्रीजेश टीम के सबसे अनुभवी खिलाड़ियों में से एक हैं. ओलंपिक में पदक पाने का सपना वह कितने वर्षों से पाले होंगे जो आज जाकर सच हुआ है.

ये जीत उनके लिए कितनी खास है ये उस तस्वीर से ही साफ हो जाता है जिसमें वह गोलपोस्ट पर बैठे हुए नजर आ रहे हैं. श्रीजेश की ये फोटो सोशल मीडिया पर वायरल भी हो रही है. 

इसे लेकर जब उनसे सवाल किया तो उन्होंने वह जवाब दिया जो आमतौर पर हर एक गोलकीपर देता. जीत के बाद 'आजतक' से बात करते हुए श्रीजेश ने कहा, 'मेरे लिए गोलपोस्ट ही सबकुछ है. मैंने अपनी पूरी जिंदगी गोलपोस्ट पर ही बिताई है. तो मैं ये दिखाना चाहता था कि इस गोलपोस्ट का ओनर मैं हूं.' 


श्रीजेश जीत के बाद जश्न मनाते हुए कम ही दिखते हैं, लेकिन ये जीत यादगार है तो उनका जश्न मनाने का ये तरीका भी हॉकी फैन्स को याद रहेगा. श्रीजेश भारतीय हॉकी टीम में उस किरदार में दिखते हैं जो कभी राहुल द्रविड़ भारतीय क्रिकेट टीम के लिए निभाते थे. द्रविड़ ने अपने प्रदर्शन से टीम इंडिया को ना जाने कितने मैचों में जीत दिलाई, लेकिन वो हमेशा लाइमलाइट से दूर रहे. कुछ ऐसे ही श्रीजेश भी हैं.

श्रीजेश सूर्खियों से दूर रहना पसंद करते हैं और बेहद शांत स्वभाव वाले शख्सियत हैं. एक होता है जो दवाब में बिखर जाता है और एक होता जो दबाव में निखर जाता है, श्रीजेश निखरने वालों में से हैं.

'आज हर चीज के लिए तैयार था'

श्रीजेश ने कहा, ‘मैं आज हर चीज के लिए तैयार था. यह 60 मिनट सबसे अहम थे. मैं 21 साल से हॉकी खेल रहा हूं और मैंने खुद से इतना ही कहा कि 21 साल का अनुभव इस 60 मिनट में झोंक दो.’ आखिरी पेनल्टी पर उन्होंने कहा,‘ मैंने खुद से इतना ही कहा कि तुम 21 साल से खेल रहे हो और अभी तुम्हे यही करना है. एक पेनल्टी बचानी है.’

पूरे ओलंपिक के दौरान इस 'दीवार' ने  कई मौकों पर भारतीय टीम के लिए संकटमोचक की भूमिका निभाई. उन्होंने कहा ,‘मेरी प्राथमिकता गोल होने से रोकना है. इसके बाद दूसरा काम सीनियर खिलाड़ी होने के नाते टीम का हौसला बढ़ाना है. मुझे लगता है कि मैने अपना काम अच्छे से किया.’

मैच के बाद उन्होंने अपने पिता को वीडियो कॉल किया. उन्होंने कहा ,‘मैंने सिर्फ उन्हें फोन किया... मैं उन्हें बताना चाहता था कि हमने पदक जीत लिया है और मेरा पदक उनके लिए है.’
 

जीत के बाद कप्तान ने क्या कहा

इस ऐतिहासिक मैच को लेकर टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह ने कहा कि हमने मुकाबले से पहले दबाव नहीं लिया. हम ये सोचे थे कि हम एन्जॉय करेंगे. जो हमारा नैचुरल गेम है उसी को खेलना है. 

मनप्रीत ने कहा कि हमने आपस में बात की थी कि अगर हम मेडल के बारे में ज्यादा सोचेंगे तो हम अपना गैमप्लान नहीं बना पाएंगे. हमें शुरू से आखिर तक अपना बेस्ट देना था और हम लोगों ने वही किया.

उन्होंने कहा कि हम 3-1 से पीछे भी थे. उस वक्त भी हम पॉजिटिव रहे और किसी भी खिलाड़ी ने हार नहीं मानी थी. 

 

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