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साइंस न्यूज़

सिर्फ छिपकली नहीं, ये जीव खतरे में हाथ-पैर और सेक्स ऑर्गन भी काट देते हैं

Animals self Amputate
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आपने देखा होगा कि जब भी छिपकली को चोट लगती है या वो खतरे में होती है तो अपनी पूंछ शरीर से अलग कर देती है. खतरे में अपने अंग को अलग करने की जैविक कला सिर्फ छिपकलियों के पास ही नहीं होती. ऐसे कई जीव हैं जो जरूरत पड़ने पर अपने हाथ-पैर यहां तक कि अपने सेक्स ऑर्गन्स यानी जननांगों को खुद ही शरीर से अलग कर देते हैं. आइए जानते हैं इन जीवों के बारे में... (फोटोःगेटी)

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फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी के पीएचडी स्टूडेंट और बिहेविरल इकोलॉजिस्ट जैटेरी एंबर्ट्स कहते हैं कि जब भी जीवन और मौत के बीच चुनाव करना होता है. तब ऐसे जीव जिंदा रहने के लिए अपने अंगों की कुर्बानी दे देते हैं. इंसानों की तरह ये जीव अंगों के कटने पर खून बहाकर मरते नहीं है, बल्कि जिंदा रहते हैं. बाद में उनके अलग हुए अंग वापस पैदा हो जाते हैं. इनके घाव 24 से 48 घंटे में वापस भर जाते हैं. (फोटोःगेटी)

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आमतौर पर शिकारियों से बचने के लिए छिपकलियां ऐसा करती हैं. ऐसे ही जब कोई टिड्डे पेड़ों के तरल पदार्थ में फंस कर अपने पैर निकाल नहीं पाते तब उस समय वो अपने पैर अपने शरीर से अलग कर देते हैं. (फोटोःगेटी)

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ठीक इसी तरह जब पेड़ों के तरल पदार्थ या अपने जाल में मकड़ियां खुद फंस जाती हैं, तब वो अपने शरीर की त्वचा को बाहर निकालती हैं. इस प्रक्रिया के दौरान टिड्डे जैसे कीड़ों और मकड़ियों को असहनीय पीड़ा होती है, लेकिन अपनी जिंदगी बचाने के लिए ये ऐसा ही करती हैं. (फोटोःगेटी)

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समुद्री दैत्य के नाम से प्रसिद्ध स्क्विड जब भी मुसीबत में फंसता है तब वह अपने सारे आठों सूंड़ की विपरीत दिशा में तेजी से झटका देता है. इससे उसके सारे सूंड़ अलग हो जाते हैं. स्क्विड अपने सूंड़ों को अलग करके तेजी से विपरीत दिशा में भाग जाते हैं. ताकि शिकार के जबड़ों से बच सकें. (फोटोःगेटी)

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छिपकलियों की ही प्रजाति के इगुआना मुसीबत के समय में अपनी पूंछ तोड़ देते हैं. अगर इनको चोट लगती है और वो लंबे समय तक ठीक नहीं होती. ऐसे समय में इगुआना अपने शरीर के चोटिल हिस्से की मांसपेशियों को अलग कर देते हैं. कुछ ऐसा ही काम सैलामैंडर नाम की छिपकली भी करती है. ये अपनी आंखों तक को अलग करके वापस आंखें पैदा कर लेती हैं. (फोटोःगेटी)

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अफ्रीका के कंटीले चूहे इकलौते ऐसे स्तनधारी जीव हैं जो अपने शरीर से त्वचा को अलग करके उसे वापस पैदा कर लेते हैं. इंसानों के शरीर में त्वचा को वापस जेनरेट करने की क्षमता बहुत धीमी और कमजोर होती है. कई बार वैसी त्वचा नहीं आती जैसे चोट से पहले होती थी. ऐसा ही कुछ खास प्रकार की चीटियां करती हैं. (फोटोःगेटी)

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दक्षिण अमेरिका में बिच्छुओं की एक प्रजाति होती है एनाटेरिस. ये खतरे में होती हैं तब अपनी नुकीली पूंछ को अलग करके भागने में सफल हो जाती हैं. हालांकि इसमें उनके साथ एक दिक्कत होती है कि उनके पाचन तंत्र का निचला हिस्सा यानी मल द्वार इसी पूंछ के पास होता है. एक बार अगर पूंछ अलग हो गई तो वो मल नहीं निकाल पाते. शरीर के अंदर मल जमा होने से वो मर जाते हैं. कुछ ऐसी ही स्थिति केकड़ों के साथ भी होता है. (फोटोःगेटी)

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केकड़े भी अपनी शरीर के पिछले हिस्से को बिच्छुओं की तरह ही अलग करना जानते हैं. लेकिन उनके साथ भी मल द्वार बंद होने की दिक्कत होती है. ऐसे में उनका शरीर सड़ने लगता है. लेकिन इस मामले में केकड़े, बिच्छुओं की तुलना में बेहतर हैं. क्योंकि ये मल को निकालने के लिए अपने पिछले हिस्से खोल देते हैं. (फोटोःगेटी)

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समुद्री स्टारफिश और रेड सी स्लग ऐसे जीव होते हैं कि ये सेक्स करने के बाद नर जीव अपने लिंग को छोड़ मादा के शरीर में ही छोड़ देते हैं. घबराने की जरूरत नहीं है. इन जीवों के पास तीन लिंग होते हैं. यानी एक अगर मादा के साथ छूट भी गया तो बैकअप में दो लिंग मौजूद रहते हैं. (फोटोःगेटी)

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ऐसी ही स्थिति मकड़ियों की कुछ प्रजातियां के साथ भी है. वो भी सेक्स करने बाद अपने लिंग को काटकर अलग कर देते हैं. ये मादा के अंग के अंदर ही छूट जाता है. इसकी वजह से इनका स्पर्म मादा के शरीर में लिंग की वजह से अंदर ही रहता है. बाहर नहीं निकलता. (फोटोःगेटी)